छत्तीसगढ़

प्रदेश भर में जलाए गए मोदी-अडानी-अंबानी के पुतले, मरवाही में किसान सभा के दो नेता गिरफ्तार

8 को छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान : किसान आंदोलन

ब्यूरो चीफ : विपुल मिश्रा

रायपुर : छत्तीसगढ़ किसान सभा और आदिवासी एकता महासभा सहित छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के घटक संगठनों ने आज गांव-गांव में मोदी-अडानी-अंबानी के पुतले जलाएं और किसान विरोधी काले कृषि कानूनों और बिजली कानून में संशोधन को वापस लेने की मांग की। इस देशव्यापी आंदोलन का आह्वान अ. भा. किसान संघर्ष समन्वय समिति और संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े 500 से ज्यादा किसान संगठनों ने किया था।

इन संगठनों द्वारा 8 दिसंबर को आहूत भारत बंद का भी छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन ने समर्थन किया है और प्रदेश की आम जनता से अपील की है कि किसानों की जायज मांगों के समर्थन में छत्तीसगढ़ पूरी तरह से बंद रखें, ताकि देश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जनजीवन बर्बाद करने वाले किसान विरोधी काले कानूनों को वापस लेने के लिए मोदी सरकार को मजबूर किया जा सके।

आज यहां जारी एक बयान में छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के संयोजक सुदेश टीकम और छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते ने यह जानकारी दी कि देशव्यापी आह्वान पर प्रदेश के सैकड़ों गांवों में मोदी और उनके कॉर्पोरेट आकाओं के पुतले जलाए गए।

छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन

मोदी-अडानी-अंबानी के पुतले जलाने के आरोप में मरवाही के नागवाही गांव से देवान सिंह मार्को और सिलपहरी से विशाल वाकरे को गिरफ्तार किया गया है। ये दोनों मरवाही जिले में छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेता हैं। छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन ने इसकी निंदा करते हुए उन्हें रिहा करने की मांग की है। सूरजपुर, सरगुजा, कोरबा, मरवाही, बिलासपुर, चांपा, राजनांदगांव, कांकेर, रायगढ़ सहित सभी जिलों के सैकड़ों गांवों से पुतले जलाने की लगातार खबरें आ रही हैं।

इन कानूनों में संशोधन की सरकार की पेशकश को वार्ता में शामिल नेताओं और संगठनों द्वारा ठुकराए जाने का किसान नेताओं ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि ये कानून कॉर्पोरेटपरस्त है, हमारे देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण जन जीवन के अस्तित्व के लिए खतरा है और इसलिए इन्हें वापस लिया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि जिंदगी और मौत की लड़ाई में बीच का कोई रास्ता नहीं होता।

छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के नेताओं ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने ही किसानों का विश्वास तोड़ा है और उसके अड़ियल रवैये के कारण किसान संगठनों से बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल रहा है। सभी किसान संगठनों की एकमात्र मांग यही है कि इन कृषि कानूनों को वापस लिया जाए। इससे ही विश्वास का माहौल पैदा होगा और संवाद की स्थिति बनेगी।

किसान नेताओं ने कहा है कि यदि आज की वार्ता का भी कोई नतीजा नहीं निकलता और सरकार का रवैया अड़ियल रहता है, तो दिल्ली की नाकेबंदी को और तेज किया जाएगा और राजमार्गों पर किसानों का जमावड़ा दिल्ली की ओर बढ़ने के लिए मजबूर होगा। उन्होंने कहा कि इस सरकार को किसानों के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए और इन काले कानूनों की वापसी के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाना चाहिए। इस मांग पर भारत बंद के आह्वान पर छत्तीसगढ़ बंद भी किया जाएगा।

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