ज्योतिष

ज्योतिष में चिकित्सा पेशा

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री “श्री मां चिंतपूर्णी ज्योतिष संस्थान 5, महारानी बाग, नई दिल्ली -110014 8178677715

ज्योतिष में चिकित्सा पेशा-

 6, 8 और 12 वें भाव में चंद्र ग्रह होना चाहिए।
 कुंडली में चंद्रमा कमजोर होना चाहिए या अशुभ नक्षत्र में होना चाहिए अथवा मंगल,
शनि राहु आदि जैसे ग्रहों द्वारा प्रभावित होना चाहिए। ।
 यदि चंद्रमा 10 वें घर में है और छठे घर से संबंधित है।
 यदि छठा घर, 6 वें घर का स्वामी 10वें भाव या भावेश से संबंध बनाता तो जातक के
डॉक्टर बनने के योग बनते है।
 सूर्य अच्छी स्थिति में होना चाहिए।
 सूर्य और चंद्रमा या बृहस्पति और मंगल केंद्र (१,४,७ एवं १० भाव) में हों तो भी मेडिकल
/ डॉक्टर बनने के अच्छे योग बनते हैं।
 सूर्य – राहु, उपयुक्त राशियों में होने चाहिए।
 शनि, मंगल और राहु केतु जैसे अशुभ/पाप भाव युक्त ग्रह 10 वें भाव या 10 वें भाव के
स्वामी या दोनों को दृष्ट कर रहे होने चाहिए।
 यदि 5 वें और 6 वें भाव एक-दूसरे से जुड़े हों तो यह योग रोगों का निदान करने के
लिए जातक को अच्छी बुद्धि देता है।
 यदि मंगल 6 वें भाव या भावेश और 10 वें भाव या 10 वें भावेश को दॄष्ट करता है या
फिर युति करता है तो जातक सर्जन बन सकता है।

 कर्क राशि को रोगमुक्ति की राशि के रुप में जाना जाता हैं, यदि यह राशि का १0 वें
भाव या लग्न या दशमेश की हों तो व्यक्ति चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ता है।
 लग्न और लग्नेश, 6 वाँ भाव या 6 वां भावेश, 10 वाँ भाव या 10 वाँ भावेश और 12
वाँ भाव या भावेश एक-दूसरे से जुड़े हों तो चिकित्सा क्षेत्र में जाने के मार्ग खुलते है।
 यदि 10 वें भाव का स्वामी अश्वनी नक्षत्र में हों तो व्यक्ति चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत
होता है। क्योंकि अश्वनी नक्षत्र दवाईयों का कारक नक्षत्र है।

चिकित्सा क्षेत्र से संबंधित ग्रह इस प्रकार हैं-

एक्स रे, अल्ट्रासाउंड आदि – राहु
एनेथिसिया – शनि और राहु
सर्जरी – मंगल
बाल चिकित्सा – बुध और चंद्रमा
ईएनटी – बुध और मंगल
न्यूरोलॉजी – बृहस्पति और बुध
मनोरोग – चंद्रमा, बुध, राहु, शनि और केतु
सेक्स विशेषज्ञ – शुक्र, शनि, केतु और वृश्चिक राशि
ह्रदय – सूर्य और मंगल (सर्जरी के लिए)
रक्षक टीके और दवाईयां- शनि, राहु, केतु
गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी – गुरु और शनि

नेफ्रोलॉजी – शुक्र और गुरु
ऑन्कोलॉजी – राहु, मंगल और गुरु
ग्रंथियाँ – गुरु और बुध
औषधि विज्ञान – राहु और सूर्य
ऑर्थो – शनि, मंगल
विशेष चिकित्सक पेशे के लिए 10 वें भाव की राशि का विश्लेषण –

 मेष: दंत चिकित्सा और सर्जरी
 वृषभ: फिजिशियन, केमिस्ट
 मिथुन: चिकित्सा अनुसंधान और चिकित्सक
 कैंसर: स्त्री रोग विशेषज्ञ और नर्सिंग
 सिंह: हृदय रोग विशेषज्ञ
 कन्या: सामान्य औषधि और रसायन
 तुला: स्त्री रोग विशेषज्ञ, लैब तकनीशियन और पैथोलॉजिस्ट
 वृश्चिक: सामान्य चिकित्सा, दंत चिकित्सक, आर्थोपेडिक और सर्जन
 धनु: एक्स-रे, अल्ट्रा साउंड स्पेशलिस्ट
 मकर: चिकित्सक
 कुम्भ: न्यूरोलॉजिस्ट, प्राकृतिक चिकित्सा और चिकित्सा उपकरण
 मीन: फिजिशियन, नर्सिंग और सर्जरी

चिकित्सा पेशे के अन्य योग-

 सूर्य / शनि / राहु 5 वें / 9 वें / 10 वें / घर या उनके भावेशों से संबंधित हो।
 6th / 8th हाउस / भावेश किसी भी तरह से 5th / 10th हाउस / भावेश से संबंधित हो।
 बृहस्पति 5 वें / 10 वें घर / भावेशों से संबंधित हो।
 मंगल या कोई भी पापी ग्रह 5 वें / 10 वें घर / भावेशों से संबंधित हो।
 6 वें भाव का स्वामी 9 वें / 5 वें / 11 वें में स्थित हो।
 11 वें भाव का स्वामी 6 वें भाव में हो।
 राहु / सूर्य / शनि लग्न भाव / द्वितीय / 5 वें / 10 वें भाव / भावेशों से संबंधित हो।
 सूर्य और मंगल 10 वें भाव में हों तो जातक एक अच्छा सर्जन बनता है।
 शुक्र और बृहस्पति 6 वें / 12 वें में हों तो जातक चिकित्सा पेशे का चयन करता है।
 बुध और सूर्य लग्न या गुरु से चतुर्थ भाव में हो या चन्द्रमा 8 वें भाव में हों, और जातक का जन्म कर्क
लग्न में हुआ हो तो व्यक्ति एक योग्य चिकित्सक बन प्रसिद्धि प्राप्त करता है।

 चतुर्थ भाव शिक्षा का सूचक है और 5 वां घर बुद्धि को इंगित करता है।
 10 वां भाव कर्मक्षेत्र या कार्यक्षेत्र (हाउस ऑफ प्रोफेशन) को दर्शाता है।
 अस्पतालों और बिस्तरों को इंगित करने वाला भाव 12 वां भाव है।
 मंगल, शनि और राहु तकनीकी ग्रहों की भूमिका में हो।
 चंद्रमा अशुभ ग्रहों के द्वारा पीडित होना चाहिए, जिससे मन कमजोर ना हो और जातक रक्त देखने पर
साहस बनाए रखें।
 जातक में मानवीय और परोपकार की भावना होनी चाहिए, इसलिए छ्ठे भाव से गुरु का संबंध होना
चाहिए।
 5 वें और 10 वें भाव के मध्य प्रत्यक्ष संबंध होना चाहिए।

 5वें, १0 वें और १२वें भाव का संबंध होना चाहिए।
 चंद्रमा पीडित होना चाहिए और या 5 वें भाव का स्वामी भी।
 चंद्र या पंचमेश अशुभ ग्रहों के साथ युति, स्थिति या दॄष्टि संबंध में होना चाहिए।
 या फिर चंद्र या पंचमेश पापकर्तरी योग में स्थित हो।
 यदि कुंडली में गुरु कमजोर है तो व्यक्ति होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक चिकित्सक हो सकता है और यदि गुरु
अधिक शक्तिशाली है तो वह आगे M।B।B।S की पढ़ाई करेगा।
 यदि कुंडली में मंगल और गुरु का योग अच्छा है, तो वह सर्जरी करेगा या यदि सूर्य का योग अच्छा है, तो
वह नेत्र विशेषज्ञ या सोनोग्राफी विषय के साथ अध्ययन करेगा, या यदि शुक्र योग उत्तम है तो वह स्त्री
रोग विशेषज्ञ, या मनोरोग विषय का अध्ययन करता है, अथवा राहू योग हो तो जातक आर्थोपेडिक सर्जन
बन सकता है।

एक सफल डॉक्टर बनने के ज्योतिषीय योग-

 यदि बली सूर्य, मंगल, बृहस्पति, शनि और राहु 10 वें, 2 या 7 वें भाव के साथ संबंध बनाते हैं, तो जातक
एक सफल चिकित्सक बन सकता है।
 यदि राहु / केतु शुभ भाव 1, 4, 5, 7, 9 या 10 वें भाव में स्थित हों, तो जातक एक डॉक्टर बन सकता
है।
 यदि 6 वाँ घर या 6 वाँ स्वामी 10 वें भाव से संबंध बनाता है, तो जातक डॉक्टर या वकील बनता है।
 यदि मंगल या केतु 10 वें घर या 10 वें स्वामी के साथ युति/स्थिति/दॄष्टि संबंध बनाए तो जातक एक
शल्य विशेषज्ञ बनने की योग्यता रखता है।
 यदि बृहस्पति या केतु का 10 वें भाव या 10 वें भावेश के साथ संबंध (दॄष्टि / युति / स्थिति) में हो तो
जातक देशी या होम्योपैथी चिकित्सक बन सकता है।
 यदि 10 वें घर में मेष, सिंह, धनु या वृश्चिक में से कोई भी राशि हो तो जातक को डॉक्टर बनने के
उचित अवसर प्राप्त होते हैं।
 यदि सूर्य और शनि 10 वें भाव से संबंध बनाए तो जातक दंत चिकित्सक बन सकता है।

 10 वें भाव में सूर्य, शुक्र और बृहस्पति की स्थिति जातक को स्त्री रोग विशेषज्ञ बनाती है।
 सूर्य और चंद्रमा या बृहस्पति और मंगल (केंद्र) में हों तो जातक एक डॉक्टर बन सकता हैं।
 यदि किसी को कुंडली में उपरोक्त में से कुछ योग एक साथ स्थित हो तो जातक को चिकित्सा विज्ञान के
क्षेत्र में अध्ययन कर, चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत होने का प्रयास करना चाहिए। इस क्षेत्र में ऐसे जातक के
सफल होने की बहुत संभावनाएं बनती है।
 यदि सूर्य, मंगल और बुध या सूर्य, बुध और बृहस्पति कन्या, वृश्चिक या कुंभ राशि में, दूसरे, पांचवें या
दसवें भाव के साथ संयुक्त होते हैं, तो व्यक्ति एक अच्छा डॉक्टर बन सकता है। सूर्य व्यक्ति को
आत्मविश्वासी बनाता है और मंगल उसे साहसी बनाता है। बृहस्पति एक दिव्य ग्रह है जो किसी व्यक्ति
को दूसरे व्यक्ति को मानवीय तरीके से चिकित्सा करने की अनुमति देता है। चंद्रमा जहरीले पदार्थों के
प्रयोग से लोगों को दर्द और बीमारियों की पीड़ा को दूर करने की योग्यता देता है।
 जब सूर्य दशम भाव में स्थित होता है और मंगल और शुक्र के साथ युति बनाता है, तो व्यक्ति सर्जन बन
सकता है। यह योग व्यक्ति को आत्मविश्वास के साथ इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
 दसवें घर में सूर्य और शनि की युति व्यक्ति को बाल विशेषज्ञ बनने में मदद करता है। हालांकि, यह भी
कहा जाता है कि यदि शनि और सूर्य किसी भी भाव में युति बनाते हैं, तो उस घर के शुभ परिणाम
प्रभावित होते है।
 यदि मंगल और शनि दसवें घर से संबंध बनाते हैं, तो व्यक्ति दंत चिकित्सक बन सकता है। इसलिए
चिकित्सा क्षेत्र से संबंधित होने के लिए, दसवें घर / स्वामी का छ्ठे भाव के स्वामियों के साथ संबंध बनता
है तो जातक चिकित्सा क्षेत्र में जाता है।
 यदि मंगल दशम भाव में और तुला राशि में हो तो जातक सर्जन बनता है।
 यदि शुक्र और मंगल एक साथ हों और सूर्य उन पर प्रभाव डालते हैं, तो सर्जन बनने की संभावना प्रबल
हो जाती है।
 शुक्र और चंद्रमा की युति और सूर्य का प्रभाव व्यक्ति को चिकित्सक बनाता है।
 कुंडली के छठे या बारहवें भाव से सूर्य, शुक्र और चंद्रमा का संबंध हो तो व्यक्ति स्त्री रोग विशेषज्ञ और
प्रसूति रोग विशेषज्ञ बन सकता है।

डॉक्टर बनने में मंगल और शनि की भूमिकाएं

मंगल और शनि ये दो ग्रह ऐसे हैं जो व्यक्ति को सफल चिकित्सक बनाने में मदद करते हैं। मंगल एक ऐसा ग्रह है
जो शल्य क्रिया से संबंधित ग्रह है जबकि शनि तकनीक और कौशल के लिए जाना जाता है। यदि इन दोनों ग्रहों
का संबंध दशम भाव के स्वामी से हो और पंचम भाव का स्वामी भी किसी तरह इन दोनों ग्रहों से संबंध रखता हो
तो व्यक्ति आसानी से डॉक्टर बन सकता है।

सफल न्यूरोलॉजिस्ट

एक सफल न्यूरोलॉजिस्ट होने के लिए जन्म चार्ट में मंगल और शनि मजबूत होना चाहिए। इसके अतिरिक्त
षोडशवर्ग में स्व-ग्रही चंद्रमा भी होना चाहिए। यदि चंद्रमा कमजोर है, तो व्यक्ति एक न्यूरोलॉजिस्ट के रूप में
पर्याप्त सफलता प्राप्त नहीं कर सकता है। क्योंकि चन्द्रमा के मजबूत हुए बिना मन मजबूत नहीं हो सकता।
इसलिए, एक न्यूरोलॉजिस्ट बनने के लिए व्यक्ति के जन्म चार्ट में चंद्रमा मजबूत होना आवश्यक है।

सफल नेत्र विशेषज्ञ

जन्म चार्ट में सूर्य और चंद्र ग्रह नेत्रों के कारक ग्रह है। यदि ये दसवें भाव के स्वामी के साथ संबंध रखते हैं और
यह संबंध प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लग्न भाव से बनता है तो व्यक्ति का कार्यक्षेत्र नेत्र चिकित्सा से संबंधित हो
सकता है। चिकित्सक बनने के प्रबल योग होने के बाद ही नेत्र विशेषज्ञता के योग देखने चाहिए। यदि चिकित्सक
बनने की संभावनाएं कमजोर हो तो ऐसे योग अपना फल नहीं दे पाते हैं।

चिकित्सा क्षेत्र में विशेषज्ञता के योग –

सूर्य, बुध और शुक्र यदि प्रथम / द्वितीय / छठे / १० वें / ११ वें भाव में हो तो जातक डेंटिस्ट बन सकता है।
सूर्य, मंगल और शुक्र यदि प्रथम / 2 रें / 6 वें / 10 वें / 11 वें भाव में हो तो जातक नेत्र विशेषज्ञ बन सकता है।
मंगल, शुक्र और शनि यदि 6 वें / 10 वें घर से संबंधित हो तो जातक त्वचा विशेषज्ञ बन सकता है।
केतु 10 वें भाव से संबंधित हो तो व्यक्ति होम्योपैथिक चिकित्सक बनने के योग बनते है।
सूर्य / मंगल / केतु यदि द्वितीय / 5 वें / 10 वें घर में स्थित हो तो जातक होम्योपैथिक पेशे में जाता है।

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