दो टूक (श्याम वेताल) : ममता बोली – बीजेपी आयी तो देश जाएगा

Vetal-Sir

श्याम वेताल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज कोलकाता में जिस महा रैली का आयोजन किया वह जबरदस्त रूप से सफल रही. इसकी सफलता से केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा अंदर तक हिल गयी होगी. भाजपा की बौखलाहट का ही परिणाम है कि पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी को ममता की रैली के दौरान ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी और यह कहना पड़ा कि विपक्षी दलों का यह मंच सिर्फ स्वार्थ का मंच है.

ममता बनर्जी की महारैली स्वार्थ का मंच है या नहीं यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन इस मंच पर देश की 24 पार्टियों के नेताओं की मौजूदगी यह संकेत जरूर दे रही है कि आने वाला वक्त भाजपा के लिए ‘अच्छे दिन’ लेकर नहीं आ रहा है.

ममता बनर्जी के ही शब्दों में कहें तो महारैली का एक ही संदेश रहा कि ‘बीजेपी आयी तो देश जाएगा’. ममता बनर्जी ने अपने भाषण में बीजेपी पर खुलकर प्रहार करते हुए कहा कि जनता का दिमाग बदल गया है और बीजेपी के ‘अच्छे दिन’ नहीं आने वाले हैं. पहाड़, नदियां, मौसम बदल जाते हैं तो बीजेपी सरकार क्यों नहीं बदली जा सकती है. ममता कहती है कि मोदी की एक्सपायरी डेट करीब है. मोदी सोचते हैं सिर्फ वही ईमानदार हैं. इसलिए क्षेत्रीय नेताओं को किसी न किसी मामले में फंसाने की कोशिश करते हैं. उन्होंने मायावती, अखिलेश, लालू यादव समेत मुझे भी नहीं छोड़ा. तब आपको कोई क्यों छोड़ेगा ?

इस सफल महारैली की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें भाजपा के मौजूदा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, अटल सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा और अटल सरकार के एक और मंत्री अरुण शौरी ने भी शिरकत की. शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने ओजस्वी भाषण में मोदी सरकार की खुलकर आलोचना की. उन्होंने कहा कि इस समय देश में लोकशाही नहीं बल्कि तानाशाही है. लोकशाही तो अटल जी की सरकार के समय थी. उन्होंने नोटबंदी, जीएसटी और राफेल मुद्दों को उठाया. राफेल का जिक्र करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि राफेल डील का खुलासा नहीं करते हैं इसलिए लोग कहते हैं चौकीदार चोर है.

ममता बनर्जी ने इस महारैली को यूनाइटेड इंडिया रैली नाम दिया और देशभर के सभी ऐसे राजनीतिक दलों का आमंत्रित किया जो मोदी एवं भाजपा के खिलाफ खड़े हैं. सभी दलों के नेता इसमें एक मंच पर दिखे. कांग्रेस से मल्लिकार्जुन खड़गे मौजूद थे. उन्होंने पार्टी की चेयरपर्सन सोनिया गांधी का संदेश पढ़ा. एनसीपी के शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल, नेशनल कांग्रेस से फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला, आरएलडी से अजीत सिंह और जयंत चौधरी, समाजवादी पार्टी से अखिलेश सिंह, आरजेडी से तेजस्वी यादव, डीएमके से स्टालिन, जेडीएस से देवगोडा और कुमार स्वामी, बसपा से सतीश मिश्रा, आम आदमी पार्टी से अरविंद केजरीवाल, गुजरात से हार्दिक पटेल और जिग्नेश पटेल, टीडीपी से चंद्रबाबू नायडू, नॉर्थ ईस्ट से अपांग, झारखंड से हेमंत सोरेन और शरद यादव ममता मंच के साक्षी एवं सहभागी बने.

ममता की इस रैली को देखकर वर्ष 1975 में जयप्रकाश नारायण की रैली याद आती है. उसमे भी कई नेताओं ने इंदिरा गांधी के खिलाफ अपनी मौजूदगी दर्ज करायी थी. आज की रैली भी वैसे ही विशाल थी और केंद्र की सत्ता के खिलाफ रही. भाजपा के लोग यह पूछ रहे हैं कि आखिर यह गठबंधन जीता तो प्रधानमंत्री कौन होगा ? इस पर ममता ने अपने भाषण में कहा कि हमारे पास हर व्यक्ति लीडर है, वर्कर है और ऑर्गेनाइजर है. अखिलेश यादव भी बोले कि जनता जिसे चुनेगी वही प्रधानमंत्री होगा. तेजस्वी यादव भी जोश में दिखे उन्होंने कहा है कि लड़ेंगे बा, करेंगे बा और जीतेंगे बा.

बहरहाल, ममता बनर्जी की यह महारैली और मंच पर बड़े-बड़े नेताओं की मौजूदगी भाजपा के लिए खतरे की घंटी है. इन नेताओं की एकता ऐसी ही बनी रहे और मतभेद नहीं हुए तो यह मानकर चलना चाहिए कि मोदी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गयी है.

अब ऐसा लगता है कि मोदी सरकार के खिलाफ जो आक्रोश दबा हुआ था उसे भड़काने मैं विपक्षी दल धीरे-धीरे कामयाब होते जा रहे हैं. यह आक्रोश भाजपा के खिलाफ कम नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ ज्यादा है. अतः यदि भाजपा केंद्र की सत्ता में वापसी चाहती है तो उसे यह चेहरे बदलने होंगे. हालांकि पार्टी ऐसा करने में फिलहाल सक्षम नहीं दिखती. लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अपनी अपनी भूमिका निभानी होगी. उसी में भाजपा की भलाई है.

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