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असंवैधानिक बूचड़ खानों के विरुद्ध जन आन्दोलन

इंदौर : पशु हत्या के विरोध को लेकर शहर की जनता काफी जागरूक हो गयी है| स्थानीय शासन व सुरक्षा विभाग ने अवैध बूचड़ खानों को बंद करने के अभियान के तहत लगभग 20 ऐसी दुकानें बंद करा दी है जहाँ अवैध रूप से पशु हत्या की जा रही थी|
हमारे देश मे भोजन के नाम ऐसे हजारों पशुओं की बलि रोज़ ही चढ़ाई जा रही हैं| ध्यानदेने वाली बात यह कि इस प्रकार की बूचड़ खानों के स्वचालन हेतु एक न्यायिक प्रक्रिया होना अति आवश्यक हैं तथा सभी पशुओं का इलाज व स्वच्छता का भी ध्यान रखना अनिवार्य होना चाहिए. किन्तु सभी जाँच पड़ताल में इस प्रकार की सुविधाओ की पुष्टि नहीं की गयी हैं|
यह भी पाया गया हैं की पक्षियों को उनके प्राकृतिक मृत्यु से पहले ही काट दिया जाता हैं अतः उन्हें तंग व अस्वच्छता से रखा जाता हैं| बड़े पशु भी इन बूचड़ खानों में मार दिए जाते हैं तथा कोई वैधानिक कागजी कारवाही भी नहीं होती| बीमार पक्षी स्वस्थ पक्षियों के साथ रखे जाते है जिस से स्वस्थ पक्षियों को बीमारी लगने का डर रहता है तथा उन्हें ठीक से दाना पानी भी नहीं दिया जाता| वाही मीट की दुकानों पर भी अवैध पशु हत्या देखी गयी है जबकि वह सिर्फ मीट की बिक्री होनी चाहिए. ख़राब मीट व उससे बची हुयी गंदगी को निपटाने का कोई ठीक इंतजाम नहीं होता. हमारे नगर निगम के पास भी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जो इस असंवैधानिक कार्यो पर रोक लगा सके. कितने ही सड़क पर पल रहे कुत्ते इसी ही फेके हुए मीट को खा कर पेट भरते है.
इस सन्दर्भ में इंदौर के एक नागरिक श्री राहुल दावे जी कहना है “ मे परेशां हो गया हु नगर निगम के इस बर्ताव से. मैंने कई बार इसकी शिकायत भी की है लेकिन न तो इस से नगर निगम को कोई फर्क पड़ा न मीडिया ने कोई सीरियस एक्शन लिया. मेरे जैसे कई लोगो ने इस दुराचार की शिकायत की है लेकिन उम्मीद है की जल्द ही इस पर कोई कार्यवाही होगी|”
“मीट के दुकानों के मालिकों को कोई मतलब नहीं की आम आदमी के सेहत पर क्या फर्क पड़ता है इस तरह के खुले आम पशु हत्या से| वो बड़े ही आसानी से बचा हुआ मीट फेंक देते सड़क पर कुत्तों के लिए और सभी कुत्ते आपस मे लड़ते है उस जरा से मीट क लिए| मेरे घर के करीब जो मीट की दुकान है उस से आपको अंदाजा हो जायेगा की ये सड़क के कुत्ते कितने खतरनाक होते है और क्यू” यह कहना है श्री दौड़ जी का जो की इंदौर के ही एक नागरिक है|
पशु निवारण क्रूरता अधिनियम 1960 के अंतर्गत यह सभी बूचड़ खानों के लिए भोजन सुरक्षा का नियम बनाया गया तथा मानक अधिनियम 2010, बी ई एस अधिनियम, प्रदुषण नियंत्रण मानदंड तथा नगर निगम के पंजीकरण नियमों का इस विषय पर उलंघन पाया गया तथा किसी को भी दण्डित नहीं किया गया. उदाहरण के तौर पर मीट की दुकान का बिना भोजन सुरक्षा पंजीकरण के स्वचालन करना गैर क़ानूनी है तथा 6 महीने कारावास और 5 लाख रुपे का ज़ुरमाना सरकार द्वारा तय किया गया है.
काफी मीट की दुकानों पर बाल मज़दूरों को पाया भी पाया गया है, जंग लगे औजार इस्तेमाल करते पाया गया है जिस से कीड़े, धुल तथा धुआँ जैसे प्रदुषण का प्रकोप फैलता है| यह सभी बीमारी फैलाने वाले लक्षण है और हमारे शहर मे ऐसी कोई लैब भी नहीं जहाँ इन कीटाणु के होने की जानकारी किसी टेस्ट द्वारा पा सके. क्या पूरे शहर को चंद पैसों की ख़ातिर होने वाले मुनाफ़े के कारण इनसे होने वाले खतरों को झेलना पड़ेगा ?” यह सवाल था श्री काव्या जी का जो 5 साल की एक बेटी की माँ है.
वरदा मेहरोत्रा, निर्देशक राष्ट्रीय पशु सुरक्षा महासंघ, इनका मुहिम को लेकर कहना है “ इस प्रकार की लोगो द्वारा चिंता जताई जाना उन सभी पशुओं के लिए एक आशा की किरण है जो इन अवैध बूचड़ खानों व मीट की दुकानों पर मारे जा रहे है. इसी प्रकार के एक मुहिम के तहत जयपुर मे कई अवैध बूचड़ खानों व मीट की दुकानों को बंद किया गया. मेरी यह अपील है स्थानीय शासन तथा भोजन सुरक्षा विभाग से की इस समस्या को गंभीरता से ले तथा पशुओं व् मनुष्यों के हित मे इस प्रकार की सभी शिकायतों पर अपना कार्य आरंभ करे.

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