मध्यप्रदेशराज्य

एक गांव ऐसा भी, जहां आजादी के बाद से हर दिन ‘ड्राय डे’

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शराबबंदी के फैसले के बाद से पूरे देश में इस मुद्दे को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है.

देश के कई राज्यों में पूर्ण शराबबंदी की मांग धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी है, तो राजनीतिक दल भी इस मुद्दे को भुनाने में पीछे नहीं है.

शराबबंदी के पक्ष में मुखर हो रही है आवाजों के बीच गांधी जयंती के खास दिन आपको एक ऐसे गांव लेकर चल रहा है, जहां आजादी के बाद से शराब की एक भी दुकान नहीं खुली है.

शराबबंदी को लेकर मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले का लोनी गांव सबके लिए मिसाल बना हुआ है.

बुरहानपुर जिला मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र सीमा पर बसे लोनी गांव में आजादी के बाद से अब तक शराब दुकान खोले जाने की अनुमति नहीं दी गई.

नई ग्राम पंचायत ने दो साल इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गांव में एक भी शराब दुकान नहीं खोलने के प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया था, जिस पर अमल जारी है.

पंचायत राज का ‘आदर्श मॉडल’

पंचायत राज व्यवस्था लागू होते ही गांव के जागरूक नागरिकों ने यह तय किया कि गांव में एक भी शराब दुकान नहीं खोलने दी जाएगी.

ग्रामीणों ने यह कड़ा फैसला शराब से होने वाले नुकसानों को ध्यान में रखकर किया और सालों पहले शुरू हुई यह परंपरा अब भी जारी है.

एक व्यक्ति का ‘गलत आचरण’, पूरा परिवार बर्बाद

सात हजार के आबादी वाले लोनी गांव में ज्यादातर ग्रामीण खेतीहर मजदूर हैं. ग्रामीणों का मानना है कि शराब के सेवन से परिवार बर्बाद और दुखी होता है.

परिवार का एक व्यक्ति शराब पीता है, लेकिन प्रभावित पूरा परिवार होता है.

अवैध शराब के खिलाफ संयुक्त मुहिम

ऐसे में गांव में अगर अवैध शराब की बिक्री होती है, तो सभी ग्रामीण एकजुट होकर इसके खिलाफ मुहिम छेड़ कर उस पर रोक लगाते हैं.

गांववालों का मानना है कि गांव में नशामुक्ति अभियान के चलते शराब की दुकान नहीं होने से सबसे ज्यादा फायदा महिलाओं और युवाओं को होता है.

इससे परिवार में होने वाले विवाद और युवाओं को राह से भटकने से रोकने में काफी मदद मिली है.

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