छत्तीसगढ़

कॉफी में क्लोरोफार्म मिलाकर पिलाया, बेहोशी के बाद कर दी हत्या

अंकित मिंज :

बिलासपुर। एक जनवरी को अगवा किए गए यातायात थाने में कंप्यूटर ऑपरेटर प्रभात चौक निवासी तरूण रातड़े (24) की हत्या कर दी गई। उसका शव बिलासपुर से 30 किमी दूर कोटा के एक गांव में गुरुवार को मिला।

पुलिस ने इस मामले में तरुण की सौतेली मां, उसके कथित पति सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त सामान भी बरामद कर लिया है।

खेत के मेढ़ से बरामद हुआ तरुण का शव

तरुण की मां राजकुमारी ने सरकंडा थाने पहुंचकर उसकी सौतेली मां बेबी और कथित पति बलाराम मांडले पर अपहरण का शक जताया था। इस पर पुलिस ने तरुण के मोबाइल को सर्विलांस पर डाला और मामले का खुलासा करते हुए बेबी, बालाराम सहित एक युवती और दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने कोटा के अमने गांव में खेत की मेढ़ के पास से शव बरामद कर लिया। आरोपियों ने गड्‌ढा खोद की दफना दिया था। फिलहाल पुलिस इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

क्लोरोफार्म सुंघाकर बेहोश किया, फिर गला दबाया

तरुण को युवती ने राजकिशोर नगर के किराए के घर में बुलाया और वहां उसे पीने के लिए कॉफी दी। कॉफी में क्लोरोफार्म मिलाया था। कॉफी पीने के बाद भी जब तरुण बेहोश नहीं हुआ तो उसे क्लोराफार्म सुंघाकर बेहोश किया। बेहोशी की हालत में ही तरुण की गला दबाकर हत्या कर दी गई।

आरोपियों को जब यकीन हो गया कि तरुण मर चुका है तो उन्होंने उसका मुंह टेप से बंद किया और हाथ-पैर लोहे के तार से बांधे और बाइक से कोटा ले गए। पुलिस की पकड़ में आई युवती ने क्लोरोफार्म की बोतल खरीदने के लिए स्वयं को बी-फार्मा की छात्रा बताया। मेडिकल स्टोर पर अपना आईडेंटी कार्ड भी रखा।

मोबाइल से मिले नंबर से गुत्थी सुलझी

पुलिस को तरुण रातड़े का मोबाइल नंबर की जांच कर रही थी कि 1 जनवरी को उसकी किस-किस से बात हुई है। इसी जांच में एक नंबर ऐसा भी था जिस पर बात तो खूब देर हुई थी लेकिन नाम नहीं था। इसी नंबर को आधार बनाकर पुलिस ने तरुण के अपहरण के मामले की जांच प्रारंभ की।

नंबर जांचा तो यह एक लड़की का निकला। सबसे पहले उस लड़की को ही पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की। लड़की ने पूछताछ में हत्या करना स्वीकार कर लिया और यह भी बताया कि घटना राजकिशोर नगर के एक मकान में की गई।

रेलवे ट्रैक पर मिली लाश से जुड़े तार

एक चर्चा ऐसी भी है कि मास्टर माइंड बेबी मांडले के भाई का शव छह महीने पहले रेलवे ट्रैक पर मिला था। मामले में पुलिस ने कोई ज्यादा कार्रवाई नहीं की थी। बेबी की सोच थी कि तरुण उसे पसंद नहीं करता। उसने ही इस मामले में पुलिस की कोई कार्यवाही नहीं होने दी क्योंकि वह पुलिस का डाटा ऑपरेटर है।

इसका बदला लेने के लिए बेबी मांडले ने तरुण के पिता शांतनु का छह माह पहले साथ छोड़ दिया था और राजकिशोर नगर में किराए का मकान लेकर बालाराम मांडले के साथ रहने लगी थी।

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