कोयला मंत्रालय, इस्‍तेमाल में नहीं आने वाली कोयला खानों के लिए एक सुनिश्चित नियमावली को अन्तिम रूप दे रहा है

कोयला मंत्रालय इस्‍तेमाल में नहीं आने वाली कोयला खानों को स्‍थायी रूप से बन्‍द करने के लिए एक सुनिश्चित नियमावली को अन्तिम रूप दे रहा है। इसमें न्‍यायोचित हस्‍तांतरण के सिद्धांतों के आधार पर तीन मुख्‍य पहलुओं यानी संस्‍थागत प्रशासन, व्‍यक्ति और जनसमुदाय के सरोकारों तथा भूमि के पर्यावरण अनुकूल पुन: इस्‍तेमाल पर बल दिया जायेगा। इस कार्यक्रम में सहयोग लेने के लिए मंत्रालय विश्‍व बैंक से बातचीत कर रहा है। कोयला मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि विभिन्‍न देशों में इन मामलों का गहन अनुभव होने के कारण विश्‍व बैंक के सहयोग से भारत में ऐसे मामलों के निपटारे में काफी सहायता मिलेगी। इस प्रक्रिया से संबंधित एक प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट वित्‍त मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेज दी गयी है। मंत्रालय का कहना है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय कोयला क्षेत्र, कोयले का उत्‍पादन बढ़ाने के लिए पूरा प्रयास कर रहा है।

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