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चार सालों में राजमार्ग निर्माण और खर्च के मामले में महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर

राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर सबसे ज्यादा निर्माण कार्य हुआ

नई दिल्ली: 2014-15 और 2017-18 के दौरान महाराष्ट्र में राजमार्ग निर्माण और खर्च के मामले में दूसरे नंबर पर रहा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा संकलित किया गया डाटा दिखाता है कि एनएच का निर्माण महाराष्ट्र में 10 गुना से ज्यादा बढ़ा है।

सरकार के आंकड़े दिखाते हैं कि राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर सबसे ज्यादा निर्माण कार्य हुआ वहीं केंद्र ने उत्तर प्रदेश में राजमार्ग बनाने के लिए सबसे ज्यादा राशि खर्च की।

कर्नाटक और तमिलनाडु में 6 गुना बढ़त

2014-15 में यह 124 किलोमीटर था जबकि 2017-18 के दौरान यह बढ़कर 1,346 किलोमीटर हो गया। कर्नाटक और तमिलनाडु में 6 गुना बढ़त हुई है। इसी समयावधि के दौरान उत्तर प्रदेश में राजमार्ग का खर्च 2,240 करोड़ से बढ़कर 14,800 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

खर्च के मामले में महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर आता है। राज्य अगले कुछ सालों में राजमार्ग निर्माण पर भारी खर्च करने को तैयार है। लोकसभा में दिए लिखित जवाब में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री मनसुख एल मांडविया ने कहा कि केंद्र ने महाराष्ट्र को राजमार्ग निर्माण के लिए आवंटित राशि 1.37 लाख करोड़ रुपये में से 44,484 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं।

मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि उपलब्ध जमीन पर निर्माण कार्य ज्यादा होना था और परियोजना अबतक बनकर तैयार हो जाती, यदि सरकार को ठेकेदारों से जुड़े विवादों को सुलझाने और परियोजनाओं को शुरू करने में महीनों का समय न लगता।

विवरणों के अनुसार एनडीए सरकार के दौरान एनएच निर्माण और उनके चौड़ीकरण का कार्य मार्च 2018 तक 28,500 किलोमीटर तक हो चुका है। यह यूपीए सरकार के 2009-10 और 2012-13 की तुलना में 40 प्रतिशत ज्यादा है।

राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक यह अंतर काफी बढ़ जाएगा। राजमार्ग के निर्माण की तेजी पिछले तीन सालों में काफी बढ़ गई है। एनएच निर्माण की तेजी सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। केरला को छोड़कर वर्तमान सरकार के दौरान बड़े राज्यों में एनएच पर 600 किलोमीटर से ज्यादा निर्माण कार्य हुआ है।

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