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विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने कहा ‘मुआवजा देना बिस्किट बांटने जैसा नहीं’

इराक से 38 भारतीय मजदूर का शव लेकर भारत हुंचे विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह एक बार फिर से विवादों का हिस्सा बन गए हैं | वीके सिंह कहना है कि मृतकों के परिवारों को मुआवजा देना बिस्किट बांटने वाला काम नहीं है | कांग्रेस ने उनके इस बयान को पीड़ितों के घाव पर नमक छिड़कने जैसा बताया है.

इराक: इराक से 38 भारतीय मजदूर का शव लेकर भारत हुंचे विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह एक बार फिर से विवादों का हिस्सा बन गए हैं | वीके सिंह कहना है कि मृतकों के परिवारों को मुआवजा देना बिस्किट बांटने वाला काम नहीं है | कांग्रेस ने उनके इस बयान को पीड़ितों के घाव पर नमक छिड़कने जैसा बताया है.

उन्होंने बताया कि आतंकवादी समूहों ने 40 में से 39 भारतीयों की हत्या कर दी थी जबकि उनमें से एक खुद को बांग्लादेशी बताकर बच गया था. मारे गए लोगों में से एक के शव की अभी तक स्पष्ट रूप से पहचान नहीं हो पाई है.

सोमवार को वीके सिंह इराक से एक विशेष विमान (C-17 ट्रांसपोर्ट प्लेन) से 38 भारतीयों का शव लेकर अमृतसर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचे. एयरपोर्ट से बाहर निकलकर सिंह ने मीडिया से बातचीत की.

उन्होंने कहा कि इराक में आतंकवादी समूह आईएसआईएस द्वारा बंधक बनाए गए 40 भारतीयों का कोई भी रिकॉर्ड किसी दूतावास में नहीं है, क्योंकि वे वहां ट्रैवल एजेंट के माध्यम से अवैध रूप से गए थे.

‘मुआवजा बिस्किट बांटने जैसा काम नहीं’

इसी दौरान उनसे मृतकों को मुआवजा देने को लेकर सवाल किया गया, जिसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘ये बिस्किट बांटने वाला काम नहीं है, ये आदमियों की जिंदगी का सवाल है. आ गई बात समझ में? मैं अभी ऐलान कहां से करूं? जेब में कोई पिटारा थोड़ी रखा हुआ है.’

‘नौकरी देना फुटबॉल का खेल नहीं’

सिंह यहीं नहीं रुके, बल्कि मृतकों के परिवारों को नौकरी देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये फुटबॉल का खेल नहीं है. उनकी बयानबाजी पर कांग्रेस ने हमला बोला है. कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग को न सिर्फ खारिज किया बल्कि इस मांग को बिस्किट बांटने से तुलना करके मृतकों के परिवारों को घावों पर नमक रगड़ने का काम किया है.

हालांकि, मारे गए लोगों के परिजन की तरफ से नौकरी की मांग किए जाने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि विदेश मंत्रालय ने मारे गए लोगों के परिजन से कहा है कि नौकरी के योग्य लोगों का ब्यौरा सौंपें.

वीके सिंह ने कहा, ‘विदेश मंत्रालय ने 2014 में एक अभियान की शुरुआत की थी जिसमें हमने कहा था कि किसी को अवैध एजेंट के माध्यम से बाहर नहीं जाना चाहिए. किसी भी दूतावास में इन 40 लोगों का रिकॉर्ड नहीं है. वे अवैध एजेंट के माध्यम से वहां गए थे. जब आप अवैध एजेंट के माध्यम से जाते हैं तो आप कहां जाते हैं, इसका पता लगाना कठिन हो जाता है.’

‘सूचना होती तो बचाने का प्रयास किया जाता’

मंत्री ने कहा कि अगर सरकार के पास इन लोगों के बारे में कोई भी सूचना होती तो उन्हें बचाने का प्रयास किया जाता. उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकारों को मिलकर सुनिश्चित करना चाहिए कि भोले भाले लोग अवैध ट्रैवल एजेंट का शिकार नहीं बनें.

उन्होंने कहा, ‘हमने हर राज्य से कहा है कि कानून- व्यवस्था की जिम्मेदारी उनकी है और उन्हें अपने राज्यों में अवैध एजेंटों को पकड़ना चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए. इस दिशा में राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर काम करना चाहिए. हम नहीं चाहते कि कोई अवैध रूप से विदेश जाए. हम चाहते हैं कि लोग वैध रूप से विदेश जाएं ताकि उनके रिकॉर्ड हमारे पास हों.’

पंजाब सरकार देगी 5-5 लाख रुपए

पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि राज्य सरकार मारे गए लोगों के परिजन को 5-5 लाख रुपये प्रदान करेगी. उन्होंने कहा कि इसके अलावा हर परिवार में एक व्यक्ति को योग्यता के मुताबिक नौकरी दी जाएगी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इराक में मारे गए लोगों के परिवार को 20 हजार रुपये प्रति माह दे रही थी. सिद्धू ने कहा कि अवैध ट्रैवल एजेंट के मुद्दे पर कैबिनेट चर्चा करेगी.

ताबूत को नहीं खोलने की सलाह

एक सवाल के जवाब में वीके सिंह ने कहा कि इराक के मार्टेयर फाउंडेशन ने ताबूत को नहीं खोलने की सलाह दी थी. सिंह ने कहा, ‘मार्टेयर फाउंडेशन ने कहा है कि जिस तरह के जहरीले पदार्थ (जहां से अवशेष निकाले गए) पाए गए और जिस तरीके से यह सब (शवों के लेपन) किया गया, जब आप इस ताबूत को खोलेंगे तो इससे काफी खतरा है और इसलिए उन्होंने कहा कि इसे नहीं खोलना बेहतर है.’

बहरहाल, सिद्धू ने कहा कि शवों को उनके घरों तक ले जाना प्रशासन की जिम्मेदारी है. सिद्धू ने कहा, ‘वे (परिवार के सदस्य) इसके साथ (शवों) जो चाहे कर सकते हैं. यह उनकी इच्छा है.’ परिवार के सदस्यों ने पहले दावा किया था कि प्रशासन ने उनसे कहा है कि वे ताबूतों को नहीं खोलें.

कैसे हुई भारतीयों की मौत?

यह पूछने पर कि उनकी हत्या कैसे हुई तो सिंह ने बताया, ‘जब परीक्षण किया गया (अवशेषों का) तो पता चला कि कुछ लोगों की गोली मारकर हत्या की गई थी जबकि कुछ मामलों में यह बताना कठिन है कि उनकी हत्या कैसे हुई थी’ उन्होंने कहा कि यह भी पता लगाना मुश्किल है कि उनकी हत्या कब हुई थी. उन्होंने कहा, ‘लेकिन हमें बताया गया कि करीब एक वर्ष पहले उनकी हत्या की गई होगी.’

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