वोटर्स से कनेक्ट होने में जुटे विधायकी खोनेवाले आप लीडर्स

'लाभ के पद' मामले में चुनाव आयोग की तरफ से आम आदमी पार्टी (AAP) के 20 एमएलए की विधायकी खारिज किए जाने के बाद अगले छह महीनों में उनकी सीटों पर उपचुनाव होने की संभावना बनी है।

नई दिल्ली: ‘लाभ के पद’ मामले में चुनाव आयोग की तरफ से आम आदमी पार्टी (AAP) के 20 एमएलए की विधायकी खारिज किए जाने के बाद अगले छह महीनों में उनकी सीटों पर उपचुनाव होने की संभावना बनी है।

ऐसे में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली AAP 70 सदस्यों वाली दिल्ली विधानसभा में 66 सीटों की अपनी पुरानी स्थिति वापस हासिल करने की कोशिश में जुट गई है। पार्टी लीडरशिप अभी चुप्पी साधे हुए है और उपचुनाव रोकने को लेकर उसकी उम्मीदें दिल्ली हाई कोर्ट पर टिकी हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 24 जनवरी को चुनाव आयोग के नाम ऑर्डर जारी किया था कि वह इस मामले में जल्दबाजी में कोई कार्रवाई ना करे और उसने 29 जनवरी को मामले की सुनवाई शुरू होने तक उपचुनाव की तारीखों का ऐलान करने पर रोक लगा दी थी।

हालांकि पार्टी सूत्रों ने बताया कि लीडरशिप ने उपचुनाव की संभावना को खारिज नहीं किया है और अयोग्य करार दिए गए विधायकों को उपचुनाव होने की सूरत में मतदाताओं से कनेक्ट होने के लिए कहा है।

आम आदमी पार्टी लीडरशिप की नजर उपचुनाव रोकने की उम्मीदें दिल्ली हाई कोर्ट पर टिकी है जो विधायकों की अयोग्यता को चुनौती देनेवाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने 20 जनवरी को विधायकों की आपात बैठक बुलाई थी, अयोग्य करार दिए गए विधायकों के प्रदर्शन का पता करने के लिए आंतरिक सर्वेक्षण भी करा रही है।

पार्टी मुख्यमंत्री केजरीवाल को अपने मंत्रिमंडल को लेकर भी कुछ फैसले करने होंगे क्योंकि उनके ट्रांसपॉर्ट मिनिस्टर और अहम सहयोगी कैलाश गहलोत भी अयोग्य करार दिए गए हैं।

विधायकों की बुलाई गई आपात बैठक

केजरीवाल ने अगले कदम पर चर्चा के लिए 20 जनवरी को सभी विधायकों की आपात बैठक बुलाई थी। पार्टी अयोग्य करार दिए गए विधायकों के अपने इलाके में प्रदर्शन का पता करने के लिए आंतरिक सर्वेक्षण भी करा रही है।

मुख्यमंत्री केजरीवाल को अपने मंत्रिमंडल को लेकर भी कुछ फैसले करने होंगे क्योंकि उनके ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर और अहम सहयोगी कैलाश गहलोत भी अयोग्य करार दिए गए हैं। हाईकोर्ट का ऑर्डर पक्ष में नहीं आया तो उनको इस्तीफा देना पड़ सकता है। ईटी ने आप के सामने बनी अहम चुनौतियों पर एक नजर डाली है।

नगर निकाय चुनाव में खराब प्रदर्शन

लाभ के पद मामले में जो 20 असेंबली सीटें खाली होंगी, उनके दायरे में 76 म्युनिसिपल वॉर्ड आते हैं और टोटल विधानसभा के दायरे में आनेवाले वॉर्ड में दो तिहाई पर बीजेपी का कब्जा है। 2015 में असेंबली इलेक्शंस में शानदार प्रदर्शन करने वाली आप का ज्यादातर मतदाता झुग्गी क्लस्टर और लगभग 200 अनाधिकृत कॉलोनियों में रहता है।

पार्टी ने चुनावी मोड में आते हुए विधानसभा क्षेत्रों में छोटी-छोटी जनसभा करते हुए घर-घर जाने का अभियान चालू कर दिया है। चांदनी चौक से अयोग्य करार दी गईं अलका लांबा और बुराड़ी के विधायक संजीव झा ने गणतंत्र दिवस के मौके पर संबोधन के अलावा छोटी पंचायतों को संबोधित करने साथ पदयात्राएं शुरू कर दी हैं।

विधायकों को अयोग्य ठहराने की चुनाव आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रपति की मुहर लगने के कुछ घंटों के भीतर ही केजरीवाल ने ट्वीट करके समर्थकों को शांति बनाए रखते हुए सच पर कायम रहने के लिए कहा।

उन्होंने कहा कि 67 सीटों पर जीत हासिल कर प्रचंड बहुमत हासिल किया था और अब 20 की विधायकी जाने के बावजूद पार्टी एकजुट है। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के जाने के बाद 2016 में कुछ गुटबाजी की खबरें आई थीं, जब पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर खुलेआम भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।

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