छत्तीसगढ़

लाखों का अवैध सागौन चिरान जब्त, लकड़ी चोरों में मचा हड़कम्प

प्रकाश यादव

बलौदाबाजार।

कसडोल उपवनमंडल के अंतर्गत अर्जुनी परिक्षेत्र के ग्राम खैरा में पांच लोगों के घर एक साथ छापा मारकर भारी मात्रा में सागौन चिरान एवं लट्ठे तथा अन्य प्रजाति के काष्ठ जब्त किया गया। जबत किए गए सागौन एवं अन्य प्रजाति के काष्ट का चिरान हाथ आरा से किया गया है, जो कि वन अधिनियम के ठीक विपरीत है।

साथ ही बिहारी वल्द लिलाम्बर अघरिया के घर से खराद मशीन भी जप्त किया गया है। जिसके पास से कोई भी अनुज्ञप्ति या अनुमति नही हैं।

उनके द्वारा खराद मशीन से काष्ठ सामग्री तैयार कर बेचे जाने की भी जानकारी मिली एवं पलंग खराद किया हुआ मिला जिसे मौके पर ही जब्त किया गया। जप्त वनोपज की अनुमानित कीमत लगभग 358000.00 रूपये आंकी जा रही है।

यह रहे आरोपी

बिहारी वल्द लिलाम्बर अघरिया, ग्राम खैरा, के घर से सागौन चिरान 116 नग = 1.072 घ.मी. एवं कसही चिरान 23 नग = 0.142 घ.मी., घनश्याम वल्द रामप्रसाद अघरिया ग्राम खैरा, सागौन चिरान 53 नग = 0.363 घ.मी. एवं नीम एवं साल चिरान = 0.014 घ.मी., भगऊ वल्द भिखारी सतनामी ग्राम खैरा, सागौन चिरान 32 नग = 0.294 घ.मी., शोभाराम वल्द कृपाराम यादव ग्राम खैरा, सागौन चिरान 82 नग = 0.359 घ.मी., सिरशोभन वल्द कृपाराम यादव ग्राम खैरा, सागौन चिरान 35 नग = 0.382 घ.मी. जप्त किया गया।

यह रहे मौजूद

कार्यवाही के दौरान परिक्षेत्र अधिकारी अर्जुनी टी.आर. वर्मा के द्वारा जप्ती की सम्पूर्ण कार्यवाही अपने समक्ष कराया गया। उपरोक्त कार्यवाही में स.प.अ.अर्जुनी लक्ष्मीप्रसाद श्रीवास्तव, स.प.अ. थरगांव सुरेशकुमार पाणिग्रही, स.प.अ. महराजी सुखराम छात्रे, स.प.अ. गिण्डोला संतोष चैहान, संतराम ठाकुर, रविन्द्रकुमार पाण्डेय, प्रेमचन्द्र घृतलहरे, धरमसिंग बरिहा, गोविन्दराम निषाद, खगेश्वर धु्रव, प्रवीण कुमार आडिले, चन्द्रभुवन मनहरे, तृप्तिकुमार जायसवाल, राजेश्वर प्रसाद वर्मा, नरोत्तम पैंकरा, गिरजाप्रसाद कैवत्र्य, कृष्णकुमार कुशवाहा एवं देवपुर परिक्षेत्र के कर्मचारियों का सहयोग प्राप्त किया गया।

वन अधिनियम के तहत हुई कार्रवाई

उक्त वन अपराध में लिप्त अपराधियों के विरूद्ध भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26(च), छत्तीसगढ़ काष्ट चिरान (विनियमन) अधिनियम 1984 एवं छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान (विनियमन) संशोधन अधिनियम 2000 एवं छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान (विनियमन) नियम 1984, छत्तीसगढ़ वनोपज व्यापार (विनियमन) अधिनियम 1969 एवं छत्तीसगढ़ वनोपज व्यापार (विनियमन) काष्ट नियम 1973 के अंतर्गत कार्यवाही की गई। वही प्रकरण की सुक्ष्मता से जांच की जा रही है। जिससे भविष्य में हाथ आरा से चिरान करने वाले अन्य अपराधियों का भी खुलाशा हो वही उन्हे दण्डित किया जा सकें।

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