मेडिकल कॉलेजों में लांड्री सेवा का विवादित टेंडर निरस्त

अमित जोगी ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को लिखा था पत्र

रायपुर

प्रदेश के छः शासकीय मेडिकल कॉलेजों और डीकेएस पोस्ट ग्रेजुएट संस्थान में लांड्री सेवा स्थापित करने के लिए जारी किये गए विवादित टेंडर को अंततः राज्य सरकार ने निरस्त कर दिया है। मरवाही विधायक अमित जोगी ने 20 जून को इस विषय में मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर प्रदेश के धोबी समाज के हितों को देखते हुए उक्त टेंडर को रद्द किये जाने की मांग की थी।

>उक्त निविदा की शर्तों के अनुसार निविदा में भाग लेने के लिए लांड्री सेवा प्रदाता का पिछले वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रूपए का टर्नओवर होना अनिवार्य है ।साथ ही उसकी नेट वर्थ 5 करोड़ रूपए होना अनिवार्य किया गया है। निविदा के साथ सेवा प्रदाता को 45 लाख रूपए का डिपाजिट देने भी कहा गया है। अमित जोगी ने इन शर्तों पर आपत्ति उठाते हुए कहा था कि इन शर्तों की वजह से छत्तीसगढ़ का एक बहुत बड़ा वर्ग जो कपड़ा धुलाई का पैतृक व्यवसाय कर रहा है (धोबी समाज) इस निविदा में भाग लेने से वंचित रह जाएगा ,क्योंकि उसके पास न तो डिपाजिट देने के लिए इतनी बड़ी रकम होगी और न ही इतना टर्नओवर व नेटवर्थ होगा।

सरकार द्वारा इस निविदा को निरस्त किये जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए विधायक अमित जोगी ने कहा कि अंततः धोबी सामाज की जीत हुई है। कपड़ा धुलाई इस समाज का पैतृक व्यवसाय है ,इसलिए मेडिकल कॉलेजों में लांड्री सेवा प्रदान करने का पहला हक़ छत्तीसगढ़ के धोबी सामाज का है न कि प्रदेश के बाहर की कंपनियों का।

अमित जोगी ने मांग की है कि इसी प्रकार अन्य सामाज के लोग जो अपना पैतृक व्यवसाय करते हैं, जैसे डेयरी और गौ पालन में यादव सामाज, सब्जी उगाने में मल्हार सामाज, मछलीपालन के लिए केवट और मांझी सामाज; इन सब समाजों के लोगों को भी सरकार द्वारा अपना पैतृक व्यवसाय करने के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए। राज्य सरकार का उद्देश्य स्थानीय लोगों का विकास करना होना चाहिए न कि व्यसायिक संस्था के रूप में आय प्राप्त करने की संस्था के रूप में या आउट सोर्सिग दवारा अन्य प्रदेश के लोग को आर्थिक रूप से मजबूत करने की ।

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