छत्तीसगढ़

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जीवन हमें त्याग सिखाता है

नवापारा नगर में जो राष्ट्रभक्त नही वो रामभक्त भी नही हो सकता - हेमलता शास्त्री जी

दीपक

अभनपुर: नवापारा नगर के राधा कृष्ण मंदिर वृंदावन कुंज में चल रही नव दिवसीय रामकथा के छठवें दिन का आरंभ मानस एवं व्यास पूजन से हुआ कथा व्यास देवी हेमलता शास्त्री जी ने भक्तों को समझाते हुए कहा राम जो हैं वह मर्यादा पुरुषोत्तम हैं जो मर्यादित कार्य करते हैं मर्यादा में रहकर के करते हैं हम मनुष्य अपनी मर्यादा भूल जाते हैं हम ऊंच-नीच का भेद समझते हैं

जाति पात का भेद समझते हैं लेकिन मेरे राम ने जाति पात मे भेद नहीं समझा हैं ना कोई जाति विशेष को महत्व दिया उन्होंने श्रीराम ने निम्न जाति को भी अपने गले लगाया और उच्च जाति को भी अपने गले लगाया उनके अंदर जाति पात ऊंच-नीच का कोई भी भेद नहीं है इतने सहज हैं मेरे राम देवी जी ने भक्तों को समझाया कि हमें ऊंच-नीच का भेद छोड़ करके समानता का भाव हमें रखना चाहिए सामान्य दृष्टि हमारी होनी चाहिए जिससे समाज का विकास हो जो हमारे अंदर भ्रांतियां हैं उन्हें निकालिए और एक सुंदर समाज का निर्माण करिए किसी गरीब की बेटी को अपनी बेटी समझे हैं किसी की मां को अपनी मां समझे, पूरी धरती हमारा परिवार है ।

वसुधैव कुटुंबकम की भावना हम रखें क्योकि राम इसलिए मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते हैं कि राम मर्यादा का पालन करते हैं या मर्यादा के अंतर्गत रहकर के कार्य करते हैं देवी जी ने बताया किराम इतने सहज हैं कि मां केकई के कहने पर 14 वर्ष के बनवास के लिए मां के शब्दों को एक आशीर्वाद मान करके निकल पड़ते हैं जब राम अयोध्या से वन गमन के लिए जाते हैं तो सभी की आंखें नम हो जाती हैं सभी लोग भगवान राम को रोकते हैं कि प्रभु आप मत जाओ देवी जी ने बताया कि भगवान राम का जाना सुनिश्चित है क्योंकि राम यदि बन नहीं जाएंगे तो उन असुरों का संहार कैसे होगा राम जो हैं वह हम सब के रक्षक हैं

इसी में देवी जी ने कहा कि जो सरहद पर जो हमारे सैनिक भाई खड़े हैं उन्हीं के कारण हम सब चैन की नींद लेते हैं वह रात भर जग कर के हम सब की सुरक्षा करते हैं हमें उन देश के वीर जवानों को नमन करना चाहिए क्योंकि वह भारत भूमि को ही अपनी माता समझते हैं कहा जाता है जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से बढ़कर हैं क्योंकि राम जो हैं

वह राष्ट्र के अंदर हैं तो हमें राष्ट्र की भी रक्षा करनी चाहिए राष्ट्रहित के विषय में भी सोचना चाहिए परम पूज्य देवी जी ने एक सुंदर कथन कहा जो राष्ट्रभक्त नहीं वो राम भक्त नहीं हो सकता परम पूज्य देवी जी ने सभी भक्तों को राष्ट्रभक्ति का संदेश देते हुए कहा हम राम के भक्त तभी कहलाएंगे जब हम राष्ट्रभक्त हो क्योंकि राष्ट्र में ही तो राम हैं और परम पूज्य देवी जी ने समझाते हुए कहा उस माँ ने कितना त्याग किया किया होगा जिसने मां कौशल्या की तरह अपने बेटे को सरहद पर भेज दिया हम सब की रक्षा के लिए कि मेरा लाल उन सभी बहनों की रक्षा करेगा उन सभी माताओं की रक्षा करेगा अपनी मातृभूमि की रक्षा करेगा जिससे हम सब यहां चैन की सांस ले सकें

ऐसा भाव उस सरहद पे खड़े सैनिक की मां का है कि उस माँ के अंदर कितनी राष्ट्रभक्ति है हमारे अंदर भी वह राष्ट्रभक्ति पैदा हो जागृत हो ऐसा संदेश परम पूज्य देवी जी ने सबको दिया और कथा में देवी जी कहा कि 1 दिन हम सब उन देश के वीरों के लिए मातृभूमिके लिए जरूर निकालें मां भारती के लिए जरूर निकालें उन वीर शहीदों के विषय में जाने जिन्होंने हमारे देश के लिए अपनी कुर्बानी दी हमारा फर्ज बनता है कि हम उन्हें भी याद करें राम कथा में मां भारती की झांकी भारत माता की झांकी निकाली जब हमारी बहनें हाथों में तिरंगा लेकर के जो पंडाल में प्रवेश की तो सभी का मन गदगद हो गया।

देवी जी ने स्वयं भारत माता का पूजन किया और पूरे पंडाल को राष्ट्रभक्ति मय कर दिया। राष्ट्रभक्ति का संदेश परम पूज्य देवी जी ने दिया कि हमें अपने तिरंगे का मान सम्मान प्रतिष्ठा बना करके रखनी हैं। एकता का संदेश दिया कि हम सब यदि एक हैं तो कोई भी हमारा कुछ बिगाड़ नहीं सकता है ।हमें परिवार में भी संगठित होकर के रहना चाहिए। देवी जी ने कहा कि आज परिवार बिखर रहे हैं। भाई भाई में फूट डाली जा रही है।

भाई भाई का बैरी हो रहा है ।ऐसा नहीं होना चाहिए क्योंकि राम यह सब नहीं सिखाते हैं राम का जीवन हमें त्याग सिखाता है, ऐसा सुंदर उपदेश परम पूज्य देवी जी ने भक्तों को दिया राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया एकता का संदेश देवी जी ने सभी को दिया और राष्ट्रभक्ति सभी के अंदर जागृत की कथा को सुनकर के सभी भावविभोर हो गए ।

राष्ट्रभक्ति भक्तों के अंदर जागृत हुई और सभी ने एक संकल्प लिया कि हम राष्ट्र के प्रति अपना आदर भाव सम्मान अवश्य रखेंगे ।कथा में भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आज के मुख्य यजमान के रूप में श्री अशोक कुमार अग्रवाल, श्रीमती चंद्रलेखा अग्रवाल,कु.लावण्या अग्रवाल सहपरिवार उपस्थित थे।

आज की कथा में मोहन अग्रवाल, श्रीमती कुसुम अग्रवाल, गिरधारी अग्रवाल, गोपाल अग्रवाल, नंदकिशोर राठी, कोमल साहू, श्रीमती रेणुका, रेखा साहू, जानकी पटेल, श्रीमती पार्वती सोनी, श्रीमती कृष्णा देवांगन, विजय गुप्‍ता, श्रीमती सुधा गुप्‍ता, सनत शर्मा, दिलीप अग्रवाल, श्रीमती दुकलहीन सेन, श्रीमती तुलसी सेन, सुरेश काबरा, तुकाराम कंसारी , बीसेशर हिरवानी , भुनेश्‍वर कंसारी, बिसौहा प्रसाद शुक्ला, भगवती साहू, श्रीमती गीता प्रमोद गुप्‍ता, देवसिंग साहू, मनोरमा ठाकुर रायपुर, श्रीमती त्रिवेणी सेन सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित हो कथा श्रवण कर अपना जीवन धन्य किया।

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