मंत्री शिव डहरिया ने आदिवासियों की स्वरोजगार की बात की तो भाजपा के पेट में दर्द क्यों?

रायपुर: भाजपा के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मंत्री डॉ शिव कुमार डहरिया ने आदिवासियों की स्वरोजगार की बात की तो भाजपा के पेट में दर्द क्यों हो रहा है? भाजपा ने तो 15 साल तक आदिवासियों का शोषण ही किया? भाजपा बताये 15 साल में कितने आदिवासियों को आईएएस आईपीएस बनाये? पूर्व रमन सरकार ने तो अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ा वर्ग सहित छत्तीसगढ़ के पढ़े-लिखे युवाओं को शासकीय नौकरी से वंचित रखा और आउटसोर्सिंग के माध्यम से दूसरे राज्यो से भर्ती की? भाजपा को आज आदिवासी युवाओं के चिंता हो रही है जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की नेतृत्व वाली सरकार अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ा वर्ग सहित सभी वर्गों के लिए 15,000 से अधिक पदों पर शासकीय भर्ती की प्रक्रिया शुरू की है। पूर्व की भाजपा शासनकाल में जोर जबरदस्ती ग्राम सभा के अधिकारों को दरकिनार कर आदिवासियों से उनकी जमीन छीनी गई थी।

धनंजय सिंह ठाकुर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार आदिवासियों को उनकी जमीन लौट आई है। पूर्व की रमन सरकार के दौरान सारकेगुड़ा, पेद्दागेलूर, झलियामारी, आमागुड़ा जैसी घटनाओं से आदिवासियों का अपमान और शोषण हुआ तब भाजपा को आदिवासियों की चिंता नहीं हुई? आदिवासियों के चरण पादुका में कमीशन खोरी भ्रष्टाचार करने वाली भाजपा को आज आदिवसियों की याद आ रही है, जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार आदिवासियों को चरण पादुका खरीदने नगद राशि दे रही है तेंदूपत्ता का मानक दर 2500 से बढ़ाकर 4 हजार प्रति बोरा किया 15 वनोपज को समर्थन मूल्य में खरीदी तय कि। छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी हैं जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अनुसूचित जाति जनजाति के बीच जा कर चौपाल लगाये आदिवासी वर्ग की समस्याओं को सुने और निराकरण किये।

धनंजय सिंह ठाकुर आदिवासी बालिकाओं को पायलट बनने का सपना दिखाकर उनके सपने को चूर चूर करने वाली भाजपा को आज आदिवासियों को चिंता हो रही है। आदिवासी युवाओ को कौशल प्रशिक्षण देने के नाम से बाहर भेजकर बंधक बनाने वालो के साथ खड़ी भाजपा को आज आदिवासियों की चिंता हो रही है। जब आदिवासियों की सुरक्षा स्वरोजगार शिक्षा स्वास्थ्य पर काम करने वाली कांग्रेस की सरकार राज्य में है। आदिवासियों के अधिकारों में डाका डालने वाली भाजपा के मुंह से आदिवासियों की हित की बातें शोभा नहीं देती।

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