लोकसभा प्रत्याशी धनेन्द्र साहू ने संजय, गुरमुखसिहं, चंन्द्रकांता के जख्म में मरहम की जगह नमक-मिर्च तो नहीं छिड़क दिया

हितेश दीक्षित

गरियाबंद। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी रहे लोग क्या बागी लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लोकसभा चुनाव में काम करेंगे यह बात कांग्रेस के कर्मठ कार्यकर्ताओं और आम जनता के साथ साथ बागियों के कारण विधानसभा चुनाव हारने वाले कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी किसी भी स्थिति में तैयार नहीं है।

हालांकि पार्टी के अनुशासन का भय से अनमने मन से काम करने की बात करेंगे लेकिन इन हार का स्वाद को इतनी जल्दी भुला पाना असान नहीं है। अधिकृत प्रत्याशी संजय नेताम विन्द्रानवागढ विधानसभा, गुरमुखसिहं होरा धमतरी, चंन्द्रकांता साहू कुरुद विधानसभा का चुनाव में हार का मुख्य कारण भाजपा का प्रत्याशी नहीं कांग्रेस के बागी प्रत्याशी क्रमशः ओकांर शाह,आंनद पवार, नीलम चन्द्रकार, रहा है।

कांग्रेस के हारे हुए प्रत्याशी स्वयं अपने हार का प्रमुख कारण अपने पार्टी के बागियों को मानते हैं?कांग्रेस से महासमुद लोकसभा क्षेत्र के अधिकृत प्रत्याशी धनेन्द्र साहू ने लोकसभा चुनाव जीतने के लिये कांग्रेस के बागियों को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलावाकर कांग्रेस के लिये काम करने के लिए राजी तो कर लिया धनेन्द्र के इस कदम से क्या उन प्रत्याशियों को खुशी होगी जिनके कारण विधायक बनने का सपना चकनाचूर हो गया।

धनेन्द्र साहू ने क्या गुरमुखसिहं होरा , संजय नेताम, चंन्द्रकांता साहू, विनोद चन्द्राकर से सलाह मशविरा करके बागियों को सीएम हाउस ले गया? बागियों के कारण कांग्रेस की हुई हार से हारे हुए प्रत्याशी और उनके समर्थकों द्वारा बागियों नेताओं को स्वीकार किया जायेगा ? अगर विन्द्रानवागढ, धमतरी, कुरुद विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार बागियों के कारण हुई हैअगर लोकसभा चुनाव में हारे हुए विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस लीड करेगी तो श्रेय का हकदार प्रमुख रुप से विधानसभा चुनाव में हारे हुए कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के बजाय कांग्रेस के टिकट से वंचित होकर बागी चुनाव लड़ने वाले नेता होगे जिसे धनेन्द्र साहू ने मुख्यमंत्री से मुलाकात करवाकर अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया गया है।

लेकिन कितना फायदा और नुकसान होगा यह तो चुनाव का परिणाम ही बतायेगा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इन बागियों को पार्टी में शामिल तो नहीं किया है सिर्फ़ काम कर पार्टी को जिताने के बाद ही पार्टी में वापसी का रास्ता साफ हो गा। कांग्रेस पार्टी ने नहीं धनेन्द्र साहू ने ही प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बागी नेताओं के द्वारा कांग्रेस के पक्ष में काम करने के लिए मुख्यमंत्री के आव्हान पर हामी भरने की बात किया गया है।

धनेन्द्र साहू के विज्ञप्ति से हारे हुए प्रत्याशी के घाव पर मरहम भरा या जख्म में मिर्च डाला गया है इस बात को हारे हुए नेता और समर्थक भली भांति जानते हैं। चर्चाओं के बाजार में बागियों के आने से फायदा कम धनेन्द्र साहू को नुकसान अधिक होने के साथ साथ बाहरी प्रत्याशी का तमगा भी मुसीबत बन सकता है?

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