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पुरुष हॉकी विश्व कप 2018: आज भारत का मुकाबला बेल्जियम से, भारत को रहना होगा सतर्क

आठ ओलिंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाला भारत विश्व कप में सिर्फ एक बार 1975 में चैंपियन बना है।

अशोक ध्यानंचद भारतीय टीम ने मनप्रीत सिंह की अगुआई में हॉकी विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका को एकतरफा मुकाबले में 5-0 हराकर शानदार शुरुआत की थी, लेकिन उसे अतिआत्मविश्वास से बचना होगा।

हरेंद्र सिंह की कोचिंग वाली टीम के आगे रविवार को बेल्जियम की मजबूत चुनौती होगी, जो इस समय दुनिया की तीसरे नंबर की टीम है।

ऐसे में पांचवें नंबर की टीम भारत के लिए यह मैच उसके लिए टूर्नामेंट में आगे के सफर की राह तय करेगा। आठ ओलिंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाला भारत विश्व कप में सिर्फ एक बार 1975 में चैंपियन बना है।

उसके बाद से चार दशक से ज्यादा का समय बीत गया, लेकिन भारत कभी सेमीफाइनल में भी नहीं पहुंच सका। भारत के लिए बेल्जियम को हराना आसान नहीं होगा, लेकिन सभी विभागों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।

भारत को रहना होगा सतर्क :

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मंदीप सिंह, सिमरनजीत सिंह, आकाशदीप सिंह और ललित उपाध्याय ने फॉरवर्ड पंक्ति में उम्दा प्रदर्शन किया। सिमरनजीत ने दो गोल किए, जबकि बाकी तीनों स्ट्राइकर ने 1-1 गोल दागा।

मनप्रीत की अगुआई में मिडफील्ड और डिफेंस का प्रदर्शन भी अच्छा रहा, लेकिन डिफेंडर हरमनप्रीत सिंह, बीरेंद्र लाकड़ा, सुरेंदर कुमार और गोलकीपर पीआर श्रीजेश को आक्रामक बेल्जियम के खिलाफ हर पल सतर्क रहना होगा।

भारत को बेल्यिजम को खुलकर नहीं खेलने देना होगा और मैन टू मैन मार्किंग की रणनीति अपनानी होगी। भारतीय फॉरवर्ड और मिडफील्ड के बीच तालमेल बेहतर होना चाहिए।

मजबूती से उभरी बेल्जियम :

बेल्जियम पिछले एक दशक में विश्व हॉकी में मजबूती से उभरकर सामने आई है। हालांकि, उसने कोई बड़ा खिताब तो नहीं जीता, लेकिन वह शीर्ष टीमों में शामिल है। रि

यो ओलिंपिक की रजत पदक विजेता बेल्जियम ने कनाडा को 2-1 से हराकर टूर्नामेंट में विजयी शुरुआत की, लेकिन वह अपनी प्रतिष्ठा के अनुसार प्रदर्शन करने में नाकाम रही।

भारत पर हावी बेल्जियम :

बेल्जियम का रिकॉर्ड भारत के खिलाफ अच्छा रहा है, लेकिन मैदान पर उतरने के बाद पिछला इतिहास मायने नहीं रखता है। भारत और बेल्जियम की टीमें पिछली बार नीदरलैंड्स में चैंपियंस ट्रॉफी में आमने-सामने हुई थीं। वह मुकाबला 1-1 से बराबरी पर खत्म हुआ था।

दोनों की समस्या पेनल्टी कॉर्नर :

पेनल्टी कॉर्नर दोनों टीमों के लिए परेशानी साबित हुआ है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारतीय टीम को पांच पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन वह एक को ही गोल में बदलने में सफल रही।

वहीं, बेल्जियम ने कनाडा के खिलाफ दो पेनल्टी कॉर्नर गंवाए। जिस तरह के प्रयोग भारत ने पेनल्टी कॉर्नर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ किए, उसे बेल्जियम के खिलाफ वैसे प्रयोग करने से बचना होगा।<>

 

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