धान खरीदी केंद्रों में गड़बड़ियां : छर्राटांगर के बाद डोंगरीपाली मे भी किसानो के हक पर डाका

एक के बाद एक सामने आने लगी धान खरीदी केंद्रों में गड़बड़ियां,छर्राटांगर के बाद डोंगरीपाली मे भी किसानो के हक पर डाका

हिमालय मुखर्जी ब्यूरो चीफ रायगढ़

बरमकेला विकाशखण्ड मे सेवा सहकारी समिति दुलोपाली के उपकेंद्र डोंगरीपाली मे किसान से प्रत्येक तौल में 500 ग्राम से 700 ग्राम से ज्यादा लिया जा रहा है धान।

रायगढ़ जिला प्रशासन की इतनी कढ़ाई के बाद भी धान खरीदी केंद्रों में एक के बाद एक गड़बड़ी की शिकायतें सामने आने लगी हैं । पिछले दिनों जहां सहकारी समिति छर्राटांगर में किसानों से तौल पीछे 500 से 800 ग्राम अधिक ध्यान देने की खबरें सुर्खियों में रही। वही इसी कड़ी में बरमकेला विकासखंड के सेवा सहकारी समिति दुलोपली के उपमण्डी  डोंगरीपाली धान खरीदी केंद्र में प्रत्येक तौल में 500 से 700 ग्राम धान किसानो से अधिक लेने का मामला सामने आया है।

● आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

धान खरीदी केंद्र में किसानों से अधिक धान लेने की जानकारी पर जब हमारे संवाददाता खबर संकलन करने धान खरीदी केंद्र डोंगरीपाली पहुंचे तो हमालो दवारा धान का तौल किया जा रहा था। तथा प्रबंधक ठीक उसी समय बरमकेला किसी काम से जा रहे थे। तत्पश्चात हमारे संवाददाता द्वारा सूचना के आधार पर धान खरीदी का निरीक्षण किया गया। इस दौरान नोडल अधिकारी के बारे में पूछे जाने पर पता चला वह भी उपस्थित नहीं थे। किंतु इन अधिकारियों की गैर उपस्थिति में भी कांटा किया जा रहा था। एवं किसानों से प्रत्येक तौल में 500 से 700 ग्राम. धान अधिक लिया जा रहा था।धान खरीदी केंद्रों में गड़बड़ियां : छर्राटांगर के बाद डोंगरीपाली मे भी किसानो के हक पर डाका

फिर हमारे संवाददाता ने फड़ प्रभारी से आग्रह किया की कैमरे के सामने धान को फिर से तौला जाये लेकिन भ्रष्टाचार की पोल खुल जाने के डर से फड़ प्रभारी ने तौल करने से मना करते हुए कहा कि जब तक प्रबंधक का आदेश नहीं देंगे तब तक मै धान नहीं तौलने दूंगा। यही बात जब हमारे संवाददाता द्वारा कैमरे के सामने कहने को कहा गया तो प्रभारी आग बबूला हो गये और कहा कि तुम्हें जो खबर छापिये धान की बोरियों को पुनः नहीं चला जाएगा। ऐसा कहते हुए उन्होंने तराजू में लगे हुए वार्ड को भी उतार कर नीचे रख दिया।

● जाने कैसे होती है धान खरीदी केन्द्रो मे किसानो से अवैध उगाही

किसान जब अपना धान खरीदी केंद्र में लेकर पहुंचता है तो वहां उसके धान को सरकारी बोरे में पलटी करके तौल करना होता है। इसके लिये शासन द्वारा हमाल रखने का प्रावधान है। जिसका भुगतान भी शासन द्वारा ही किया जाना होता है । लेकिन केंद्र प्रभारी किसानों या उनके आदमियों से ही पलटी करवा लेते हैं। और उनका भुगतान भी नहीं करते। कई केन्द्रों में जहां हमाल रखे गए हैं वहां हमाली का भुगतान किसानों से करवाया जाता है,जो पूर्णतः नियम विरुद्ध है।धान खरीदी केंद्रों में गड़बड़ियां : छर्राटांगर के बाद डोंगरीपाली मे भी किसानो के हक पर डाका

वस्तुत अधिकांश किसानों को शासन की इस व्यवस्था की जानकारी ही नहीं होती। इस मद के पैसे को ऊपर से नीचे तक बंदरबांट किया जाता है।रंग ,सुतली , सुआ का पैसा भी इसी में जुड़ा हुआ है। इसके अलावा खरीदी केंद्र की व्यवस्था हेतु भी बहुत पैसा आता है। इस पैसे को भी थूक पालिस करके हज़म कर लिया जाता है। सूखती के नाम पर 500 से 700 ग्राम तक लिया जा रहा है,जबकि सूखती लेने का कोई प्रावधान ही नहीं है।वास्तव में हर केंद्र में नमी मापने की मशीन होती है।

नमी वाला धान लेना ही नहीं है तो फिर सूखती किस बात का? सूखती के नाम पर लिया गया ये धान पूर्णतः केंद्र प्रभारी की अवैध कमाई होती है। जिसमे प्रबंधक व अन्य संचालक मंडल भी हिस्सेदार होते है। तथा धान की क्वालिटी ( गुणवत्ता ) को खराब बताकर भी किसानों से पैसा लिया जाता है। पैसा नहीं देने पर उस किसान का धान नहीं लिया जाता और पैसा देने पर वहीं धान गुणवत्तायुक्त हो जाता है। किसान डर के मारे पैसा देने को मजबूत हो जाता कि कहीं सामने वाला उसका धान रिजेक्ट ना कर दे।

● उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से संचालक मंडल के हौसले बुलंद

उच्च अधिकारी लगातार केन्द्रों का दौरा कर निरीक्षण करते रहते हैं। मगर पता नहीं ये क्या जांच करते है? पता नहीं इनके कान आंख होते भी हैं या नहीं? धान खरीदी में प्रति वर्ष करोडों की हेराफेरी की खबरें विभिन्न मीडिया प्लेटफार्म पर आती हैं ।लेकिन वही घटना पुनः दोहराई जाती है।धान खरीदी केंद्रों में गड़बड़ियां : छर्राटांगर के बाद डोंगरीपाली मे भी किसानो के हक पर डाका

ऐसी स्तिथि में यहां एक सवाल उठता है कि क्या वास्तव में अकेले किसी प्रबंधक या केंद्र प्रभारी की इतनी हिम्मत हो सकती है कि वह अपने स्तर से इतनी बड़ी हेराफेरी कर सके। एक नासमझ भी इसका जवाब वहीं देगा को कोई समझदार व्यक्ति देगा। हर रोज अधिकारी आते-जाते रहते हैं तथा शासन द्वारा कृषि विस्तार अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाकर खरीदी केंद्रों पर ड्यूटी लगाई गई है मगर फिर भी इतनी बड़ी हिमाकत कोई केंद्र प्रभारी कैसे करता है? सब कुछ आइने की तरह साफ है।

इसमें कहीं कोई संदेह नहीं है कि किसानों की अज्ञानता का लाभ उठाकर भ्रस्टाचार में उच्च अधिकारी भी शामिल हैं। ये अधिकारी बहरे ,गूंगे और अंधे बनकर आखिर कब तक मेहनतकश किसानों का हक डाका मारते रहेंगे ? प्रत्येक तौल पर 500 से 700 ग्राम अधिक तो पुरे फड़ मे कितना भ्रस्टाचार जा रहा है। इस तरह कार्यवाही ना करने से संचालक मंडल के हौसले बुलंद हैं ।

● आइये जानते हैं क्या कहते हैं फड़ प्रभारी

जब हमारे संवाददाता ने फड़ प्रभारी से पूछा की प्रत्येक टोल में 500 से 700 ग्राम ज्यादा धान लिया जा रहा है तो फिर प्रभारी ने भ्रष्टाचार की पोल खुलने के डर से कहां मैं तौल करने नहीं दूंगा जब तक प्रबंधक का आदेश नहीं आता या जब तक प्रबंधक मुझे फोन करके नहीं कहते तब तक मैं किस किसी भी बोरी को तौल करने नहीं दूंगा ।

● जाने क्या कहते हैं समिति प्रबंधक गोविंदराम चौधरी

किसानों से अधिक धान लिए जाने के संबंध में समिति प्रबंधक गोविंदराम चौधरी को दूरभाष पर संपर्क कर तौल पीछे किसानो से अधीक धान जाने के सम्बंध में पुछे जाने पर उन्होंने कहा कि मैं अभी बरमकेला के लिए निकल गया हूं बरमकेला में साहब लोग बुला रहे हैं। और फोन काट दिया गया जब फिर से समिति प्रबंधक को फोन लगाया गया तो प्रबंधक द्वारा जवाब दिया गया कि किसानों को कोई परेशानी नहीं है तो आप मीडिया वालों का क्या ? आपको जो छापना है छाप दो इतना कहकर उन्होने फिर से फोन काट दिया ।

● नोडाल अधिकारी रहे गायब,मोबाइल भी रहा स्विच ऑफ

फिर हमारे संवाददाता ने किसानों की सुविधा हेतु शासन द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी को संज्ञान में देने के लिए फड़ मे नोडल अधिकारी परसराम पटेल को फड़ मे ढूंढा गया तो नोडल अधिकारी अनुपस्थित पाये गये तथा उनके मोबाइल पर संपर्क करने पर फोन स्विच ऑफ मिला ।

● जाने किसानों की समस्याएं

जब से यह धान खरीदी शुरू हुई है तब से यह धान खरीदी जी का जंजाल बन गया है धान बेचने के लिए टोकन कटवाने के लिए बार-बार मंडी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं ले देकर धान मंडी तक पहुंच जाती है तो प्रबंधक, फड़ प्रभारी बारदाना नहीं है करके रोना रोते हैं। नोडल अधिकारी को समस्या बताने से नोडल अधिकारी भी अपने कर्तव्य के निर्वहन से पीछे भागते हैं।

कई मंडीयो में अवस्था का यह आलम है कि किसानों को खरीदी केन्द्र में मिलने वाली सुविधा जैसे- पीने का पानी, प्रतीक्षारत किसानों को आराम हेतु छांव का प्रबंध, शौचालय एवं अन्य मुलभुत व्यवस्था में भी कमिया देखी जा रही है।इस स्थिति में किसान करे तो क्या करें यदि किसान उच्च अधिकारियों को शिकायत करता है तो मंडी में किसान का धान लेने में नौटंकी हो जाती है। इस वजह से भी किसान खरीदी केंद्रों में की जा रही गड़बड़ झाली की शिकायत नहीं करता अब किसान करे तो करे क्या ?

● धान मण्डीयो मे बारदाने की कमी बना अधिकारियों का सिर दर्द

किसानों की धान खरीदी हेतु भार दाने की किल्लत किसी से छुपी नहीं है पूरे प्रदेश भर में मंडियों में बारदानों की कमी की वजह से समय पर किसानों का टोकन नहीं कर पा रहा है।

किसान प्रतिदिन धान मंडियों में धान बेचने चक्कर लगाने पर मजबूर हैं तथा खुले बाजार में भी वरदानी उपलब्ध नहीं है वही वरदान ओं के नाम पर भी लूट कसोट मची हुई है जहां किसानों को समिति द्वारा ₹15 के हिसाब से भुगतान दिया जाना है तो वही खुले मार्केट में कमी की वजह से 25 से ₹30 तक बार दाने का कीमत बढ़ा हुआ है ऐसे में प्रत्येक बोरी पीछे किसानों को ₹15 का नुकसान पहुंच रहा है ।

● क्या कहते है अनुविभागीय अधिकारी सारंगढ़ एसडीएम

जब हमारे द्वारा अनुविभागीय अधिकारी सारंगढ़ एसडीएम को फोन पर जानकारी दी गई कि डोंगरीपाली धान खरीदी केंद्र में किसानों से प्रत्येक तौल में 500 से 700 ग्राम तक अधिक धान लिया जा रहा है तो एसडीएम साहब ने कहा मैं अभी हाई कोर्ट में हूं मैं फूड इंस्पेक्टर को बोल रहा हूं मामले की जांच करने के लिए।

● जाने फूड इंस्पेक्टर का कथन

हमने फूड इंस्पेक्टर बरमकेला को फोन किया और पुरे मामले को उनके संज्ञान में दिया गया धान खरीदी केंद्र डोंगरीपाली में किसानों से प्रत्येक तौल पर 500 से 700 ग्राम तक किसानों से अधिक ध्यान दिया जा रहा है जिसकी जानकारी हमने एसडीएम साहब को दी है तो एसडीएम साहब ने कहा कि मैं अभी हाईकोर्ट में हूं फूड इंस्पेक्टर को जांच के लिए बोल दिया हूं तो क्या आप को सूचना मिली थी तब फूड इंस्पेक्टर ने कहा कि अभी तक मुझे कोई जानकारी नहीं है फिर हमारी टीम के एक सदस्य ने फड़ प्रभारी से फिर से आग्रह किया लेकिन फल प्रभारी ने जब तक प्रबंधक का आदेश नहीं आएगा या कोई फोन नहीं आएगा तब तक मै किसी को तौल नहीं करने दूंगा ।

● क्या कहते हैं सहकारिता विभाग के अधिकारी

हमने सहकारिता विभाग के अधिकारी को भी दूरभाष पर बताया कि डोंगरीपाली धान खरीदी केंद्र में किसानों से अधिक धान लिया जा रहा है तो सहकारिता विभाग के अधिकारी ने कहा चलिए ठीक है देखते हैं।

● क्या कहते हैं नायब तहसीलदार बरमकेला

हमरे द्वारा जब बरमकेला के नायब तहसीलदार मैडम को फोन पर डोंगरीपाली धान खरीदी केंद्र में चल रहे किसानों से प्रत्येक तौल में 500 से 700 ग्राम तक अधिक धान लेने के मामले से अवगत कराने पर नायब तहसीलदार मैडम ने कहा मैं खुद जाकर वहां मामले की जांच करूंगी तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बहरहाल धान खरीदी से जुड़े जिला प्रशासन के सभी जिम्मेदार अधिकारियों को हमारे द्वारा अवगत कराया गया। अब यह देखना लाजिमी होगा कि पूरे मामले की उच्च अधिकारियों को अवगत कराए जाने तथा खबर प्रकाशन के बाद किसानों के हक पर डाका डालने वाले समिति प्रबंधक,फड़ प्रभारी, नोडल अधिकारी पर क्या कार्यवाही की जाएगी या सिर्फ जांच के नाम पर लीपापोती करती है।

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