AAP विधायकों ने अयोग्यता रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में दी नई अर्जी

इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने की सिफारिश चुनाव आयोग ने की थी

AAP विधायकों ने अयोग्यता रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में दी नई अर्जी

लाभ के पद मामले में विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराए गए आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों ने मंगलवार को अयोग्यता रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में नई अर्जी दाखिल की। इससे पहले ‘आप’ के विधायकों ने दिल्ली हाई कोर्ट से अपनी वह अर्जी वापस ले ली थी। जिसमें उन्होंने खुद को अयोग्य ठहराने की चुनाव आयोग की सिफारिश पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने की सिफारिश चुनाव आयोग ने की थी। इसपर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी मुहर लगाई थी। दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले की बुधवार (24 जनवरी) को सुनवाई करेगा।

इन 20 विधायकों को अयोग्य करार दिया-
आदर्श शास्त्री (द्वारका)
अलका लांबा (चांदनी चौक)
अनिल बाजपेयी (गांधी नगर)
अवतार सिंह (कालकाजी)
कैलाश गहलोत (नजफगढ़)
मदन लाल (कस्तूरबा नगर)
मनोज कुमार (कोंडली)
नरेश यादव (महरौली)
नितिन त्यागी (लक्ष्मी नगर)
प्रवीण कुमार (जंगपुरा)
राजेश गुप्ता (वजीरपुर)
राजेश ऋषि (जनकपुरी)
संजीव झा (बुराड़ी)
सरिता सिंह (रोहतास नगर)
सोम दत्त (सदर बाजार)
शरद कुमार (नरेला)
शिव चरण गोयल (मोती नगर)
सुखबीर सिंह (मुंडका)
विजेंदर गर्ग (राजिंदर नगर)
जरनैल सिंह (तिलक नगर)

इन विधायकों ने कहा था कि उन्हें अयोग्य करार देने वाली अधिसूचना पर विचार-विमर्श करने के बाद वे कोर्ट में नई अर्जी दाखिल करेंगे। जज रेखा पल्ली ने विधायकों को अपनी अर्जी वापस लेने की इजाजत दे दी थी और इसे वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया था। ‘आप’ के एक विधायक की तरफ से पेश हुए वकील मनीष वशिष्ट ने कोर्ट को बताया था कि उन्हें अयोग्य करार देने के लिए चुनाव आयोग की ओर से राष्ट्रपति को की गई सिफारिश के खिलाफ दायर उनकी अर्जी अब अर्थहीन हो गई, क्योंकि इस बाबत एक अधिसूचना 20 जनवरी को जारी की जा चुकी है।

हाईकोर्ट ने 19 जनवरी को ‘आप’ के इन विधायकों को राहत देने के लिए कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया था। लाभ का पद संभालने के आरोप में चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति से इन विधायकों को अयोग्य ठहराने की सिफारिश की थी। राष्ट्रपति को भेजी गई अपनी राय में आयोग ने कहा था कि संसदीय सचिव के पद पर रहकर उन्होंने लाभ का पद संभाला और इसी वजह से वे दिल्ली विधानसभा के सदस्य के तौर पर अयोग्य करार दिए जाने लायक हैं।

वकील प्रशांत पटेल ने ‘आप’ के उन 20 विधायकों के खिलाफ चुनाव आयोग में अर्जी दायर की थी, जिन्हें दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने संसदीय सचिवों के पद पर नियुक्त किया था। रजौरी गार्डन से विधायक रहे जरनैल सिंह के खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए दिल्ली विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी थी। अपनी अर्जियों में उन्होंने चुनाव आयोग में चल रही कार्यवाही और इस बाबत आयोग की ओर से राष्ट्रपति से किए जाने वाले किसी संवाद पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। उन्होंने दलील दी थी कि मामले के गुण-दोष पर आयोग में कोई सुनवाई नहीं हुई थी और न ही याचिकाकर्ताओं को आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि शिकायतकर्ता प्रशांत पटेल की ओर से कोई साक्ष्य नहीं पेश किया गया था।

ये भी पढ़ें: सिसोदिया ने लिखा खुला खत, ‘मैं आपसे सीधे बात करना चाहता हूं मन दुःखी है पर…’

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूरी दी थी। आप के 20 विधायकों पर संसदीय सचिव के रूप में दोहरा लाभ लेने का आरोप है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद आप के इन 20 विधायकों की सदस्यता समाप्त हो गई। 20 विधायक अयोग्य ठहराए जाने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया था, ‘ऊपर वाले ने 67 सीट कुछ सोच कर ही दी थी। हर कदम पर ऊपर वाला आम आदमी पार्टी के साथ है, नहीं तो हमारी औकात ही क्या थी। बस सच्चाई का मार्ग मत छोड़ना।’

1
Back to top button