परीक्षाओं का दौर होने वाला है शुरू, अब तक गणवेश से वंचित है बच्चे

लेकिन उन्हें भी बांटा नहीं गया है। सत्र पूरा खत्म होने के बाद भी 100 फीसदी गणवेश बन पाएगी, इसमें संदेह ही है।

शिक्षण सत्र 2018-19 की परीक्षाओं का दौर शुरू होने वाला है और थोड़े समय बाद यह सत्र ही खत्म हो जाएगा। इसके बावजूद इस सत्र की स्कूल गणवेश बच्चों को अभी तक नहीं मिल पाई है।

गणवेश नहीं मिलने से अभी तक बच्चों को या तो पुराने रंग-बिरंगे कपड़ों में स्कूल आना पड़ रहा है या फिर पहले की फट चुकी गणवेश से ही काम चलाना पड़ रहा है।

गणवेश तैयार होने की रफ्तार के हाल यह है कि अभी तक महज 41 प्रतिशत गणवेश ही बन सकी है लेकिन उन्हें भी बांटा नहीं गया है। सत्र पूरा खत्म होने के बाद भी 100 फीसदी गणवेश बन पाएगी, इसमें संदेह ही है।

इधर विभाग द्वारा 15 जनवरी से गणवेश वितरण शुरू करने का दावा किया जा रहा है। बच्चों को पढ़ाई-लिखाई के प्रति आकर्षित करने मध्यान्ह भोजन, साइकिल वितरण, पुस्तक वितरण के साथ ही निशुल्क गणवेश योजना भी शासन द्वारा चलाई जा रही है।

हर बच्चे को 2-2 गणवेश उपलब्ध कराई जाती है। पहले शासन द्वारा गणवेश की 400 रुपए की राशि सीधे स्कूली बच्चों के खातों में डाल दी जाती थी।

इस राशि से पालक जल्द ही गणवेश तैयार करा लेते थे। अधिकांश बच्चों के पास 15 अगस्त तक नई गणवेश आ जाती थी।

स्वतंत्रता दिवस समारोह पर इक्का-दुक्का को छोड़ दिया जाए तो सभी बच्चे नई गणवेश में ही जाते थे। इस साल स्थिति यह है कि स्कूल शुरू होने को 8 माह बीत रहे हैं, इसके बावजूद एक बच्चे को भी अभी गणवेश उपलब्ध नहीं हो पाई है।

इसकी वजह शासन का वह निर्णय है जिसमें इस साल खातों में राशि डालने की बजाय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत सक्रिय महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से गणवेश तैयार करवा कर देना है।

जून में दिया था ऑर्डर

शासन के आदेश होने के बाद जिला शिक्षा केंद्र द्वारा जून माह में एनआरएलएम को ऑर्डर कर दिया था। जिले में कक्षा 1 से 8 तक अध्ययनरत 1 लाख, 74 हजार छात्र-छात्राओं के लिए 2-2 गणवेश बनाने का ऑर्डर दिया है।

इनमें 5 से 17 साल तक के बच्चों की आयु के हिसाब से गणवेश तैयार की जाना है। केवल ऑर्डर ही नहीं दिया गया बल्कि राज्य शिक्षा केंद्र से गणवेश के लिए दी जाने वाली कुल राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा भी एडवांस दिया जा चुका है।

कुल 10 करोड़, 44 लाख रुपए का भुगतान किया जाना है। इसमें से 6 करोड़, 26 लाख, 40 हजार रुपए की राशि का भुगतान अग्रिम के तौर पर किया जा चुका है।

इतनी राशि देने के बावजूद अभी तक समूहों की ओर से एक गणवेश भी मुहैया नहीं कराई गई है। गणवेश मुहैया कराने के लिए 30 सितम्बर से 15 अक्टूबर की समयावधि दी थी लेकिन अब तक गणवेश का अता-पता नहीं है।

केवल 41 प्रतिशत हुई तैयार

जिले में 3 लाख, 48 हजार गणवेश में से अभी तक केवल 41 प्रतिशत गणवेश ही तैयार हो सकी है। एनआरएलएम द्वारा 470 समूहों से यह काम कराया जा रहा है।

यह समूह इलेक्ट्रिक मशीनों से काम करने वाले व्यवसायिक समूह नहीं है बल्कि हाथ और पांव के सहारे चलने वाली मशीनों से काम कर रहे हैं।

इसलिए उनके काम में बहुत अधिक गति नहीं आ पा रही है। एक बहाना यह भी बताया जा रहा है कि बीच में विस चुनाव की आचार संहिता लगने से काम प्रभावित हुआ, लेकिन गणवेश तैयार करने का ऑर्डर पहले ही दिया जा चुका था।

ऐसे में गणवेश तैयार करने पर कोई रोक नहीं थी। समूहों द्वारा इस बीच अपना काम करते हुए गणवेश तैयार की जा सकती थी।

यह बात अलग है कि उनकी रफ्तार ही धीमी है और इसलिए अभी तक भी गणवेश नहीं बन सकी है। इस रफ्तार से सत्र खत्म होते तक भी पूरी गणवेश तैयार होने के आसार नहीं है।

बडोरा समूह का कपड़ा रिजेक्ट

कुछ समूह बच्चों की गणवेश के नाम पर भी धांधली बरतने से बाज नहीं आ रहे हैं। बडोरा के एक समूह द्वारा जो कपड़ा इस्तेमाल किया जा रहा था वह तय मापदंडों के अनुसार नहीं था।

डीपीसी ने निरीक्षण कर जब कपड़े का मुआयना किया तो वह घटिया क्वालिटी का निकला। इस पर उस कपड़े का पूरा लाट निरस्त कर दूसरा कपड़ा बुलाया गया।

इसका परीक्षण करने के बाद ओके रिपोर्ट मिलने पर नए सिरे से गणवेश तैयार कराई जा रही है। समूह को धांधली बरतने से 4 से 5 लाख का नुकसान उठाना पड़ा। गणवेश बनने में देरी अलग हो रही है।

पुराने कपड़ों में ही आ रहे बच्चे स्कूल

नई गणवेश नहीं मिलने के कारण ही बच्चे पुरानी गणवेश या अन्य रंग-बिरंगे कपड़ों से ही काम चलाने को मजबूर हैं।

गरीब परिवार के बच्चे तो फटे हुए कपड़ों में स्कूल आ रहे हैं। चूंकि स्कूल से ही गणवेश मिलती है, इसलिए जो परिवार सक्षम हैं वे भी अपने बच्चों की गणवेश तैयार नहीं करा रहे हैं।

पालक परसराम साहू कहते हैं कि शासन को ऐसा ही करना था तो गर्मी की छुट्टी में ही ऑर्डर दे देना था। इससे ऐसी स्थिति तो नहीं बनती।

यह पूरा साल बच्चों का बिना गणवेश का बीतता चला जा रहा है। बच्चों को जल्द गणवेश दिलाई जाना चाहिए।

वितरण में देरी नहीं करेंगे

अभी 41 प्रतिशत गणवेश तैयार हो गई है। एक-एक गणवेश तो अभी दी जा सकती है, लेकिन इससे शिकवा-शिकायत होने लगेंगी।

इसलिए पूरी गणवेश तैयार कर 15 जनवरी से एक साथ सभी को 2-2 गणवेश दी जाएगी। इस बार गणवेश वितरण में देरी नहीं की जाएगी- अशोक पराड़कर, डीपीसी, जिला शिक्षा केंद्र, बैतूल

 

1
Back to top button