लोकसभा चुनाव 2019: राहुल की चुनावी रैलियों से तेजस्वी ने बनाई दूरी, अटकलें तेज

पटना। चुनावी रैलियों में महागठबंधन के नेता एक साथ कम ही दिख रहे हैं। यहां तक कि देशस्तर पर प्रमुख पार्टी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की रैलियों में भी घटक दल के नेता मंच साझा नहीं कर रहे हैं। अखाड़े में उम्मीदवारों को उतारने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष की शनिवार को चौथी रैली में भी मंच पर राज्य में सबसे बड़े दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव नहीं दिखे। इसके निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी की प्रदेश इकाई की तीन फरवरी को रैली में भी भाग लिया था। उस समय तेजस्वी यादव ने मंच साझा किया। वह सभा चुनावी नहीं थी। टिकट बंटवारे के बाद चुनावी रैलियों की शुरूआत हुई तो पहली बार राहुल गांधी ने पूर्णिया में सभा की। उनकी दूसरी सभा कटिहार में हुई और तीसरी गया में। किसी भी सभा में तेजस्वी यादव ने मंच साझा नहीं किया।

हालांकि राहुल गांधी के मंच पर आसपास की सीटों से चुनाव लड़ रहे सहायोगी दलों के उम्मीदवार भी रहते हैं और कांग्रेस अध्यक्ष उन्हें जिताने की अपील भी मंच से करते है। गया में मंच पर जीतन राम मांझी थे। लेकिन वह वहां से प्रत्याशी भी हैं। शनिवार को राहुल गांधी की सभा सुपौल में हुई। पहली बार सहयोगी दल के नेता के रूप में उपेन्द्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी वहां मंच पर दिखे। लेकिन तेजस्वी यादव दूसरी जगह सभाएं कर रहे थे।

सुपौल से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में पप्पू यादव की पत्नी रंजीता रंजन चुनाव लड़ रही है। शुरू में वहां राजद ने भी उम्मीदवार देने का फैसला किया था। लेकिन हां-ना करते हुए बाद कांग्रेस को समर्थन दे दिया। अब वहां मंच पर राहुल -तेजस्वी का साथ नहीं दिखने से एक बार फिर कुछ अलग मायने निकाले जाने लगे हैं।

रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने शुक्रवार को सुपौल में राहुल गांधी के सामने कहा कि मधेपुरा से शरद यादव का जीतना जरूरी है। कहा कि सुपौल से रंजीत को जिताएं जरूर, लेकिन मधेपुरा से शरद यादव को भी जिताएं।

कहा कि अगर शरद यादव नहीं जीते तो बड़ा नुकसान होगा। बता दें कि मधेपुरा से सुपौल से कांग्रेस उम्मीदवार रंजीत रंजन के पति पप्पू यादव भी है चुनाव मैदान में हैं। जाहिर है कुशवाहा ने अपरोक्ष रूप से ही सही लेकिन रंजीत रंजन के सामने ही पप्पू यादव को हराने की बात कही।

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