सोमवंशी राजाओं का शिव मंदिर जर्जर, शिव भक्तों का लगा मेला

राज शेखर नायर

नगरी।

महर्षि श्रृंगी ऋषि आश्रम के समीप कर्णेश्वर धाम में स्थित सोमवंशी राजाओं द्वारा निर्मित ऐतिहासिक भगवान शिव एवं रामजानकी मंदिर उचित मरम्मत के आभाव में जर्जर हो रही है।

सावन माह होने की वजह से शिव के दर्शन व जलाभिषेक के लिए दुर-दुर से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, पर शासन, प्रशासन इन दर्शनार्थिय कांवरियों के सुविधाओं का ध्यान नही रख रही है।

दर्शन स्थल पर रात बिताने , स्वास्थ्य सुविधाओं कोई इंतजाम नही किया गया है। रात्रि में बरसते पानी के बीच कांवरियों को खुल्ले आसमान के नीचे गुजारा करना पढ रहा है। कर्णेश्वर धाम पहुंच रहे कांवरियों में बडी सख्या महिलाओं की है इनकी सुरक्षा केलिए रात्रि में पुलिस की भी व्यवस्था नही की गई है।

सारा व्यवस्था भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। यह उल्लेखनीय है कि कर्णेश्वरधाम स्थित शिव,राम-जानती मंदिर का विशेष पुरातात्विक महत्व है।

इस मंदिर में लगे सोलह पंक्तियों की भीत्ति शिलालेख से यह ज्ञात होता है इस मंदिर को शक सम्वत 1114 में कांकेर के सोमवंशी राजा कर्णराज ने अपने वंश की कीर्ति को अमर बनाने कर्णेश्वर देवहद में छह मंदिरों का निर्माण कराया था आज इन मंदिरों की कीर्ति इतनी है की देश- विदेश से श्रद्धालुओं दर्शन हेतु यहॉ आते है। पर कीर्ति के अनुरुप इन मंदिरों का रखरखाव पर सरकार ध्यान नही दे रही हैं ।

अष्ठ कोडीय प्रस्तर स्तंभों पर टिकी हुई मंदिर की छत अब जर्जर हो चुकी है । कभी गंभीर दुर्घटना धट सकती है। उड़ीसा के जगन्नाथपुरी से दर्शन हेतु आये कांवरिया रमेश गुंडीचा ने चर्चा में बताया की इस मंदिर की ख्याति पुरे उड़ीसा में हैं क्योंकि सोमवंसी राजा जिन्होंने यह मंदिर बनवाया उनके पूर्वज जगन्नाथपुरी उडीसा के मूल निवासी थे ।

पर यहां कांवरियों के रात्रि रुकने की उचित व्यवस्था नही की जा रही है। शासन को इसका ध्यान रखना चाहिए । अंजलि पटनायक महिला कांवरिया- रात्रि में महिला पुलिस की व्यवस्था, महिला प्रसाधन की व्यवस्था होनी चाहिए , मंदिर परिसर के चारो ओर अंधेरा पसरा था। विकलगुप्ता उपाध्यक्षफ कर्णेश्वर धाम मंदिर ट्रस्ट – मंदिर की अवस्था की सूचना समिति द्वारा पुरातत्व विभाग को दे दी गई है। कुछ मरम्मत कार्य का प्रस्ताव हो चुका है ।

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