मनीषा ने किताब के मुखपृष्ठ के साथ ट्वीट किया, लिखा खुद को फिर से पाना एक सबक 

साल 2012 में अभिनेत्री मनीषा कोईराला को हुआ था ओवेरियन कैंसर

मुंबई: इंडियन जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक ओवेरियन कैंसर भारत में महिलाओं में कैंसर का तीसरा प्रमुख प्रकार हैं। एक अध्ययन में पाया गया हैं कि बीतें पांच वर्षों के दौरान कैंसर का पता चलने के बाद केवल 45 प्रतिशत महिलाएं जीवित रहीं। इसका कारण मुख्य रूप से बीमारी का देर से पता चलना हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर महिलाओं को बीमारी का पता एडवांस स्टेज (थर्ड या फोर्थ स्टेज में) में चलता हैं।

ओवेरियन कैंसर को मात दे चुकीं अभिनेत्री मनीषा कोईराला ने अपने संघर्षो एवं निजी बातों को ‘हील्ड’ नामक पुस्तक में बयां किया हैं। कोईराला ने शनिवार को अपनी इस किताब से पर्दा हटाया। मनीषा ने किताब के मुखपृष्ठ के साथ ट्वीट किया, कैंसर से उबरना जीवन को फिर से जीना और खुद को फिर से पाने का एक सबक हैं।

मनीषा ने नीलम कुमार के साथ इस किताब को लिखा हैं। किताब का उपशीर्षक हैं ‘कैंसर ने कैसे मुझे नई जिंदगी दी।’ मनीषा को कैंसर से उबरे हुए छह साल हो गए हैं। इस दौरान मनीषा ने निराशा, अनिश्चितता और भय का सामना किया। अब इन्हीं मनोभावों को वह किताब में पिरोकर पेश कर रही हैं।

मनीषा ने हाल में संजय दत्त की जीवनी पर आधारित फिल्म ‘संजू’ में नरगिस का किरदार निभाया हैं। मनीषा ने इस किरदार को बेहद खूबसूरती से निभाया हैं। और इसके अलावा वह नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘लस्ट स्टोरीज’ में भी दिखाई दी थीं। मनीषा कोइराला बॉलीवुड की सबसे सफल अभिनेत्रियों में से एक हैं, जिन्हें 4 बार फिल्मफेयर अवार्ड मिल चुका हैं।</>

बता दें कि मनीषा कोइराला को साल 2012 में अपने कैंसर का पता चलता था। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इस किताब में अपनी इसी कहानी की दास्तां बयां की हैं। कैंसर की खबर पाते ही उन्होंने इसका इलाज अमेरिका में करवाया। लगातार संघर्ष और मजबूत इच्छाशक्ति से मनीषा ने 2015 में कैंसर से जिंदगी की जंग जीत ली। इस दौरान मनीषा ने अपना सिर भी मुड़वा लिया। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से निकलना मनीषा के लिए बेहद संघर्ष पूर्ण रहा।<>

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