मेक इन इंडिया के सात वर्ष पूरे, 440 अरब डॉलर का प्रत्य़क्ष विदेशी निवेश हुआ

निर्माण क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। देश को निर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र ने 25 सितंबर, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मेक इन इंडिया पहल की शुरुआत की थी।

इस पहल का उद्देश्य निवेश को सुविधाजनक बनाना, नवाचारों को बढ़ावा देना और निर्माण संबंधी सर्वोत्तम ढांचा स्थापित करना है। मेक इन इंडिया पहल से आर्थिक वृद्धि और विकास में देश का प्रदर्शन बेहतर हुआ है।

इससे कारोबार करने में आसानी हुई है और कौशल विकास को बढ़ावा मिला है। मेक इन इंडिया ने निवेश के लिए सुचारू माहौल सृजित किया है और नए क्षेत्रों में विदेशी निवेश सुनिश्चित किया है।

केंद्र ने निर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के विभिन्न उपाय किए हैं। सभी नियामक मंजूरी और सेवाओं के लिए सिंगल विंडो प्रणाली शुरू की गई है। इस पहल से अंतर्राष्ट्रीय और स्थानीय कारोबारियों के लिए भारत में व्यापार करने में आसानी और बढ़ेगी। देश को आत्मनिर्भर बनाने और निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन की पहल की गई है। सरकार ने 13 प्रमुख क्षेत्रों में विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं के लिए एक लाख 97 हजार करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं।

आकाशवाणी समाचार से विशेष बातचीत में वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन जैसी अनेक योजनाएं देश को निर्माण और निर्यात केंद्र बनाने में प्रभावी साबित हुई हैं।

मेक इन इंडिया संबंधी पहलों से पिछले सात वर्ष में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ा है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में अब तक का सर्वाधिक 81 अरब 72 करोड़ डॉलर का वार्षिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ। इन सात वर्षों में भारत में 440 अरब डॉलर का प्रत्य़क्ष विदेशी निवेश हुआ।

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