ज्योतिष

कल फिर लगने वाला है चंद्र ग्रहण, जानिए इस बार क्‍या है खास?

एक महीने के अंदर ही लगने वाला ये तीसरा ग्रहण है।

नई दिल्ली: कल यानी 5 जुलाई को चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। यह इस साल का तीसरा चंद्रग्रहण है। कल लगने वाला यह चंद्रग्रहण गुरु पूर्णिमा के दिन लगने जा रहा है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में देश भर में मनाया जाता है। पूर्णिमा की तिथि को इस बार चंद्रग्रहण भी लग रहा है। यह लगातार तीसरा साल है जब गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण लग रहा है।

एक महीने के अंदर ही लगने वाला ये तीसरा ग्रहण है। कुल मिलाकर इस साल 6 ग्रहण लग रहे हैं जिनमें चार चंद्र ग्रहण और दो सूर्य ग्रहण हैं। अभी तक दो चंद्र ग्रहण लग चुके हैं और ये दोनों ही उपछाया चंद्रग्रहण थे। इसके अलावा एक सूर्य ग्रहण भी लग चुका है। 5 जुलाई को लगने वाला चंद्र ग्रहण भी उपछाया चंद्रग्रहण होगा।

माना जा रहा है कि 5 जुलाई दिन रविवार को लगने वाला यह चंद्रग्रहण उपछाया चंद्रग्रहण है, जिसमें मात्र चंद्रमा पर पृथ्‍वी की छाया पड़ती है। इसलिए इसको ग्रहण नहीं माना जा रहा है और इस वजह से इसका प्रभाव और सूतक काल भी मान्‍य नहीं होगा। 5 जुलाई को चंद्र ग्रहण होगा, लेकिन यह देश में दिखाई नहीं देगा।

चंद्रग्रहण सुबह 8 बजकर 38 मिनट से आरंभ होगा

पांच जुलाई के दिन गुरु पूर्णिमा पर सुबह जब भारत में चंद्रमा आकाश से विदा हो चुका होगा तब दक्षिण-उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी अफ्रीका में होने जा रही शाम के दौरान चंद्रमा के अस्त होते हुए उपछाया चंद्रग्रहण दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं दिखेगा।

यह चंद्रग्रहण सुबह 8 बजकर 38 मिनट से आरंभ होगा। 09 बजकर 59 मिनट में यह परमग्रास में होगा और 11 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगा। इस प्रकार चंद्रग्रहण की अवधि 2 घंटा 43 मिनट और 24 सेकेंड की होगी। इस उपच्छाया चंद्रग्रहण को अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के हिस्सों में देखा जा सकेगा। महत्वपूर्ण बात ये है कि भारत में यह दिखाई नहीं देगा। इसलिए यहां पर ग्रहण का सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

इस उपछाया चंद्रग्रहण के दिन एक अद्भुत संयोग भी बन रहा है। इसी दिन गुरू पूर्णिंमा भी है। ये ग्रहण धनु राशि में लग रहा है और जिस समय ये ग्रहण लग रहा है उस समय कर्क लग्न उदित होगा। विज्ञान जहां चंद्रग्रहण को महज एक खगोलीय घटना मानता है। वहीं ज्योतिष में इसे अशुभ घटना के रूप में देखा जाता है। इसलिए ग्रहण के दौरान कई शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है।

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