मराठा आरक्षण मामले में महाराष्ट्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत

नई दिल्ली: मराठा आरक्षण पर रोक लगाने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि रोक का अंतरिम आदेश जारी नहीं करेंगे. सुप्रीम कोर्ट 17 मार्च से मराठा आरक्षण पर अंतिम सुनवाई करेगा.

दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मराठा समुदाय के लिये 16 प्रतिशत आरक्षण न्यायोचित नहीं है. मराठा आरक्षण को रोजगार के मामले में 12 फीसदी तथा शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के मामले में 13 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने 27 जुलाई के आदेश में कहा था कि विशेष परिस्थितियों में शीर्ष अदालत की 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा लांघी जा सकती है.

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की इस दलील को भी स्वीकार कर लिया था कि मराठा समुदाय शैक्षणिक और सामाजिक दृष्टि से पिछड़ा है और उसकी तरक्की के लिये आवश्यक कदम उठाना सरकार का कर्तव्य है.

गौरतलब है कि आरक्षण के लिए मराठा समाज ने महाराष्ट्र में लंबा संघर्ष किया था और कई मूक मोर्चे भी निकाले थे. जिसके बाद तत्कालीन देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने मराठा समाज को शिक्षा और नौकरियों में 16 प्रतिशत के आरक्षण की मंजूर भी दे दी थी.

लेकिन सरकार के फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाइकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी. कोर्ट ने सरकार के फैसलों को बरकरार रखा, जिसके खिलाफ एक एनजीओ ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की. याचिका के अनुसार संविधान पीठ द्वारा तय आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा का उल्लंघन किया गया है.

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