छत्तीसगढ़

मेडिकल अनफिट नियमों में बदलाव कर सकता है सेल : एचएमएस

भिलाई (वीएनएस)। बीएसपी में मेडिकल अनफिट के क्लॉज को लेकर कर्मी नाराज हैं । वे इसमें परिवर्तन करते हुए उन सभी बीमारियों को शामिल किए जाने की मांग कर रहे हैं। कर्मी को स्थाई तौर पर मेडिकल अनफिट घोषित किया जाता है। ऐसा होने से पीडि़त कर्मी के परिवार के एक सदस्य को बीएसपी में नौकरी का अवसर मिल सके। सेल प्रबंधन सूची में बदलाव पर विचार कर रही है।

पहले क्या था इसका नियम : एचएमएस के गेट मीटिंग में डीके सिंह ने मेडिकल अनफिट होने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को तीन माह के अंदर रोजगार देने का मुद्दा उठाया। वहीं कुछ सदस्यों ने मेडिकल अनफिट होने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उसमें सुधार की बात कही। बताया गया कि पूर्व में मेडिकल अनफिट की सूची में उन सभी प्रकार की बीमारियां शामिल थी जिनके होने से कर्मी को स्थाई रूप से अनफिट घोषित किया जाता था। बाद में बीएसपी के एक ईडी पीएंडए ने इसमें परिवर्तन करते हुए कैंसर जैसी 6 गंभीर बीमारियों के लिए ही मेडिकल अनफिट की सूची में रखा गया। इससे उन बीमारियों के चलते जो सूची में शामिल नहीं है, कोई कर्मी मेडिकल अनफिट हो जाता है तो उसके परिजन को नौकरी की सुविधा नहीं दी जा रही।
गेट मीटिंग में मौजूद कर्मियों ने छत्तीसगढ़ के युवा बेरोजगारों को बीएसपी में रोजगार में प्राथमिकता देने का समर्थन किया तथा सभी लोगों ने भर्ती प्रक्रिया छत्तीसगढ़ के भीतर ही आयोजित करने की मांग का समर्थन किया। दीनानाथ मिश्रा ने फेस्टिवल इनकैशमेंट का मुद्दा उठाते हुए इसे तत्काल शुरू करने की मांग की।
दीपक मुदलियार ने वीआर का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वीआर लेने पर प्रबंधन की ओरक से करोड़ों का भुगतान किया जा रहा है जबकि सेल घाटे में है। बीएसपी के कर्मचारियों की औसत आयु 47-48 वर्ष के बीच है तथा एक्सपांसन प्रोजेक्ट पूरा होने वाला है। ऐसे समय में शिक्षित नौजवानों की बीएसपी को आवश्यकता है। यदि वीआर स्कीम के अंतर्गत लाखों रुपए देने के स्थान पर उनके एक आश्रित शिक्षित बेरोजगार को नौकरी दी जाए तो बीएसपी को युवा मैनपावर भी मिलेगा तथा वीआर स्कीम में सेल को करोड़ों रुपए खर्च भी नहीं करना पड़ेगा। प्रमोद कुमार मिश्रा ने बताया कि इस प्रकार की व्यवस्था टाटा स्टील प्लांट में की जा चुकी है।

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