छत्तीसगढ़

मुख्यालय की मॉडल आंगनबाड़ी जर्जर, बच्चों के ऊपर गिर रहा प्लस्तर का टूकडा

35 बच्चों और माताओं के लिए महज दो किलो दाल

–अनुराग शुक्ला

दंतेवाड़ा। अधिकारी और नेताओं को दिखाने जिले सहित मुख्यालय के अनेक आंगनबाडी केंद्रों को मॉडल बताया जा रहा हैं। लेकिन हकीकत कुछ और है। जिला मुख्यालय की ही बात करें तो वार्ड नंबर एक की आंगनबाडी केंद्र भवन ही हालत जर्जर है। दीवारों में दरारें हैं वहीं छत से पानी के साथ प्लस्तर का टुकडा गिर रहा है।

गुरुवार की सुबह जब चार बच्चे केंद्र में पहुंचे थे तभी छत से प्लस्तर का टुकडा गिरा। गनीमत इस वक्त बच्चे दरवाजे के पास ही थे। अपने पोते को छोडने केंद्र पहुंची सुखवंती दशहत में बच्चों को भेजने की जगह वापस घर ले गए। उसने कहा कि ऐसे भवन में बच्चों की जिंदगी को खतरा है।

आंगनबाडी केंद्र भवन की तरह ही यहां मिलने वाले पूरक पोषक आहार की भी स्थिति है। महीनों से बच्चों और माताओं को केवल दाल का खिचड़़़़़़़़ी खिलाया जा रहा है। जबकि विभाग के मैनू के हिसाब से बच्चोंं के लिए अलग और माताओं के लिए अलग मेनू है। जबकि आंगनबाड़ी केंद्रों में 9 तरह के आईटम से सजी थाली को पूरक भोजन का दर्जा दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस आंगनबाड़ी में बच्चों, गर्भवती और धात्री को मिला कर 35 सदस्य रजिस्टर्ड है। विभागीय इस व्यवस्था से कार्यकर्ता भी परेशान है लेकिन मीडिया के सामने खामोश रही। व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश उसके चेहरे और आंखों में स्पष्ट थे। उसने कहा कि इतना क्यों मिल रहा है, अधिकारी ही बता सकते है।

समूह नहीं निभा रही अपनी जिम्मेदारी

महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों को नर्मदा समूह सब्जी की सप्लाई करता है। तीन माह से हरी सब्जी के दर्शन आंगनबाड़ी केंद्रों में नही हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस समूह को परियोजना अधिकारी का वरदस्त प्राप्त है। इसलिए भी कार्यकर्ता समूह की शिकायत नहीं कर पा रहे है। सूत्रों की माने तो जिले में जितने भी समूह चल रहे है जिले में वे इसी तरह से चल रहे हैं। इसी वजह से नौनिहालों को पूरक भोजन नही मिल पा रहा है।

अधिकारी करते है नजरअंदाज

हर की आंगनबाडिय़ों को अधिकारी भी नजर अंदाज करते नजर आते हैं। नौनिहालों और महिलाओं के लिए ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि हर सुविधा मुहैया कराई जा रही है। मुख्यालय की आंगनबाड़ी की हालते ऐसी है, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि अंदरूनी इलाकों में आंगनबाडिय़ों का कैसा होगा। कुपोषण जारी जंग की पोल शहर की यह आंगन बाड़ी बयां कर रही है। सूरनार से एक हफ्ते पहले ही दो गंभीर कुपाषित बच्चों को भर्ती कराया गया था। यहां से ये दोनों बच्चे आए, अधिकारियों ने एक बार कोशिश भी नही की वहां की आंगनबाडी कार्यकर्ता ने इतने दिनों तक बच्चों पर गंभीरता क्यों नहीं दिखाई।

देखना जरूरी

इस संदर्भ में महिला बाल विकास के अधिकारी अभिषेक त्रिपाठी ने कहा कि आंगनबाडी केंद्र का अवलोकन और जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह पाऊंगा।

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