शहरों में सब्जी बेचने वालों को नहीं देना होगा बाजार शुल्क

भिलाई, राजनांदगांव और कोरबा भी बनेंगे स्मार्ट सिटी

रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वाणिज्य और उद्योग, नगरीय प्रशासन और वाणिज्यिक-कर मंत्री अमर अग्रवाल के विभागों से संबंधित आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 3908 करोड़ रूपए की बजट अनुदान मांगों को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। अमर अग्रवाल ने अनुदान मांगों पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए बताया कि राज्य के नगरीय क्षेत्रों में ठेला-पसरा लगाकर सब्जी बेचने वालों को अब बाजार शुल्क नहीं देना पड़ेगा। उन्होंने इन शहरी क्षेत्रों में इस तरह का व्यवसाय करने वाले हजारों छोटे कारोबारियों के हित में बाजार शुल्क माफी का ऐलान किया।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अब स्थानीय निकायों के साथ मिलकर भिलाई, कोरबा और राजनांदगांव नगर निगम क्षेत्र को भी स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। अपने स्वयं के संसाधनों से स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने का संपूर्ण देश में यह अनूठा उदाहरण होगा। लगभग 4 घण्टे की लम्बी चर्चा के बाद मंत्री अमर अग्रवाल से जुड़े विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2018-2019 के लिए 3 हजार 908 करोड़ 73 लाख रुपए की अनुदान मांगें विधानसभा ने ध्वनिमत से पारित कर दी। इनमें वाणिज्य कर विभाग से संबंधित व्यय के लिए मांग संख्या 7 के अंतर्गत 256 करोड़ 98 लाख 68 हजार रूपए, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग नगरीय निकाय के लिए 29 करोड़ 45 लाख 70 हजार रूपए, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग-नगरीय कल्याण के लिए 875 करोड़ 43 लाख 70 हजार रूपए, नगरीय निकायों को वित्तीय सहायता के लिए 2 हजार 399 करोड़ 80 लाख 30 हजार रूपए तथा वाणिज्य एवं उद्योग विभाग से संबंधित व्यय के लिए 347 करोड़ 5 लाख 24 हजार रूपए का अनुदान मांग शामिल हैं। अग्रवाल ने अपने बजटीय भाषण में नगरीय निकायों की बिजली खपत को कम करने के लिए राज्य के सभी 168 नगरीय निकायों मंे जून 2018 तक एलईडी लाईट लगाने की घोषणा भी की है। अनुदान मांगों पर चर्चा में विधायक टी.एस.सिंहदेव,रामदयाल उईके, श्रीचंद सुंदरानी, सत्यनारायण शर्मा, श्याम बिहारी जायसवाल, गुरूमुख सिंह होरा, केशव चंद्रा, डॉ. विमल चोपड़ा, मोतीलाल देवांगन, आर.के. राय, सांवलाराम डाहरे, मोहन मरकाम और रेणु जोगी और अनिला भेडि़या ने हिस्सा लिया।

दो साल पहले ओडीएफ हुए राज्य के सभी नगरीय निकाय

नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अमर अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश के नगरीय निकाय दो साल पहले से ओडीएफ बन गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुरूप देश के सभी निकायों को वर्ष 2019 तक ओडीएफ किया जाना था। लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की प्रेरणा और मार्गदर्शन से यह काम दो साल पहले अर्थात 2 अक्टूबर 2017 तक पूर्ण कर लिए गए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन्हे ओडीएफ घोषित नहीं की है बल्कि केन्द्र सरकार की एजेन्सी ने व्यापक सर्वेक्षण के उपरंात यह ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण स्वच्छता अभियान के अंतर्गत महत्वपूर्ण घटक सालिड वेस्ट मेनेजमेन्ट होता है। इस दिशा में भी छत्तीसगढ़ में हुए काम को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। राज्य के अम्बिकापुर मॉडल ने संपूर्ण देश में कमाल किया है।

जून तक संपूर्ण 168 शहरी निकाय एलईडी लाईट से रोशन होंगे

अमर अग्रवाल ने इस साल जून तक राज्य के सभी 168 शहरी निकाय क्षेत्रों को एलईडी लाईट से जगमग करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यह काम शुरू हो चुका है। नौ निकायों में काम में पूर्ण हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि किसी निजी कम्पनी को नहीं बल्कि भारत सरकार का सार्वजनिक उपक्रम बीएसएल को इसका ठेका दिया गया है। स्थापना के सात साल तक इसका रख-रखाव भी यह कम्पनी करेगी।

राजनांदगांव, भिलाई और कोरबा भी बनेंगे स्मार्ट सिटी

नगरीय प्रशासन मंत्री ने कहा कि राज्य के राजनंादगांव, भिलाई और कोरबा निगम क्षेत्रों को भी स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित किया जाएगा। इन्हें राज्य सरकार अपने संसाधन और नगरीय निकायों के सहयोग से विकसित करेगी। केन्द्र सरकार की ओर से रायपुर, नया रायपुर और बिलासपुर चयनित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अपने संसाधनों से स्मार्ट सिटी की स्थापना का यह पूरे देश में पहला मामला होगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए कंसलटेन्ट की नियुक्ति कर दी गई है।

वर्ष 2022 तक सबको मिलेगा आवास

अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार झोपड़ पट्टी में रहने वाले सभी बेघर लोगों को मकान बनाकर देगी। हाऊस फार ऑल योजना के अंतर्गत उन्हें मकान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार लगभग 3 हजार 500 करोड़ इसके लिए उधार लेगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए निकायों मंे आवेदन मंगाए गए हैं। चार लाख आवेदन मिल चुके है। इनका परीक्षण किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं देने वाले 35 उद्योगों का अनुदान बंद

उद्योग मंत्री अमर अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि यहां स्थापित होने वाले उद्योगों को राज्य सरकार की नई उद्योग नीति का पालन करना होगा। उन्हें स्थानीय लोगों को रोजगार देने में प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने बताया कि अकुशल श्रेणी के अंतर्गत 90 प्रतिशत, कुशल श्रेणी में 50 प्रतिशत और प्रबंधन के अंतर्गत 33 प्रतिशत की हिस्सेदारी होनी चाहिए। इस आदेश का पालन नहीं करने वाले 35 उद्योगों को राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली अनुदान सहायता राशि बंद कर दी गई है।

जेम पोर्टल से खरीदी करने वाली तीसरा बड़ा राज्य

अग्रवाल ने कहा कि सरकारी संस्थानों में खरीदी के लिए अब जेम पोर्टल का सहारा लिया गया है। इससे सरकारी खरीदी में गुणवत्ता के साथ-साथ पारदर्शिता भी आई है। उन्होंने बताया कि पिछले लगभग सात माह में इस पोर्टल के जरिए 124 करोड़ रुपए के खरीदी आदेश जारी किए गए हैं। इनमें 50 करोड़ के आदेश तो एमएसएमई को गया है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ देश का तीसरा राज्य है जो कि जेम पोर्टल के जरिए सबसे ज्यादा जरूरत की सामान खरीदी किया है। उन्होने कहा कि राज्य सरकार उद्योग के क्षेत्र में भी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट अप योजना लागू की है। राज्य मंे नवाचार गतिविधियों को सामने लाने के लिए कॉलेजों में प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें 4 हजार से ज्यादा मामले सामने आए। इनमें से 65 प्रकरणों का पंजीयन करके उन्हें केन्द्र सरकार को भेजा गया है। उनके लिए इन्क्यूब्ेाटर की नियुक्ति कर दी गई है, जो कि उन्हें सुविधा एवं सहयोग प्रदान करेगा।

राज्य में पेट्रोल-डीजल के दाम पड़ोसी राज्यों से कम

अमर अग्रवाल ने कहा कि राज्य मंे पेट्रोल और डीजल पर पहले से ही कम कर लगाए गए है। मध्यप्रदेश और अन्य पड़ोसी राज्यों से हमारे यहां कम रेट पर मिल रहा है। जीएसटी को उन्होंने सहकारी संघवाद का बढि़या उदाहरण बताया । उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद में सर्वानुमति से निर्णय लिए जाते हैं। अब तक हुई 23 बैंठकों में से 22 में मैं स्वयं शामिल हुआ हू। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के सभी व्यापारियों की दिक्क्तों और सुझावों का समाधान काउंसिल के जरिए किया गया है।

शराब की खरीदी पर बिल देने वाला पहला राज्य छत्तीसगढ़

वाणिज्यिक कर मंत्री ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जो शराब की खरीदी पर बिल जारी करता है। उन्होंने बताया कि विदेशी मदिरा पर पिछले कुछ महीनों से नियमित तौर पर बिलिंग की जा रही है। देशी मदिरा पर भी जल्द दी जाएगी। इससे ज्यादा कीमत पर शराब बिक्री की शिकायत को दूर करने में मदद मिली है। अग्रवाल ने बताया कि नई शराब नीति के बाद शराब के उपभोग में औसत रूप से कमी आई है। लेकिन इसके बावजूद राजस्व बढ़ा है। उन्होंने बताया कि पिछले 10 महीने में देशी मदिरा की बिक्री मात्र एक फीसदी बढ़ी है जबकि विदेशी मदिरा की बिक्री मंे 23 प्रतिशत और बियर की बिक्री में 30 प्रतिशत की कमी आई है। बिक्री में कमी के बावजूद सरकार का राजस्व बढ़ा है। उन्होंने बताया कि शराब उत्पादन केन्द्रांे पर किसी तरह की गड़बड़ी को रेाकने के लिए बूम बैरियर लगाए गए हैं। शराब बिक्री संबंधी किसी भी तरह की शिकायत करने के लिए टोल फ्री नम्बर 14405 स्थापित की गई है।

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