छत्तीसगढ़

लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज, शाह के इस फार्मूले से उम्मीदवारों को मिलेगा टिकट

रायपुर।

विधानसभा के बाद प्रदेश में लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट से वंचित कार्यकर्ता भी लोकसभा की दावेदारी ठोकने की जुगत लगा रहे हैं। इसके चलते उन्होंने सोशल मीडिया में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। यदि प्रदेश में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का पुराना फार्मूला काम करता है, तो जनता की पसंद के साथ सोशल मीडिया की सक्रियता को भी प्रत्याशी चयन को बड़ा आधार बनाया जाएगा।

सांसदों को उठाना पड़ सकता है हार का नुकसान

विधानसभा चुनाव के नतीजे सांसद की टिकट तय करने में अपनी अहम भूमिका निभाएंगे। दरअसल, हर लोकसभा क्षेत्र छह से नौ विधानसभाएं तक आएंगी। इसमें मिली-हार के बाद सांसद की भूमिका भी तय होगी। यदि पार्टी को विधानसभा में नुकसान उठाना पड़ता है, तो वहां के मौजूदा सांसद को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इस बार बदल सकते हैं कई चेहरे

प्रदेश की 11 लोकसभा सीटों में से भाजपा ने 10 सीट जीत थी। इसके बाद भी पार्टी इस बार कई चेहरों को बदल सकती है। इसमें दुर्ग और कांकरे लोकसभा की सीट बदलना लगभग तय है। पिछली बार दुर्ग लोकसभा की प्रत्याशी सरोज पाण्डेय को राज्यसभा का सदस्य बनाकर भेजा गया है।

वहीं कांकेर के सांसद विक्रम उसेण्डी को अंतागढ़ विधानसभा क्षेत्र का प्रत्याशी बनाया गया है। इस वजह से दोनों लोकसभा सीट में भाजपा का नया चेहरा खोजना होगा। इसके अलावा कोरबा सांसद डॉ. बंशीलाल महतो की प्रतिष्ठा भी विधानसभा चुनाव में लगी हुई है। पार्टी ने कोरबा विधानसभा सीट में उनके बेटे विकास महतो को अपना प्रत्याशी बनाया है।

ले रहे फीडबैक

पार्टी सूत्रों की माने तो लोकसभा चुनाव के लिए सर्वे शुरू हो गया है। इसमें निजी एजेंसी के साथ-साथ पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की भी मदद ली जा रही है। वहीं विधानसभा की तर्ज पर दिल्ली स्थित भाजपा के मुख्यालय से भी सर्वे होगा। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी अपने कार्यकर्ताओं को मैदान में उतार दिया था।

चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस खोलेगी पत्ता

भाजपा ने लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर जहां अपने मोहरे चलने शुरू कर दिए हैं, वहीं कांग्रेस को विधानसभा चुनाव के नतीजों का इंतजार है।

नतीजे सामने आने के बाद ही कांग्रेस के रणनीतिकार लोकसभा का पत्ता खोलेगी। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह असफल हुई थी। सूबे की 11 में से केवल एक सीट पर पार्टी को सफलता मिली। उससे पहले विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को निराशा हाथ लगी थी। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने एकमात्र सांसद ताम्रध्वज साहू को भी उतार रखा है।

इस बार कांग्रेस को वापसी की उम्मीद पहले से कहीं अधिक है। इसके बावजूद पार्टी में लोकसभा चुनाव को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं देखी जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नतीजों के विश्लेषण के बाद ही लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन का फार्मूला और चुनाव प्रबंधन की रणनीति तय होगी।

जहां तक मुददों की बात है, तो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ही इसे सेट कर गए हैं। पार्टी नोटबंदी, किसान, भ्रष्टाचार, उद्योगपतियों को अनैतिक मदद और रफाल डील को उछालती रहेगी।

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