सरकार को अपना वादा याद दिलाने सरकारी अधिकारियों की तालाबंदी

पुलिस परिवारों के बाद सरकारी कर्मचारियों का आंदोलन सरकार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी करने जा रहा है।

रायपुर। प्रदेश सरकार को अपना वादा याद दिलाने सरकारी अधिकारियों की तालाबंदी में सभी सरकारी दफ्तरों में आज ताला लगाकर चाबी विभाग प्रमुख को सौंप देंगे। शिक्षाकर्मियों और पुलिस परिवारों के बाद सरकारी कर्मचारियों का आंदोलन सरकार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी करने जा रहा है।

प्रदेश के सभी 27 जिलों में अधिकारी-कर्मचारी सामूहिक अवकाश लेकर आंदोलन पर उतरेंगे। कर्मचारियों का गुस्सा इस बात पर है कि सरकार ने 2013 के चुनाव के दौरान चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने की कोई कोशिश नहीं की।

छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के आह्वान पर सभी विभागों के कर्मचारी आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। ढाई लाख कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश का असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ेगा।

मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने पहले यह कहते हुए खुद को आंदोलन से अलग कर लिया था कि विधानसभा सत्र की वजह से मंत्रालय बंद करना उचित नहीं है। लेकिन कर्मचारियों के दबाव के बाद अब मंत्रालयीन कर्मचारी संघ भी आंदोलन में शामिल हो गया है। मंत्रालय के कर्मचारी तालाबंदी तो नहीं करेंगे लेकिन लंच टाइम में गेट नंबर चार पर धरना देकर विरोध जताएंगे।

छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रवक्ता विजय कुमार झा ने बताया कि 27 जून को सुबह राजधानी में सभी दफ्तरों से कर्मचारी जुलूस की शक्ल में बूढ़ातालाब स्थित धरनास्थल पहुंचेंगे और वहां प्रदर्शन करेंगे।

मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कीर्तिवर्धन उपाध्याय ने बताया कि मंत्रालय के 19 कर्मचारियों ने अवकाश का आवेदन दिया है। बाकी लोगों ने विधानसभा की तैयारी के काम के चलते लंच टाइम में काली पट्टी बांधकर विरोध जताने का निर्णय लिया है। संचालनालय में तालाबंदी रहेगी। जिलों में सभी दफ्तर बंद रहेंगे।

विजय झा ने बताया कि 2013 के चुनावी घोषणपत्र में सरकार ने वादा किया था कि केंद्र सरकार जब भी नया वेतनमान लागू करेगी उसी तारीख से राज्य सरकार भी लागू कर देगी।

राज्य में सातवां वेतनमान केंद्र की तर्ज पर एक जनवरी 2016 से लागू किया गया लेकिन बढ़ हुआ वेतन 18 महीने बाद दिया गया। इन 18 महीनों का एरियर्स आजतक नहीं दिया गया है। केंद्र के समान महंगाई भत्ता देने के वादे को भी सरकार भूल गई।

स्वास्थ्य संचालक के आदेश से बिफरे कर्मचारी

कर्मचारियों के आंदोलन को स्वास्थ्य संचालक रानू साहू ने अवैधानिक घोषित किया है। उन्होंने कहा है कि जो भी हड़ताल पर जाएगा उसकी तनख्वाह काटी जाएगी। साहू के इस आदेश से कर्मचारी भड़क गए हैं।

विजय झा ने कहा कि प्रदेश स्तरीय आंदोलन पर निर्णय का अधिकार मुख्य सचिव को होता है। किसी विभाग प्रमुख को निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। रानू साहू जानबूझकर सरकार को बदनाम करने में लगी हुई हैं।

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