कई बैंकों के बंद रहे ताले, फिर भी बेअसर रहा हड़ताल

अंकित मिंज

बिलासपुर।

केन्द्र और राज्य सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ केन्द्रीय श्रमिक संगठनों और विभिन्न सेक्टरवाईज स्वतंत्र टे्रड यूनियन फेडरेशन के सदस्य 8 और 9 जनवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल चले गए। इस अभियान में बैंक कर्मचारियों और अखिल भारतीय डाक कर्मचारी संघ के सदस्य भी शामिल हुए। दोपहर बाद कई बैंकों के शाखाएं खुली हुई थी। वहीं कई जगहों पर ताले लटके मिले।

हालांकि इस हड़ताल को रोकने के लिए एसईसीएल प्रबंधन ने कंपनी संचालन समिति की बैठक बुलाई थी। एसईसीएल के सीएमडी एपी पंडा की ओर से आहूत इस बैठक में सभी श्रम संगठनों से प्रस्तावित हड़ताल को वापस लेने की अपील की गई।

इस बैठक में संचालन समिति के विभिन्न श्रमसंघों यथा एटक, सीटू, बीएमएस, एचएमएस तथा सीएमओएआई के प्रतिनिधियों के साथ एसईसीएल निदेशक मण्डल एवं शीर्ष प्रबंधन की बातचीत हुई। श्रमसंघों द्वारा प्रस्तावित इस हड़ताल के आलोक में एसईसीएल के सीएमडी द्वारा लिखित अपील जारी कर भी हड़ताल में शामिल न होने का आह्वान किया गया है।

इसमें कहा गया है कि प्रस्तावित हड़ताल के संबंध में औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के प्रावधानों के अंतर्गत जानकारी क्षेत्रीय श्रमायुक्त (केन्द्रीय), बिलासपुर को दी गई है तथा प्रस्तावित हड़ताल के संबंध में संराधन प्रक्रियाधीन है। उक्त में यह भी बताया गया है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2018-19 में एसईसीएल का उत्पादन लक्ष्य 167 मिलियन टन एवं प्रेषण लक्ष्य 170.5 मिलियन टन है तथा अपने उत्पादन लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वर्तमान रफ्तार में और गति लाने की आवश्यकता है ताकि एसईसीएल निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त कर कोयला उद्योग में अपना वर्चस्व बरकरार रख सकें।

साथ ही प्रस्तावित हड़ताल श्रमिक संघों द्वारा प्रेषित सूचना संराधन की प्रक्रिया के अधीन है। ऐसी स्थिति में हड़ताल करना अनुचित एवं गैर-काूननी होगा तथा इसमें भाग लेने की स्थिति में काम नही तो वेतन नहीं के सिद्धांत के आधार पर वेतन का भुगतान नहीं किया जाएगा। साथ ही अन्य कार्यवाही भी की जा सकती है।

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