इमरजेंसी लैंडिंग, GPS और तबला, शंख, हारमोनियम वाले हॉर्न सहित भारतीय सड़क परिवहन में हो रहे हैं बड़े बदलाव

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने एक बार कहा था कि “अमेरिकी सड़कें इसलिये अच्छी नहीं हैं क्योंकि अमेरिका समृद्ध है, बल्कि अमेरिका समृद्ध है क्योंकि अमेरिकी सड़कें अच्छी हैं।” केंद्रीय सड़क-परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के ऑफिस में भी इसे लिखा हुआ देखा जा सकता है, यानि सड़कें देश की समृद्धि का रास्ता हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क वाला देश है। इसलिए 2014 के बाद से सड़कों को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

भारत में रोड इंफ्रास्ट्रक्टर यानि सड़क अवसंरचना के लिये देश में काफी योजनाएं चलाई जा रही हैं क्योंकि देश में पर्यटन विकास, विदेशी निवेश के प्रवाह या फिर क्षेत्रीय विकास पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में ही केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में सड़क परिवहन के क्षेत्र में कई बदलाव के संकेत दिए। क्या हैं बदलाव और किन पर शुरू हो गया है काम, आइए जानते हैं…

जीपीएस सिस्टम से लैस होगा टोल

नेशनल हाइवे व एक्सप्रेस वे पर टोल नीति में जल्द किया जाएगा। आगामी दो साल में जीपीएस सिस्टम से टोल की व्यवस्था शुरू की जाएगी। इसमें एक सॉफ्टवेयर तैयार कर सैटेलाइट व जीपीएस से कनेक्ट किया जाएगा। इसके बाद जो भी वाहन हाइवे पर जितने भी किलोमीटर चलेगा, उसे उतना ही टोल देना होगा।

तबला, शंख, हारमोनियम वाले होंगे हॉर्न

देश में बहुत जल्द गाड़ियों में हॉर्न और सायरन की आवाज हिंदुस्तानी वाद्यों की आवाज जैसे-तबला, हारमोनियम, बांसुरी और बिगुल जैसी आवाज सुनाई देगी। दरअसल केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नए हॉर्न पैटर्न पर काम शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि इससे दो फायदे होंगे, पहला ध्वनि प्रदूषण कम करेगा और दूसरा वन्य जीवन के संरक्षण में भी काम आएगा। अक्सर सामान्य सायरन की आवाज वन्य जीव के साथ ही आम लोगों के लिए भी परेशान करने वाले होते हैं।

नेशनल हाइवे पर इमरजेंसी लैंडिंग की सुविधा

देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अन्य 19 स्थानों पर आपातकालीन लैंडिंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें राजस्थान में फलोदी-जैसलमेर सड़क व बाड़मेर-जैसलमेर सड़क, पश्चिम बंगाल में खड़गपुर – बालासोर सड़क, खड़गपुर-क्योंझर सड़क व पानागढ़/केकेडी के पास, तमिलनाडु में चेन्नई- पुडुचेरी सड़क पर, आंध्र प्रदेश में नेल्लोर- ओंगोल सड़क व ओंगोल – चिलकालूरिपेट सड़क पर, हरियाणा में मंडी डबवाली से ओधन सड़क पर, पंजाब में संगरूर के नजदीक, गुजरात में भुज-नलिया सड़क और सूरत-बड़ौदा सड़क पर, जम्मू और कश्मीर के बनिहाल-श्रीनगर सड़क, लेह/न्योमा क्षेत्र में, असम में जोरहाट-बाराघाट सड़क पर, शिवसागर के नजदीक, बागडोगरा-हाशिमारा सड़क पर और असम में हाशिमारा-तेजपुर मार्ग व हाशिमारा-गुवाहाटी सड़क हैं।

दुनिया का सबसे बड़ा एक्सप्रेस वे

भारत में दुनिया के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे का काम शुरू हो चुका है। इसकी लंबाई करीब 1,380 किलोमीटर है। दिल्ली-मुंबई के बीच 150 किलोमीटर की दूरी घटेगी। वर्तमान में दिल्ली से मुंबई पहुंचने में सड़क से करीब 25 घंटे लगते हैं। इसे लेकर एक्सप्रेस वे का निर्माण तेज गति से चल रहा है। इस परियोजना को मार्च 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। एक्सप्रेसवे देश के 5 राज्यों दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगा।

इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए अलग लेन

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की दिशा में जनता की बहुत अच्छी प्रतिक्रिया है। भारत इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और कारों के लिए सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बाजार बन रहा है। इसी के मद्देनजर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि उनका मंत्रालय दिल्ली से जयपुर तक इलेक्ट्रिक हाइवे के निर्माण के लिए एक विदेशी कंपनी से बातचीत कर रहा है।

22 ग्रीन एक्सप्रेस-वे

सिर्फ सड़का का निर्माण ही काफी नहीं है, बल्कि अब उनके रख-रखाव पर भी ध्यान दिया जा रहा है। पिछले कुछ सालों से सड़को के आस पास वृक्षारोपण, उनके प्रत्यारोपण, सौंदर्यीकरण और रख-रखाव पर भी जोर दिया जा रहा है। इसे तहत केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारतमाला परियोजना के तहत 5 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे और 17 एक्सप्रेस कंट्रोल्ड ग्रीन्डफील्ड नेशनल हाईवे बना रहा है। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के तहत वृक्षारोपण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बताते हैं कि हमने कुल परियोजना लागत का 1 प्रतिशत वृक्षारोपण निधि के रूप में रखने का निर्णय लिया है।

उन्होंने बताया कि ग्रीन एक्सप्रेस-वे के तहत आबादी वाले इलाकों से बचने की कोशिश की गई है। साथ ही ये भी कोशिश है कि पिछड़े इलाकों के लोगों के लिए एक्सप्रेसवे नए आर्थिक अवसर पैदा करने वाला हो। इन 22 एक्सप्रेसवे को 2025 तक पूरा करने की बात कही गयी है। इनमें से तीन एक्सप्रेसवे/ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को पूरा करने की डेडलाइन साल 2022 रखी गयी है। इनमें दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, ट्रांस-राजस्थान, यानी राजस्थान के अंदर, ट्रांस-हरियाणा, यानी हरियाणा के अंदर सबसे पहले काम होगा।

स्क्रैप पॉलिसी

इस पॉलिसी के तहत अब हर गाड़ी के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जरूरी होगा और अगर वाहन ज्यादा पुराने होंगे तो उन्हें स्क्रैप किया जाएगा। सरकार ने प्रदूषण कंट्रोल के लिए यह कदम उठाया है। पॉलिसी को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को कम करने से ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन आएगा। इससे वाहनों की ईंधन खपत कम होगी, उद्योगों के लिए कम कीमत में कच्‍चे माल की उपलब्धता बढ़ेगी और केन्द्र तथा राज्य सरकारों के जीएसटी में वृद्धि होगी। व्‍हीकल स्क्रैपिंग नीति के लागू होने से देश में तीन करोड़ 70 लाख से अधिक रोजगार सृजित होंगे।

दरअसल स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट दिखाने पर नई गाड़ी खरीदते वक्त 5 फीसदी छूट मिलेगी, गाड़ी स्क्रैप करने पर कीमत का 4-6 फीसदी मालिक को दिया जाएगा। नई गाड़ी लेने पर रोड टैक्स में 3 साल के लिए 25 फीसदी तक छूट।नई गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के वक्त रजिस्ट्रेशन फीस माफ कर दी जाएगी।

दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क

भारत में लगभग 60 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है। भारतीय अर्थव्यवस्था में सड़क अवसंरचना एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि 70% माल और लगभग 90% यात्री आवाजाही के लिए यातायात सड़क नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं। सड़कें न केवल आपूर्ति श्रृंखला के दृष्टिकोण से बल्कि इसका इस्तेमाल करने वाले माल और यात्री यातायात के सबसे बड़े हिस्से के लिए भी इस नेटवर्क का रखरखाव और विस्तार महत्वपूर्ण है।

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