जिओ और जीने दो, अंहिसा का धर्मतत्व

अंहिसा परम धर्म है। इस सत्य की उदघोषणा भगवान महावीर ने की है । आज उनकी जयंती है उन्हें नमन। जैन धर्मावलंबी महावीर स्वामी की इस उदघोषणा को अपने जीवन में उतारने की कोशिश कर रहे हैं और इससे प्रेरित होकर अपना जीवन धर्म के मार्ग पर ले जाते हुए समाज की सेवा भी कर रहे हैं। चाहे अनुयायी दिगम्बर हो या चाहे श्वेताम्बर । सभी ने बखूबी जान लिया है कि जीवन का सार अंहिसा में है।

इस विराट जगत में मनुष्य को ही जीवन नहीं मिला है बल्कि प्रकृति ने चर-अराचर जिसमें पेड़ पौधे,वनस्पती,जीव जन्तु,पशु भी शामिल है उन्हें भी जीवन दिया है । इन सबके प्रति मैत्री का भाव रख्नना और उन्हें भी वैसे ही जीवन जीने के लिए अवसर देना जैसे परमात्मा ने हम सबको दिया है यही भगवान महावीर का जिओ और जीने दो का सिद्धांत और उनके जिनत्व की मूल शिक्षा अंहिसा का धर्मतत्व भी है।

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