दिखने लगे 2019 के संकेत, सपा के पोस्टर पर दिखीं मायावती

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर से आए लोकसभा उपचुनाव के परिणामों से समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं में गजब का जोश है। दोनों ही सीटों पर सपा उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी।

इन्हीं परिणामों के बाद भविष्य के कयास लगने शुरू हो गए हैं। 2019 में दोनों पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के संकेत मिलने लगे हैं। रिजल्ट आने के बाद सपा प्रमुख बसपा प्रमुख मायावती से मिलने उनके आवास पर भी गए थे।

अब लखनऊ से नया पोस्टर आया है। ये पोस्टर लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगा है। इस पोस्टर की खास बात ये है कि इसमें अखिलेश यादव के साथ-साथ मायावती भी हैं। पोस्टर में फूलपुर और गोरखपुर की जीत के लिए जनता को बधाई दी गई है।

समाजवादी पार्टी ने 2017 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। हालांकि ये प्रयोग सफल नहीं हुआ और सपा सत्ता से बाहर हो गई। लेकिन उपचुनाव में उसे बसपा का समर्थन मिला। भाजपा की इन दोनों प्रतिष्ठित सीटों पर मिली जीत समाजवादी पार्टी के लिए संजीवनी का काम करेगी। कांग्रेस को छोड़कर उप चुनाव में अकेले जाने और फिर बसपा का समर्थन मिलने का फायदा सपा को हुआ है।

बगैर बसपा के समर्थन के दोनों प्रतिष्ठित सीटों को भाजपा से छीनना आसान काम नहीं था। 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को सपा और बसपा के कुल वोटों से ज्यादा मत मिले थे। भाजपा यही मानकर चल रही थी दोनों पार्टियां साथ आकर भी उसे चुनौती देने की स्थिति में नहीं होंगी लेकिन इस बार कम मतदान प्रतिशन ने उसका यह हिसाब गड़बड़ कर दिया। 2014 में योगी आदित्यनाथ को कुल पड़े वोटों में से 51.8 प्रतिशत वोट मिले थे यानी कुल मतों के आधे से भी ज्यादा।

इसका सीधा मतलब था कि उपचुनाव में भले ही इस बार बहुध्रुवीय के बजाय द्विध्रुवीय मुकाबला था, लेकिन अगर भाजपा पिछले वोटशेयर को बरकरार रख पाती तो यह उसका यह गढ़ अजेय ही रहता।

2014 में यहां सपा को 21.75 तो बसपा को 16.95 प्रतिशत वोट मिले थे यानी दोनों को मिलाकर करीब 39 प्रतिशत वोट मिले थे। इस बार बसपा ने सपा उम्मीदवार का समर्थन किया और यह मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ। भाजपा को उम्मीद थी कि बसपा का पूरा वोट सपा को ट्रांसफर नहीं होगा लेकिन उसका यह गणित फेल हो गया।

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