छत्तीसगढ़

मनरेगा को सामाजिक सरोकारों से और अधिक जोड़ने की जरूरत – अजय चन्द्राकर

एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला को मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित कर रहे थे

रायपुर : पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री अजय चन्द्राकर ने कहा कि मनरेगा को अब सामाजिक सरोकारों से और अधिक जोड़ने की जरूरत है। मनरेगा केवल रोजगार देने वाली योजना बनकर नहीं रहनी चाहिए। एक व्यापक सोच के साथ मनरेगा के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कार्य किए जाने चाहिए। चन्द्राकर आज यहां राज्य शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ में मनरेगा के माध्यम से बेहतर पर्यावरण के लिए हुए नये प्रयासों और प्रयोगों पर केन्द्रित एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला को मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित कर रहे थे।

चन्द्राकर ने कार्यशाला में मनरेगा के तहत प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण संरक्षण के लिए धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड तथा राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड के गांवों में किए गए कार्यों की तकनीकी जानकारी पर आधारित पुस्तिका का विमोचन भी किया। कार्यशाला में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सहायक परियोजना अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी, ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।

चन्द्राकर ने कहा कि बदलते दौर में देश-दुनिया के ज्वलंत मुद्दे भी बदल गए हैं। जलवायु परिवर्तन के बाद पर्यावरण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और उनके समुचित दोहन पर आज पूरी दुनिया चिंतित है। मनरेगा को इन्ही ज्वलंत मुद्दों के साथ जोड़कर हमें लोगों की आजीविका और प्रकृति को संवारने की दिशा में काम करना चाहिए। चन्द्राकर ने कहा कि मनरेगा के कार्यों में प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए प्राथमिकता से योजना बनानी पड़ेगी। चन्द्राकर ने कहा कि सामाजिक सरोकारों में शासकीय योजनाओं से अपेक्षित सफलता नही मिलती। इसके लिए जनभागीदारी की जरूरत है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि अब विकास की नई परिभाषा गढ़ने की का समय है। विकास की अवधारणा में नई सोच, नई दृष्टि और नई दिशा होनी चाहिए। मनरेगा में जनसुविधाओं के विकास के कार्य करने के अलावा पर्यावरण, प्रकृति और जल संरक्षण के लिए टिकाउ विकास होना चाहिए। यह केवल काम देने की योजना नही होनी चाहिए। इसके मूलस्वरूप में प्राकृतिक संसाधनों को बचाने पर ध्यान देना चाहिए।

इसके लिए जनभागीदारी सबसे जरूरी है। चन्द्राकर ने कहा कि मनरेगा मूलरूप में गांवों के विकास की योजना है। पंचायत प्रतिनिधि एक नई सोच के साथ आर्थिक और सामाजिक प्रभावों को जोड़कर अच्छे उद्देश्य से बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। जनप्रतिनिधियों को स्व-प्रेरणा से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की स्थायी अधोसंरचना विकसित करनी होगी।

राज्य शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आर.पी. मंडल ने अपने उद्बोधन में छत्तीसगढ़ में खेतों को हरा-भरा बनाने, ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने, सड़कों के विकास और सिंचाई क्षमता विकसित करने किए गए अलग तरह के प्रेरणादायक कार्यों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि आज नदियों, नालों और तालाबों को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। मंडल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बारिश का पर्याप्त पानी है।

अच्छी उपजाउ जमीन है। इसके बाद भी दिसंबर माह के बाद भी 80 प्रतिशत से अधिक खेती की जमीन सूखी रहती है। छत्तीसगढ़ में विकास की नई अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए सामुदायिक भागीदारी से जनहित के जज्बे के साथ कार्य करने की जरूरत है। मंडल ने बताया कि तीन माह पूर्व छत्तीसगढ़ प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण में देश में तीसरे स्थान पर था। राज्य सरकार के प्रयासों से अब छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर आ गया है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक आर.के. सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया परिवर्तन के नये दौर से गुजर रही है। जलवायु परिवर्तन के इस महत्वपूर्ण समय में जीने के लिए जरूरी हवा,पानी और भोजन को शुद्ध रखने की चुनौती हमारे सामने है। इसके लिए वृक्ष आधारित सूत्र ही ठीक है। छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों के मामले में धनी राज्य है। खनिज संसाधन, जल संसाधन और जैव विविधता छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपदा है। पर्यावरण संरक्षण के साथ समन्वित विकास होना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय बाजार व्यवस्था और जरूरत के आधार पर बड़े उद्योगों के लिए बड़ी सोच के साथ कार्य योजना बनाने की योजना है। सिंह ने कहा कि मनरेगा में जल संरक्षण, कृषि विकास, वन विकास को अधिक महत्व देना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी अधिक महत्वकांक्षी है, जो निश्चित आजीविका चाहती है। इसके लिए युवाओं का कौशल उन्नयन आवश्यक है।

जीआईजेड के प्रधान डायरेक्टर कोनराड ने कहा कि हमारी संस्था दुनिया के 100 से अधिक देशों में प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन पर कार्य कर रही है। केन्द्र सरकार की पर्यावरण मंत्रालय और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ इस दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए गए हैं। जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न स्थिति और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधन बनाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और बेहतर पर्यावरण के लिए मॉडल के रूप में सराहनीय कार्य किए गए हैं। ये कार्य देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा दायक है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव पी.सी. मिश्रा ने कहा कि मनरेगा में प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण संरक्षण के लिए छोटी-छोटी योजनाएं शुरू की गई हैं। इन योजनाओं से नये रास्ते निकल रहे हैं। भविष्य में इन रास्तों पर चलकर प्रकृति को बचाने में हमें जरूर सफलता मिलेगी। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार, स्वयंसेवी संस्थाएं और जीआईजेड के सहयोग से विकास को नये स्वरूप देने के प्रयास हुए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018-19 में पांच लाख लोगों को जोड़ने का कार्यक्रम बनाया गया है। यह कार्यक्रम जनसहभागिता से सामाजिक विकास का मुद्दा बनेगा।

एनआरएम के संचालक राजीव अहल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मनरेगा के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करने की शुरूआत 2013 से हुई है। यह भारत और जर्मन सरकार का संयुक्त प्रयास है। जर्मन सोसायटी फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जीआईजेड) के तहत देश के तीन राज्यों छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश और राजस्थान को लिया गया है। इन राज्यों के चुने हुए जिलों के चिन्हित गांवों में पर्यावरण संरक्षण के लिए नये-नये प्रयोग और प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के बहुत सुखद परिणाम प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि योजना के तहत धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के अनेक ग्राम पंचायतों में अतिक्रमित राजस्व भूमि पर अंत्योदय वाटिका, गोठान विकास और सहभागी सिंचाई प्रबंधन के बेहतरीन काम किए गए हैं। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकास के गांवों में डेªनेज लाइन ट्रीटमेंट के प्रभावी कार्य हुए हैं।

Tags

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.