अल्पसंख्यक इदारे सफेद हाथी के सामान – रिजवी

रायपुर: जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के मीडिया प्रमुख एवं अल्पसंख्यक आयोग के प्रथम अध्यक्ष इकबाल अहमद रिजवी ने कहा है कि प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक इदारे जैसे- अल्पसंख्यक आयोग, वक्फ बोर्ड, मदरसा बोर्ड, उर्दू अकादमी तथा हज कमेटी विगत 15 सालों से केवल औपचारिकता निभा रहे है। समाज के लिए इन सभी संस्थानो को कोई भी कारगर कदम उठाने की दिशा में सरकार द्वारा रोक दिया गया है। इनसे अल्पसंख्यक वर्ग को किसी भी तरह का लाभ प्राप्त नही हुआ है। राज्य मदरसा बोर्ड का छात्र संपर्क कार्यक्रम औचित्यहीन है। सभी इदारे सरकारी पैसों की इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से फिजूलखर्ची का जरिया बने हुये है। लब्बोलुबाब यह है कि सभी इदारे सरकार व प्रदेशवासियों के लिए सफेद हाथी के समान सिद्ध हो चुके है।

रिजवी ने कहा है कि सन्् 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने मदरसा बोर्ड के माध्यम से 473 उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति की थी। आचार संहिता के कारण उर्दू शिक्षको की चयनित सूची जारी नही हो सकी थी। उक्त उर्दू शिक्षकों की सूची 15 वर्ष व्यतीत होने के बावजूद जानबूझकर आज तक वर्तमान सरकार द्वारा जारी नही की गयी। मदरसा बोर्ड ने उक्त चयनित सूची जारी करने 15 वर्षो में शासन को स्मरण पत्र तक जारी नही किया गया जो मदरसा बोर्ड की मंशा पर प्रश्न चिन्ह लगाता है तथा सच्चाई यह है कि विगत 15 वर्षो से मदरसा बोर्ड द्वारा पास किये गये किसी भी छात्र को चपरासी के पद पर नियुक्ति तक प्रदान नही की गयी। ऐसे मदरसा बोर्ड में पढ़ने का कोई औचित्य नजर नही आ रहा है तथा जो प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक तिरस्कार को इंगित भी करता है।

रिजवी ने कहा है कि सन्् 2006 के भाजपा शासनकाल में हुए पिथौरा दंगे मे हुयी नुकसानी की शेष मुआवजा राशि मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह को बार-बार स्मरण दिलाने पर भी आज तक अप्राप्त है। उर्दू आकादमी दिखावा बनकर रह गयी है क्योकि सरकार ने उर्दू शिक्षको की नियुक्ति पर ऐसा आभाष होता है कि प्रतिबंध लगा दिया गया है। उर्दू शिक्षकों के अभाव में उर्दू भाषा का विकास असंभव है। आश्चर्य का विषय है कि उर्दू आकादमी के पदाधिकारी उर्दू भाषा से ही अनभिज्ञ है।

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड अपने क्रियाकलापों से बेमसरफ सिद्ध हो चुका है। विगत लगभग 12 वर्षो से वक्फ बोर्ड अस्तित्व में आ चुका है। इसके बावजूद प्रदेश की वक्फ सम्पत्ति का सर्वे, सीमांकन एवं बेजा कब्जा मुक्त करने की दिशा में वक्फ बोर्ड ने आज तक कोई कदम नही उठाया। प्रदेश की भाजपा सरकार ने अल्पसंख्यको को नौकरी एवं माली हालत को सुधारने की दिशा में कोई दिलचस्पी आज तक नही दिखायी जो भाजपा के सबका साथ-सबका विकास के जुमले को आईना दिखाने वाला शिगूफा सिद्ध होकर रह गया है।

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