छत्तीसगढ़

बाढ़ एवं आपदाओं के नियंत्रण तथा बचाव उपायों के संबंध में हुई बैठक

राजनांदगांव ।

जिला प्रशासन द्वारा आगामी वर्षा ऋतु में अतिवृष्टि तथा बाढ़ की स्थिति से निपटने एवं आम नागरिकों को तत्काल राहत पहुंचाने हेतु सभी तैयारियां सुनिश्चित की जा रही है। कलेक्टर भीम सिंह के निर्देशानुसार 12 जून को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आगामी वर्षाकाल में संभावित अतिवृष्टि एवं बाढ़ से होने वाली आपदाओं के नियंत्रण एवं बचाव राहत उपायों के संबंध में बैठक आयोजित की गई।

बैठक में अपर कलेक्टर जेके धु्रव एवं ओंकार यदु, आयुक्त नगर निगम अश्वनी देवांगन सहित जिले के सभी राजस्व अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदारों के अलावा राजस्व एवं संबंधित विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।

बैठक में अधिकारियों को पूरे समय मुस्तैद रहने, अतिवृष्टि एवं बाढ़ की स्थिति में आपदाओं के नियंत्रण, बचाव तथा राहत आदि की सभी उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गये हैं।

इसके अलावा अतिवृष्टि एवं बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर इन क्षेत्रों के ग्रामों में खाद्यान्न, मिट्टी तेल, दवाईयां आदि सभी आवश्यक चीजों का भण्डारण करने के अलावा गोताखोर, जाल आदि आवश्यक उपकरणों की प्रबंध करने के निर्देश दिए गये हैं। राजस्व एवं सभी संबंधित विभाग के अधिकारियों को नियंत्रण, बचाव एवं राहत उपायों की सभी उपायों को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गये हैं।

बैठक में अतिवृष्टि एवं बाढ़ की स्थिति में उत्पन्न किसी भी प्रकार की समस्या से निपटने की तैयारियों के संबंध में विस्तृत समीक्षा की गई। राजस्व अधिकारियों को जिला, अनुविभाग एवं तहसील स्तर पर स्थापित नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे निरंतर क्रियाशील रखने के निर्देश दिए गया।

इसके अलावा नियंत्रण कक्ष में अधिकारी-कर्मचारियों की शिफ्टवाइज ड्यूटी लगाने तथा जन सामान्य की जानकारी हेतु नियंत्रण कक्ष का दूरभाष क्रमांक को सार्वजनिक करने को कहा गया।

अधिकारियों को बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर तहसील एवं विकासखंडवार सूची तैयार करने के निर्देश दिए गये है। इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों को मजमूली नक्शे में चिन्हांकित करने को कहा गया। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों के निकटतम पुलिस चौकी, अस्पताल, पंचायत एवं स्कूल भवन इत्यादि को चिन्हांकित करने के निर्देश दिए गये हैं। संवदेनशील क्षेत्रों में आवश्यक मात्रा में जीवन रक्षक तथा जल जनित रोग निरोधक दवाईयां, खाद्यान्न तथा केरोसिन, पशुचारा आदि सभी आवश्यक चीजों का अनिवार्य रूप से भंडारण कराने को कहा गया है।

बैठक में अधिकारियों को बाढ़ आदि की स्थिति निर्मित होने पर राहत शिविर के रूप में आपदा प्रभावितों को अस्थाई ठहराने की वैकल्पिक व्यवस्था के संबंध में चर्चा की गई। इसके लिए इन क्षेत्रों के शाला भवनों एवं सामुदायिक भवनों को चिन्हांकित करने के निर्देश दिए गये। बैठक में संवेदनशील क्षेत्रों के नदी-नालों पर स्थित पुल-पुलिया तथा रपटों की स्थिति एवं दूर संचार एवं विद्युत व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। वर्षाकाल में शुद्ध पेयजल आपूर्ति की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित विभाग के अधिकारियों को दिए गये।

बैठक में बताया गया कि वर्षाकाल में अधिकारी-कर्मचारियों का नियत मुख्यालय में रहना आवश्यक है। किसी भी विभाग के मैदानी एवं कार्यालयीन अधिकारी-कर्मचारियों को संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की पूर्व अनुमति के बिना अवकाश पर जाने एवं मुख्यालय छोडऩे की अनुमति नहीं होगी।

बैठक में बताया गया कि इस दौरान प्राकृतिक आपदा से क्षति होने पर क्षति का आंकलन कर आपदा प्रभावितों को सहायता अनुदान का भुगतान सामान्य 24 घंटे एवं विशेष परिस्थिति में तीन दिवस के भीतर करना अनिवार्य है। बैठक में राजस्व विभाग के अलावा जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्वास्थ्य, होमगार्ड, नगरीय प्रशासन आदि सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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बाढ़ एवं आपदाओं के नियंत्रण तथा बचाव उपायों के संबंध में हुई बैठक
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