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मोबाइल का अधिक इस्तेमाल बढ़ा सकता है तनाव और घबराह

मोबाइल आपके काम को आसान बना रहा है तो वहीं आपको तनाव की ओर धकेल रही है.

मोबाइल का अधिक इस्तेमाल बढ़ा सकता है तनाव और घबराहटः

मोबाइल आपके काम को आसान बना रहा है तो वहीं आपको तनाव की ओर धकेल रही है. जी हां, अगर आपके मोबाइल या सोशल मीडिया एकांउट पर किसी तरह का मैसेज या नोटिफिकेशन न आए या आपके फोन की बैटरी खत्म हो जाए, तो आपको लगने लगता है कि आपके आस-पास अब दुनिया थम गई है. आप जब तक अपने फोन को चार्जिंग पर लगाकर उसे चार्ज नहीं कर लेते आप उसी के बारे में सोचते रहते हैं. कई बार फोन की टेंशन के चलते लोग अकेला महसूस करने लगते हैं और डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं ये बात एक शोध में सामने आई है

आज के समय लगभग हर किसी के पास स्मार्ट फोन देखा जा सकता है. स्मार्ट फोन में इतने फीचर्स आ गए हैं कि लोगों का काम काफी हद तक आसान हो गया है. एक छोटे से मोबाइल में लगभग हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं. आप घर बैठे ही कई काम बड़ी आसानी से कर सकते हैं

आज के समय लगभग हर किसी के पास स्मार्ट फोन देखा जा सकता है. स्मार्ट फोन में इतने फीचर्स आ गए हैं कि लोगों का काम काफी हद तक आसान हो गया ह

फोन और कम्प्यूटर के अधिक इस्तेमाल से बचना चाहिए

मोबाइल में लगभग हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं

तनाव की बड़ी वजह मोबाइल का अधिक इस्तेमाल

स्मार्टफोन का अधिक यूज दुरुपयोग की तरह है

मोबाइल के इस्तेमाल से आपको हो सकता है ब्रेन ट्यूमर

सैन फ्रांसिस्को स्टेट यूनिवर्सिटी में हुए एक अध्ययन में, शोधकर्ता एरिक पेपर और रिचर्ड हार्वे ने बताया है कि स्मार्टफोन का अधिक यूज इसके दुरुपयोग की तरह है. पेपर ने इसे समझाते हुए कहा कि “स्मार्टफोन का अधिक उपयोग मस्तिष्क से न्यूरोलॉजिकल कनेक्शन बनाने लगता है” जिससे ये जरूरी न होते हुए भी जरूरी लगने लगता है. ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे लोग दर्द से मुक्ति पाने के लिए ऑक्सीनटिन लेने लगते हैं. पेपर ने कहा कि सोशल मीडिया की लत समाज पर बुरा असर डालती है. स्मार्टफोन के अधिक इस्तेमाल से कहीं न कहीं हमारा दिमाग इससे कनेक्ट होने लगता है और समाज से अलग करने लगता है.

सैन फ्रेंसिस्को के 135 स्टूडेंट पर किए इस अध्ययन में पेपर और हार्वे ने पाया कि वे स्टूडेंट जो अपने फोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं वे अपने-आप को बाकि लोगों से अलग, अकेला, तनावपूर्ण और चिंतित महसूस करते हैं. पीमेर ने कहा कि यह गतिविधि शरीर और मन को थोड़े समय के लिए आराम करने की इजाजत देती है. “सेमी-टास्किंग” के परिणामस्वरूप लोगों ने एक ही समय में दो या दो से अधिक कार्य किए, लेकिन अगर उनका ध्यान केंद्रित होता तो वे एक समय में एक ही कार्य करते.

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पेपर और हार्वे का कहना है कि डिजिटल एडिक्शन हमारी गलती नहीं है, ये कॉर्पोरेट उद्योग के लाभ को बढ़ाने की इच्छा का परिणाम था. जितने अधिक क्लिक्स और लाइक उतना अधिक पैसा. पेपर ने कहा हालांकि, अध्ययन ने सुझाव दिया कि अगर मुमकिन हो तो लोगों को अपने आप को फोन और कम्प्यूटर के अधिक इस्तेमाल से बचना चाहिए. पेपर ने पुश नोटिफिकेशन को बंद करने का सुझाव दिया, और कहा कि अगर संभव हो तो महत्वपूर्ण ईमेल और सोशल मीडिया का जवाब देना और महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करना चाहिए. साथ ही जितना हो सके मोबाइल और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम करना चाहिए.परिणामस्वरूप

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