विवाह मुहूर्त खत्म, इस कारण अब एक माह बाद बजेगी शहनाई

रायपुर। इस साल मकर संक्रांति पर 15 जनवरी से शुरू हुआ विवाह मुहूर्त नौ मार्च को खत्म हो गया। जिन युवक-युवतियों का रिश्ता तय होने वाला है उन्हें अब फेरे लेने के लिए एक माह का इंतजार करना पड़ेगा। 14 मार्च से होलाष्टक और मीन मलमास एक साथ शुरू हो रहा है। मान्यता है कि होलाष्टक और मीन मलमास में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। चूंकि मीन मलमास 15 अपै्रल तक चलेगा, इसलिए एक महीने तक सगाई, विवाह, मुंडन, जनेऊ समेत किसी भी तरह का शुभ संस्कार नहीं किया जा सकेगा।

14 से 20 मार्च तक होलाष्टक

इस बार होलाष्टक 14 मार्च से शुरू होकर 20 मार्च तक चलेगा। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन के आठ दिन पहले से भक्त प्रहलाद को मृत्यु तुल्य यातनाएं दी गई थीं। भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद पर भगवान की कृपा हुई। हर यातना को वे प्रभु का नाम लेकर हंसते हुए झेल गए। प्रहलाद का बाल बांका तक नहीं हुआ।

प्रहलाद की बुआ होलिका को वरदान था कि वह अग्नि में भी नहीं जलेगी। इसी वरदान के चलते प्रहलाद के पिता हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि वह प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए।

प्रहलाद की बुआ होलिका को गोद में लेकर अग्नि में बैठी लेकिन भगवान की कृपा से प्रहलाद बच गए और होलिका भस्म हो गई। होलिका दहन के आठ दिन पूर्व से होलाष्टक मनाने की परंपरा है, इसलिए होलाष्टक के दौरान आठ दिनों तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता।

सूर्य जब मीन राशि में प्रवेश करता है तो उसे मीन मलमास कहा जाता है। जब तक सूर्य मीन राशि में विद्यमान रहता है तब तक वह मलीन अवस्था में होता है। चूंकि सूर्य को विवाह का कारक ग्रह माना जाता है इसलिए सूर्य के मलीन अवस्था में होने के कारण विवाह समेत अन्य संस्कार इस दौरान नहीं किया जाता।

सूर्य 14 मार्च को मीन राशि में प्रवेश कर रहा है और 14 अपै्रल तक विद्यमान रहेगा। सूर्य जब 15 अपै्रल को मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेगा, इसके बाद ही शुभ संस्कार किया जा सकेगा।

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