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मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान 15 जनवरी से

तेरह लाख से अधिक लोगों तक पहुंचेगा स्वास्थ्य अमला

जगदलपुर : बस्तर संभाग में मलेरिया के प्रभावी रोकथाम के लिए मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान बुधवार 15 जनवरी से शुरू हो रहा है। इस अभियान के लिए पूरे संभाग में 1320 दलों का गठन किया गया है। प्रत्येक टीम में 4 सदस्य हैं । इस तरह स्वास्थ्य विभाग के 5 हजार 280 कर्मचारी संभाग के 13 लाख से अधिक आबादी को कव्हर करेंगे। यह अभियान 14 फरवरी 2020 तक चलेगा।

इस अभियान के लिए संभाग के सभी जिलों में तैयारी पूरी कर ली गई है। बस्तर जिले में 354 दलों का गठन किया गया है, जो दो लाख 44 हजार लोगों के खून की जांच करेंगे। इसके अलावा 6 मोबाइल टीम का गठन भी किया गया है। मोबाइल टीम मलेरिया प्रभावित क्षेत्र के हाट बाजारों में छूटे हुए लोगों की मलेरिया की जांच करेंगे ।

आश्रम, छात्रावासों और बटालियन के कैंपों में भी स्वास्थ्य अमला जाकर मलेरिया की जांच करेंगे। अभियान के दौरान दल के सदस्यों द्वारा परिवार की प्रत्येक व्यक्ति के खून की जांच करेंगे। इसके अलावा मलेरिया और डेंगू से बचाव के लिए मलेरिया रोधी दवा का छिड़काव करेंगे। घर के आस-पास स्वच्छता बनाए रखने और रोज मच्छरदानी लगाकर सोने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।

इस पूरे अभियान में ग्रामीणों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी। घरों के आसपास गंदा पानी जमा होने पर वहां जला हुआ आईल अथवा मिट्टी का तेल छिड़कने की समझाईश दी जाएगी। इसके साथ ही कूलर, पुराने टायर, मिट्टी के टूटे-फूटे बर्तनों में पानी इकट्ठा नहीं होने देने के लिए भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि बस्तर संभाग में मलेरिया से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। इसीलिए इस अभियान की शुरुआत बस्तर संभाग से की जा रही है। राज्य में मलेरिया के कुल प्रकरणों में 73.34 प्रतिशत प्रकरण बस्तर संभाग में पाया गया है। वर्ष 2018 के अनुसार मलेरिया का राष्ट्रीय वार्षिक सूचकांक एपीआई 0.30 है, वहीं छत्तीसगढ़ में यह 2.63 है।

समान्यतः एनीमिया मलेरिया से बार बार पीड़ित होने के कारण होता है। यदि गर्भवती महिला को मलेरिया हो जाता है, तो कम वजन के बच्चे का जन्म होने की संभावना होती है, यही बाद में कुपोषण में परिवर्तित हो जाता है। इसलिए मलेरिया के समूल उन्मूलन से कुपोषण और एनीमिया दोनों के रोकथाम में मदद मिल सकेगी।

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