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एजेंसियां करें अब भारत की रेटिंग में सुधार: सुभाष चंद्र गर्ग

नई दिल्लीः चुनावों से पहले सुधारों की प्रक्रिया धीमी होने को लेकर चिंताओं को खारिज करते हुए आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि सुधारों की रफ्तार कायम है। उन्होंने कहा कि प्रणाली में सुधार रुकने के कोई संकेत नहीं हैं। गर्ग ने कहा, ‘‘मैं कहना चाहूंगा कि सुधारों की प्रक्रिया उचित रूप में जारी है। यदि मैं ऐसे क्षेत्रों की बात करूं जिनसे मेरा सीधा संपर्क है, मसलन पोर्टफोलियो निवेश, पूंजी बाजार, सभी क्षेत्रों में काफी सुधार हो रहे हैं।’’

भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले सप्ताह सरकार के साथ विचार विमर्श में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की सरकारी प्रतिभूतियों में हिस्सेदारी सीमा बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया है जो अभी तक 20 प्रतिशत थी। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने बाह्य वाणिज्यिक कर्ज (ईसीबी) नियमों को सरल करते हुए इसमें और क्षेत्रों को शामिल किया है। उन्होंने माल एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) तथा दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में जो भी संरचनात्मक और बुनियादी सुधार आगे बढ़ाए गए हैं वे वास्तव में वैश्विक हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या मौजूदा सरकार के अंतिम वर्ष में सुधारों की रफ्तार धीमी होगी, गर्ग ने इस तरह के कोई संकेत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि चुनावी साल होने के बावजूद सुधारों की कहानी कायम है।

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