पशुधन का होगा अब समुचित दोहन : जिले के 47 ग्राम पंचायतो में बन रहे है गौठान

पशु संवर्धन के साथ ग्रामीण आजीविका की भी हो रही है सार्थक पहल

कोण्डागांव : छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ग्रामीण आजीविका एवं अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देने के लिए नरवा, गरूवा, घुरवा, बारी आधारित योजनाओं का विधिवत क्रियान्वयन कोण्डागांव जिले में भी परिलक्षित हो रहा है।

इस संबंध में कोण्डागांव जिले के कलेक्टर नीलकंठ टीकाम के निर्देशानुसार तथा जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी नुपूर राशि पन्ना के मार्गदर्शन में योजना के महत्वपूर्ण घटक गरूवा (गौवंशीय एवं भैंसवंशीय) पशुओं के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु डे-केयर सेंटर के रूप में जिले के 47 गांव में गौठान का निर्माण तीव्रगति से किया जा रहा है।

जबकि विकासखण्ड कोण्डागांव के अंतर्गत ग्राम बड़ेकनेरा तथा विकासखण्ड केशकाल के ग्राम मुरनार में गौठान का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इसके अलावा चयनित ग्रामों में विकासखण्ड फरसगांव के बानगांव, आलोर, सोड़मा, बड़ेडोंगर, मोड़ेंगा, सिरसीकलार, लंजोड़ा, जुगानीकलार, देवगांव,

गट्टीपलना, विकासखण्ड माकड़ी में ग्राम करण्डी, छोटेसलना, बड़ेघोड़सोड़ा, कोसाहरदुली, भिरण्डा, बालोण्ड, राकसबेड़ा, जरण्डी, ओटेण्डा, हीरापुर, विकासखण्ड बड़ेराजपुर में बैजनपुरी, लिहागांव, टेंवसा, विकासखण्ड केशकाल में मुरनार के अलावा करमरी, बहीगांव, कोदोभाट, कर्रारमेटा, चारभाटा, कोरकोटी, अड़ेंगा ग्राम शामिल है।

उल्लेखनीय है कि जिले में गौठान का चयन ऐसे स्थल को किया जा रहा है जहां पहले से ही हरियाली मौजूद है ताकि पशुओं को पूर्णतः प्राकृतिक वातावरण मिले। इसके साथ ही गौठान में शेड निर्माण, पानी की व्यवस्था हेतु ट्यूबवेल एवं सोलर पंप, चारे की व्यवस्था हेतु चारागाह, कोटना निर्माण, चारा भण्डारण कक्ष, पशु चिकित्सा कक्ष, चरवाहा कक्ष, वर्मी कम्पोस्ट टांका,

नाडेप टांका तथा वृक्षारोपण के कार्य तेजी से कराये जा रहे है। गौठान में पशुओं को दिन में 7 से 8 घण्टे रखा जाएगा, जहॉ उनकी पूरी देखभाल की जाएगी। गौठान के प्रबंधन संचालन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के स्व-सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा किया जाएगा जिसे गौठान प्रबंधन समिति कहा जाएगा।

गौठान संचालन से महिलाओं को जोड़ा जा रहा है ताकि गौठान में उत्पन्न होने वाले खाद और अन्य आय मूलक गतिविधियों से आजीविका का संवर्धन कर अपने को आत्मनिर्भर बना सके। प्रबंधन समिति पशुओं को चराने के लिए चरवाहे की व्यवस्था भी करेगी। प्रत्येक गौठान में गोबर एवं गौमूत्र को संकलित कर समूह की महिलाएं विभिन्न उपयोग की वस्तुओं के रूप में विक्री कर आय प्राप्त करेंगी।

साथ ही गोबर का संचयन कर बायोगैस संयंत्र की स्थापना भी की जाएगी जिससे घरेलू ईंधन ग्रामीणों के घरों तक पहुॅचाई जाएगी। वहीं वर्मी कम्पोस्ट टांका के द्वारा जैविक खाद का निर्माण कर किफायती दरों पर किसानों को उपलब्ध करायी जाएगी।

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