जन आन्दोलन- एक समान समझ का निर्माण

कुपोषण है मानवता पर कलंक - निदेशक, आई. सी.डी.एस

पटना: कुपोषण पूरे राज्य में एक गंभीर समस्या है तथा मातृ व शिशु मृत्यु दर का प्रमुख कारण है. इस गंभीर समस्या से निपटने हेतु पूरे देश व बिहार राज्य में पोषण अभियान चलाया जा रहा है. इसकी पहुँच को बढ़ाने तथा गुणवत्ता में सुधार हेतु अब अन्तर्विभागीय समन्वय पर जोर दिया जा रहा है.

इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए पटना स्थित होटल पाटलिपुत्र कॉन्टिनेंटल में पोषण अभियान का कार्ययोजना साझा करना हेतु कार्यशाला व बैठक का आयोजन किया गया. कार्यशाला का शुभारम्भ समेकित बाल विकास विभाग के निदेशक अलोक कुमार ने किया. इस अवसर पर उन्होंने कुपोषण को मानवता पर कलंक बताया तथा सभी लोगों को एकजुट होकर इससे लड़ने की अपील की.

उन्होंने इसके लिए व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर दिया. जन आन्दोलन की संकल्पना तथा उसकी जरुरत के बारे में बताते हुए यूनिसेफ की वरिष्ठ पदाधिकारी मोना सिन्हा ने बताया की कुपोषण दूर करना एक जनांदोलन बनना चाहिए क्योंकि पोषण की आवश्यकता एक इंसान को गर्भ में आने से लेकर उसकी अंतिम क्षण तक रहती है.

उन्होंने कहा की जीवन के प्रथम हजार दिन, किशोरावस्था, शादी की उम्र एवं उसके बाद तक पोषण चाहिए तथा उन्होंने कम उम्र में विवाह पर कानून को और सख्त करने की वकालत की.
अलाइव एंड थराइव की वरिष्ठ कार्यक्रम पदाधिकारी डा. अनुपम श्रीवास्तव ने सामाजिक व्यवहार परिवर्तन माध्यम की जरुरत पर बल दिया.

डा. श्रीवास्तव ने कहा की पोषण की सोच व सन्देश को चिन्हित लाभार्थियों तक पहुँचाने हेतु संचार के एक से अधिक श्रोत की जरुरत है. समेकित बाल विकास विभाग की उपनिदेशक श्वेता सहाय ने जन आन्दोलन की सफलता हेतु सभी विभागों की आपसी समन्वयता तथा एकजुट प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया.

उन्होंने बताया की इसके लिए जल्द ही सभी साथी विभागों के साथ बैठक की जाएगी तथा इस आन्दोलन को सफल बनाने के लिए रूपरेखा तैयार की जाएगी. इस अवसर पर कृषि,सूचना एवं जन संपर्क विभाग, जीविका, केयर, यूनिसेफ तथा अन्य विभाग के अधिकारीगण मौजूद थे.

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