मकर संक्रांति तिल, गुड़ के लड्डू खाने का वैज्ञानिक आधार भी :स्वामी राजेश्वरानंद

आलोक मिश्रा:

सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में 14 जनवरी को करेगा प्रवेश इसलिए इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को पड़ेगी

बलौदा बाजार: इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को नहीं 15 जनवरी को मनाई जाएगी इसका मुख्य कारण सूर्य धनु राशि छोड़कर मकर राशि में 14 जनवरी को देर रात में प्रवेश करेगा। इस वजह से मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी।

हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले हर त्योहार के साथ कोई न कोई परंपरा जरूर जुड़ी होती है। इनमें से कुछ परंपराओं का धार्मिक तो कुछ का वैज्ञानिक महत्व होता है। यह कहना है सुरेश्वर महादेव पीठ रायपुर के स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज का जिन्होंने बताया की मकर संक्रांति में गुड व तिल के लड्डू खिलाने और बांटने की परंपरा है।

कहीं तिल गुड़ के स्वादिष्ट लड्डू बनाए जाते हैं। तो कहीं तिल गुड़ की चक्की बनाई जाती है ठंड में तिल गुड़ के लड्डू खाने के पीछे वैज्ञानिक आधार भी है। इसके कई फायदे होते हैं, जिनकी वजह से इसे मकर संक्रांति में सेवन किया जाता है।

स्वामी राजेश्वरानंद के अनुसार 15 जनवरी को मकर संक्रांति है। एक माह तक सूर्य मकर में रहेंगे गुरु वृश्चिक राशि में ही है, शनि धनु में गोचर कर रहे हैं राहु कर्क तथा केतु मकर में सूर्य तथा शनि 1 माह मकर राशि में रहेंगे। इस प्रकार सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि में 1 माह तक रहेंगे।

खरमास खत्म शुभ कार्य शुरू

मकर संक्रांति से ही खरमास खत्म होकर शुभ कार्य शुरू होते हैं इस दिन अनेक जगहों पर पतंग उड़ाने दान धर्म गंगा स्नान आदि करने का महत्व होता है मकर संक्रांति त्योहार पर लोग एक दूसरे की को मंदिरों में गुड़ के लड्डू तिल गुड़ के लड्डू आदि चीजों का दान करते हैं।

तिल और गुड़ खाने का वैज्ञानिक कारण सर्दी के मौसम में शरीर को पहुंचाता है गर्मी

सर्दी के मौसम में जब शरीर को गर्मी की आवश्यकता होती है तब तिल गुड़ के लड्डू व व्यंजन यह काम बखूबी करते हैं तिल में तेल की प्रचुरता रहती है और गुड़ की तासीर भी गर्म होती है तिल व गुड़ को मिलाकर जो व्यंजन बनाए जाते हैं।

वह सर्दी के मौसम में हमारे शरीर में आवश्यक गर्मी पहुंचाते हैं। इस समय ठंड के कारण पाचन शक्ति भी बंद हो जाती है दिल में पर्याप्त मात्रा में फाइबर होता है जो पाचन शक्तियों को बढ़ाता है। दिल के कई प्रकार के प्रोटीन कैल्शियम बी कांप्लेक्स और कार्बोहाइड्रेट तत्व पाए जाते हैं जो इस मौसम में शरीर के लिए जरूरी भी होते हैं।

यह भी एक प्रमुख कारण होता है जो ठंड में तिल और गुड़ का सेवन करने से शरीर स्वस्थ और निरोग रहता है ऐसा मानना है सुरेश्वर महादेव पीठ कचना रोड रायपुर के स्वामी राजेश्वरानंद महाराज का।

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