राष्ट्रीय

डकैती और हत्या के मामले में कोर्ट ने 31 साल बाद फैसला सुनाया

ग्वालटोली में डकैती और हत्या के मामले एडीजे-17 की कोर्ट ने चार आरोपियों को 10 वर्ष की कैद सुनाई है। 10-10 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। चार आरोपियों की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने दो को बरी कर दिया है।13 अक्तूबर 1986 को ग्वालटोली निवासी फूलचंद्र के घर डकैतों ने हमला बोला था।

11 बदमाश सामान लूटकर ले जा रहे थे। फूलचंद्र और उनके पिता रम्मा व परिजनों ने विरोध किया तो डकैतों ने उन पर चाकुओं से हमला कर दिया था। हैलट अस्पताल में 10 दिन बाद रम्मा की मौत हो गई थी। इससे पहले रम्मा ने बयान दर्ज करा दिए थे। पुलिस ने 11 लोगों को आरोपी बनाया था।

एडीजीसी रामकुमारी भट्ट ने बताया कि एडीजे 17 चंद्र प्रकाश तिवारी ने मोहन, श्यामलाल, रामचंद्र और किशन पुत्र भगवानदीन को 10 वर्ष की सजा दी है। कल्लू व किशन को बरी कर दिया है। नन्हा, रमेश, शंकर और चौथी की मौत हो चुकी है। ज्यादातर आरोपी मंगलपुरवा गांव के रहने वाले हैं। वादी की पत्नी रामश्री, नौकर सजीवन और धनीराम कील गवाही पर कोर्ट ने यह फैसला दिया है।

वादी की हो चुकी मौत,20 वर्ष तक रहा स्टे

इसके चक्कर में लगभग 10 वर्ष तक सुनवाई नहीं हो सकी। यही वजह रही कि फैसला आने में 31 साल लग गए। सुनवाई में समय लगने के चलते डकैती और हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराने वाले वादी फूलचंद की मौत हो चुकी है। उनकी पत्नी रामश्री ने पूरा मुकदमा लड़ा। एक आरोपी की सुनवाई अलग चल रही है।

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31 साल बाद
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