डायलिसिस मशीन खराब होने से वेटिंग में कई मरीज, 2 नई मशीनें अभी नहीं आई

अंकित मिंज

बिलासपुर।

जिला अस्पताल में मौजूद गिनती की तीन डायलिसिस मशीनें जबाब दे रहीं हैं और अस्पताल के सिविल सर्जन को इसकी फिक्र नहीं हैं। शनिवार को एक बार फिर 2008 मॉडल की एक डायलिसिस मशीन खराब हो गई। मशीन खराब होने से मरीजों की वेटिंग और बढ़ गई। सिर्फ एक मशीन से ही डायलिसिस होती रही। गंभीर स्थिति होते हुए भी मरीज जिला अस्पताल से बगैर इलाज के लौट गए। वहीं सिविल सर्जन ये कहते हुए मामले पर पल्ला झाड़ते रहे कि मशीनें तो खराब होती रहतीं हैं, इसमें बड़ी बात क्या है। सुधारने वाले आएंगे तो मशीन सुधर जाएगी।

प्राइवेट में डायलिसिस कराने के लिए एक बार में ही 2 हजार रुपए लग जाते हैं, ऐसे में गरीब असहाय मरीजों को उम्मीद रहती है कि जिला अस्पताल में निःशुल्क डायलिसिस हो जाएगा। लेकिन जिला अस्पताल प्रबंधन गरीबों के हक पर ही अपना अधिकार समझ रहा है।

मशीनें हैं पर जानबूझकर उनकी देखरेख नहीं की जाती है। ऐसे में प्राइवेट डायलिसिस सेंटरों में मरीजों को मंहगा इलाज कराना पड़ता है। प्राइवेट में अपोलो, किम्स, आरबी, श्रीकृष्ण, महवीर, साईं बाबा जैसी निजी हॉस्पिटल में आधा सैकड़ा मशीनें हैं। जहां प्रतिदिन हजारों मरीज 1500 से 2000 रुपए खर्च कर डायलिसिस कराते हैं। जबकि सरकारी अस्पताल में केवल 400 या बीपीएल कार्ड होने पर आयुष्मान योजना से निःशुल्क डायलिसिस हो जाता है।
हर सप्ताह बिगड़ जाती है एक मशीन: जिला अस्पताल में तीन डायलिसिस मशीनें हैं, जिसमें से एक मशीन में सिर्फ

हैपेटाइटिस बीमारी के मरीजों का रक्त शुद्ध होता है। बाकी की दो मशीनों से रेगूलर डायलिसिस के मरीज खून साफ करवाते हैं। यहां की डायलिसिस मशीनें माह में तीन से चार बार खराब हो जाती हैं। हालात ये बनते हैं कि प्रतिदिन 4 से 5 मरीजों को वेटिंग में रहना पड़ता है। जो मरीज पैसे खर्च कर सकता है वह तो प्राइवेट में डायलिसिस करा लेता है, लेकिन आफत उन गरीब मरीजों पर आ जाती है जो गंभीर बीमारी से ग्रसित होते हैं और बार.बार प्राइवेट में डायलिसिस कराने की क्षमता नहीं रखते।

घोषणा हुई पर अभी तक नहीं आईं नई मशीनें

अभी अस्पताल में मौजूद 3 मशीनों से 20 मरीज रेगूलर डायलिसिस कराते हैं। मरीजों को वेटिंग के कारण आपातकालीन स्थिति में डायलिसिस मशीन खाली नहीं रहती थी। इसके लिए कलेक्टर द्वारा 28 लाख की लागत से 2 और डायलिसिस मशीनों को लगाने का निर्णय लिया गया थाद्य। करीब 2 माह बीत गए हैं पर मशीनें अभी तक नहीं आई हैं। कहा जा रहा है कि आचार संहिता के कारण कागजी कारवाई पूरी नहीं हो पाई और अब जिला अस्पताल के अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं।

हमने रायपुर में सूचना दे दी है: ये तो मशीनें हैं किसी के घर की भी मशीनें खराब हो सकतीं हैं। एक मशीन खराब हुई है, हमने रायपुर में सूचना दे दी है। रायपुर से मशीन सुधारने कर्मचारी आएंगे। दो नई मशीनें आनी थीं, लेकिन अभी कुछ कागजी कार्रवाई बाकी है।
एसएस भाटिया, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल बिलासपुर।

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