स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की सह पर बिना लाइसेंस के चलाया जा रहा मेडिकल स्टोर

इन मेडिकल स्टोर संचालक के पास फार्मासिस्ट की डिग्री नहीं

ब्यूरो चीफ विपुल मिश्रा
जगदलपुर: मामला है बस्तर संभाग का जहाँ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की सह पर जिले में बहोत से मेडिकल स्टोर फर्जी चलाए जा रहे हैं। इन मेडिकल स्टोर संचालक के पास फार्मासिस्ट की डिग्री नहीं है फिर भी वह किराये की डिग्री से अपने इस गोरखधंधे को वर्षों से संचालित कर जिले के उपभोक्ताओं के जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में बेहतर सुधार के लिए जहां प्रदेश सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं वहीं विभाग के मातहत अधिकारी अपने निजी स्वार्थों के चलते इन व्यवस्थाओं पर पलीता लगा रहे हैं।

विभागीय सूत्रों की मानें तो एबीसी कैडर के खोले जाने वाले मेडिकल स्टोर में जहां मेडिकल हाल खोले जाने के लिए भले ही लाइसेंस की जरूरत नहीं होती परंतु मेडिकल स्टोर के लिए फार्मासिस्ट का लाइसेंस होना जरूरी है। ऐसे में फार्मासिस्ट की डिग्री लेकर निकले छात्र दो तरह से इस्तेमाल करते हैं।

निजी कम्पनियों में नौकरी मिल जाने के बाद वह अपनी इस डिग्री को किराये में देकर जहां दोहरा लाभ ले रहे हैं वहीं मेडिकल स्टोर संचालकों को दवाइयों की बेहतर जानकारी न होने की वजह से उपभोक्ताओं के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है।

ऐसा भी नहीं है कि स्वास्थ्य महकमे को इन फर्जी मेडिकल स्टोर की जानकारी नहीं है। कई बार इस संबंध में नाम की कार्यवाही की गई परंतु ऐसा कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया जिससे फर्जी मेडिकल स्टोर्स पर लगाम लगाई जा सके। 

इन पर्चियों पर खपती है दवा

बस्तर संभाग व आसपास ग्रामीण कस्बों में खोले गए मेडिकल स्टोर्स में खपने वाली दवाइयां झोलाछाप चिकित्सकों की पर्ची से मानी जाती है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा शासकीय अस्पतालों में नि:शुल्क दवाइयों की व्यवस्था की गई है। बावजूद इसके सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र वाले कस्बों में दर्जनों की संख्या में संचालित फर्जी मेडिकल स्टोरों से लाखों रुपये की दवाई खप रही है।

शासन द्वारा नि:शुल्क किए गए दवाइयों के बाद कोई भी सरकारी चिकित्सक प्राइवेट दुकानों से दवा के लिए सलाह नहीं देता। ऐसे में लाखों रुपये की दवाइयां मेडिकल स्टोरों से खपना यह साबित करता है कि कस्बाई इलाकों में फैले झोलाछाप डॉक्टरों की पर्चियों के सहारे दवाइयों की बिक्री हो रही है।

दवाइयों की नहीं है पर्याप्त जानकारी

किराये की डिग्री पर खोले गए मेडिकल स्टोर संचालकों को दवाइयों की जानकारी पर्याप्त नहीं है। चिकित्सकों की पर्ची में लिखी गई दवाइयों को भले वह अच्छी तरह से न पढ़ सकें परंतु अपनी दवाइयां बिक्री करने के लिए उपभोक्ताओं को गलत दवाइयां तक उपलब्ध करा रहे हैं। यही वजह है कि गलत दवाइयों के चलते ग्रामीण इलाकों में मृत्यु का ग्राफ सबसे ज्यादा है।

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