महेंद्रसिंह धोनी का स्वभाव है मैदान शांत, असल जिंदगी में है चंचल : लक्ष्मण

लक्ष्मण ने अपनी आत्मकथा में लिखा है- 'मुझे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था।

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्रसिंह धोनी भले ही मैदान पर अपने शांत स्वभाव के लिए जाने जाते हैं लेकिन असल जिंदगी में वो काफी चंचल स्वभाव के हैं। वे जूनियर खिलाड़ियों के साथ भी हंसी-मजाक करते रहते हैं। एक बार तो वे टीम इंडिया की बस के ड्राइवर बन गए थे और टीम को स्टेडियम से होटल तक ले गए थे।

पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने अपनी आत्मकथा ‘281 एंड बियांड’ में धोनी से जुड़े साल 2008 के इस खास मामले का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि उनके 100वें टेस्ट मैच में धोनी ने नागपुर में स्टेडियम से होटल तक टीम की बस चलाई थी। यह वो मैच था जब अनिल कुंबले ने संन्यास की घोषणा की थी और धोनी तीनों फॉर्मेट में टीम के कप्तान बन गए थे।

लक्ष्मण ने अपनी आत्मकथा में लिखा है- ‘मुझे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था। टीम का कप्तान बस चलाकर हमें ग्राउंड से वापस ले जा रहा था। ऐसा लग रहा था कि वह दुनिया से बेपरवाह थे। वह ऐसे ही थे, चुलबुले और जमीन से जुड़े हुए।’ लक्ष्मण ने कहा कि धोनी ने कभी आनंद और चंचलता को नहीं खोया। वे कभी भी धोनी जैसे किसी इंसान से नहीं मिले।

क्रिकेटर से कमेंटेटर बने लक्ष्मण के मुताबिक, धोनी ने कभी आनंद और चंचलता को नहीं खोया। उन्होंने बताया, ‘मैं कभी भी धोनी जैसे किसी इंसान से नहीं मिला। जब वह टीम में आए तब उनका कमरा हर किसी के लिए खुला रहता। मेरे आखिरी टेस्ट मैच तक वह भारत के सफलतम कप्तान बन चुके थे, तब भी वह सोने से पहले दरवाजा बंद नहीं करते थे।’

लक्ष्मण ने अपने रिटायरमेंट के समय से जुड़ी बातों को भी अपनी किताब में लिखा है। उन्होंने लिखा है- ‘जब मैंने मीडिया को अपने रिटायर होने के फैसले की जानकारी दी तो सबसे पहला सवाल था- क्या आपने इस बारे में अपने साथी खिलाड़ियों को बताया है? मैंने जवाब दिया- हां।

फिर पूछा गया- क्या आपने धौनी से बात की, उन्होंने क्या कहा? मैंने मजाक में कहा- सब जानते हैं कि धौनी तक पहुंचना कितना मुश्किल है।’ लक्ष्मण ने बताया कि इसके बाद मीडिया में खबरें आने लगीं कि उन्होंने धौनी के साथ मतभेदों की वजह से रिटायर होने का फैसला लिया है।

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