छत्तीसगढ़

स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी: चन्द्रशेखर

रायपुर : छत्तीसगढ़ को समृद्ध बनाने स्थानीय निकायों-पंचायतों, नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्म निर्भर बनाना बहुत जरूरी है। उक्त बात कार्यशाला में चन्द्रशेखर साहू ने कही। शनिवार को सिविल लाइन स्थित नवीन विश्राम गृह के सभागृह में स्थानीय निकायों का लोकवित्त और जीएसटी वर्तमान परिप्रेक्ष्य विषय पर कार्यशाला हुई। जिसमें प्रदेश के नगरीय निकायों, जिला और जनपद पंचायतों तथा ग्राम पंचायतों के निर्वाचित पदाधिकारी शामिल हुए।
छग राज्य वित्त आयोग की ओर से यह कार्यशाला भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली के साथ संयुक्त रूप से तीन सत्रों में हुई। छग राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष चंद्रशेखर साहू ने कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश में विगत माह जुलाई से एक राष्ट्र, एक कर, एक बाजार के उद्देश्य पर आधारित वस्तु और सेवा कर अधिनियम (जीएसटी) लागू हो गया है। कार्यशाला से पंचायतों और नगरीय निकायों में इसके कुशल संचालन में मदद मिलेगी। साहू ने कार्यशाला में कहा कि वस्तु और सेवा कर अधिनियम (जीएसटी) के माध्यम से एक समृद्ध देश और समृद्ध छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को पाने में पंचायतों और नगरीय निकायों की भी अहम भागीदारी होनी चाहिए। राज्य सरकार की ओर से निकायों के मजबूतीकरण और आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए हर संभव पहल की जा रही है। प्रदेश में इसके लिए हर साल के बजट में पर्याप्त राशि का प्रावधान भी रखा जाता है। कार्यशाला को छत्तीसगढ़ राज्य वित्त आयोग के सदस्य नरेशचन्द्र गुप्ता ने भी सम्बोधित किया।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में राज्य का लोक वित्त और जीएसटी विषय पर राज्य वित्त आयोग दिल्ली के सदस्य तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन नई दिल्ली के सह प्राध्यापक डॉ. वीएन आलोक ने विस्तार से प्रकाश डाला। द्वितीय और तृतीय सत्र में छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग के सदस्य पीपी सोती और केन्द्रीय पंचायती राज मंत्रालय के संयुक्त सचिव संजीव कुमार पटजोशी, छत्तीसगढ़ राज्य वित्त आयोग के सलाहकार बीके लाल की ओर से पंचायतों का आर्थिक ढांचा और विकास-ज्वलंत विषय पर चर्चा की गई। तृतीय सत्र में नगरीय निकाय के वित्तीय संसाधन और विकास विषय पर केन्द्रीय नगरीय प्रशासन और विकास विभाग के पूर्व सचिव एम रामचन्द्रन आदि ने विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर खुली चर्चा हुई और पंचायत तथा नगरीय निकायों के पदाधिकारियों के शंकाओं का समाधान करते हुए सुझाव भी लिए गए।

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