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मणिपुर सीएम बीरेन सिंह पर पुलिस अधिकारी का आरोप, ‘ड्रग्स केस के आरोपी को छोड़ने का बनाया था दबाव’

इस छापेमारी में पकड़े गए आरोपी को छोड़ने के लिए बीरेन सिंह (N Biren Singh) और बीजेपी के नेता ने उनके ऊपर दबाव बनाया।

मणिपुर : मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और बीजेपी के एक टॉप नेता विवादों में फंस गए हैं। उनके ऊपर स्टेट नार्कोटिक्स ऐंड अफेयर ऑफ बॉर्डर ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि जून 2018 में डिपार्टमेंट ने एक छापेमारी के दौरान ड्रग्स बरामद की थीं। इस छापेमारी में पकड़े गए आरोपी को छोड़ने के लिए बीरेन सिंह (N Biren Singh) और बीजेपी के नेता ने उनके ऊपर दबाव बनाया।

खास बात यह है कि यह आरोप हवई नहीं हैं। बल्कि एनएबी (NAB) की अडिश्नल सुपरीटेंडेंट ने इंफाल हाई कोर्ट (Imphal High Court) में दिए गए शपथपत्र में कहा है। एएसपी एनएबी थाउनाओजम बृंदा (Thounaojam Brinda) के इस शपथपत्र के लीक होने के बाद राज्य में बीरेन सिंह पर विपक्ष हमलावर हो गया है।

बीजेपी नेता हुआ था गिरफ्तार

ड्रग्स रेड के इस मामले में विभाग ने 28 करोड़ से ज्यादा की ड्रग्स और कैश सीज किया था। इस मामले के मुख्य आरोपी लुखाउसी जू था। शपथपत्र में बताया गया है कि वह चंदेल जिले का एक स्थानीय बीजेपी नेता भी था। उसे छोड़ने के लिए सीएम ने अधिकारी पर दबाव बनाया।

सीएम ने कहा, कोर्ट को देंगे जवाब

इंडियन एक्सप्रेस ने जब मुख्यमंत्री बीरेन सिंह से इस मामले में बात की तो उन्होंने कहा कि मामला कानूनी है। हर कोई जानता है कि जब कोई कानूनी मामला होता है तो उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। वह कोर्ट में अपना जवाब देंगे और वहीं से न्याय होगा। सीएम ने कहा, ‘ड्रग्स के खिलाफ हमारी सरकार की लड़ाई जारी रहेगी। मैं या मेरी पार्टी कभी इसमें इनवॉल्व नहीं रही, चाहे मेरे दोस्त हों या मेरे रिश्तेदार’

28,36,68,000 रुपये की हुई थी बरामदगी

बृंदा ने अपने शपथपत्र में कहा है कि एनएबी ने उनके अंडर में इंफाल में कई छापेमारी कीं। गैर कानूनी ड्रग्स के धंधे को लेकर की गिरफ्तारियां की गईं। कैश और ड्रग्स भी बरामद किए। इसी कड़ी में 19-20 जून 2018 की रात को उनकी टीम छापेमारी करने गए। इस छापेमारी में हीरोइन समेत जो ड्रग्स बरामद की गई उनकी इंटरनैशनल मार्केट में कीमत 28,36,68,000 थी।

कांग्रेस से बीजेपी में आया था नेत

शपथपत्र में लिखा है कि इस छापेमारी में जो गिरफ्तारी की गई उससे राजनीति में हलचल मच गई। आरोपी चंदेल जिले के 5 वीं स्वायत्त जिला परिषद का चेयरमैन था। वह कांग्रेस की टिकट पर जून 2015 में चेयरमैन बना था। सितंबर 2015 में वह फिर से चेयरमैन बना और बाद में अप्रैल 2017 में उसने बीजेपी जॉइन कर ली। बृंदा का आरोप है कि इस गिरफ्तारी के बाद उनके और उनके विभाग पर इस केस को दबाने का बहुत दबाव डाला गया।

ऐसे हुई थी गिरफ्तारी

बृंदा ने बताया, ‘उस शाम को गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक ने हमें बताया कि जू के ड्राइवर के पास ड्रग्स है। जब हम उसकी तलाश में गए, तो जू ने कहा कि उसका ड्राइवर गुवाहाटी में है। उसने हमें उसके घर की तलाशी लेने से मना कर दिया। हमने उस शाम व्यापक खोज करके जू के ड्राइवर को पकड़ लिया। उसने जू के निवास पर ड्रग्स होने की सूचना दी। जब हम वापस गए, तो जू ने हमें तलाशी लेने से मना कर दिाय। NAB के स्टाफ और जू के साथियों के बीच हाथापाई हुई। हमने आखिरकार उसके घर की तलाशी ली और ड्रग्स बरामद किया।’

जज पर भी बृंदा ने लगाए थे आरोप

मार्च 2019 में जू को जमानत मिल गई। वह बॉर्डर पार करके म्यांमार भाग गया। इस साल फरवरी में उसने इंफान हाई कोर्ट में सरेंडर किया। बृंदा ने इंफान हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार और जज के खिलाफ भी पिछले महीने शिकायत दर्ज कराई थी। उसने जज के खिलाफ सोशल मीडिया पर भी लिखा था। इस मामले में उन्हें एक नोटिस मिला, जिसके बाद बृंदा ने अपना शपथपत्र कोर्ट में दिया।

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